Hindi Story:  फेसबुक पर किसी सीमा की पोस्टों के सभी दीवाने थे. हर कोई उस के फोटो, वीडियो और कमैंट को लाइक कर के कमैंट भी करता था. एक दिन उसी सीमा ने पोस्ट लिख कर मदद मांगी. क्या था सारा मामला?

फेसबुक की दुनिया मेंसीमानाम की एक आईडी थी, जिस की चमक किसी शांत दीपशिखा जैसी थी. उस पर रोजाना नेक इरादों से भरी पोस्ट्स डाली जाती थीं. कभीकभी प्यार और बिछोह की कविताएं भी दिख जाती थीं, जो सीधे दिल को छू लेती थीं. यह आईडी जल्दी ही मशहूर हो गई. लाइक्स और कमैंट्स की बरसात होने लगी. सीमा की फैं्रड लिस्ट में उम्र के हर पड़ाव के लोग थे. किशोरों का जोश, नौजवानों की बेचैनी, अधेड़ों का अनुभव और बूढ़ों का स्नेह. जब भी प्यार की कोई भावुक कविता या कोई दिलकश तसवीर पोस्ट होती तो कमैंट बौक्स में एक बेकाबू सी भीड़ जमा हो जाती. कोई मोबाइल नंबर की गुहार लगाता, तो कोई पता पूछ कर मिलने आने का वादा करता.


महीनों तक यह मीठा दौर चलता रहा, लोगों का यकीन गहराता गया. फिर एक दिन इस मीठे भ्रम पर एक कड़वा सच टूट पड़ा. सीमा की आईडी पर एक दिल दुखाने वाली पोस्ट दिखाई दी.
पोस्ट में लिखा था, ‘आज मेरा सुहाग खतरे में है. मेरे पति के साथ एक भयानक हादसा हो गया है. इलाज में जितना पैसा था, सब खर्च हो चुका है. उन की हालत में अभी भी कोई सुधार नहीं है. हम कर्ज में डूब गए हैं. अगर आप लोग मेरी थोड़ी भी मदद कर देते तो मेरे पति की जान बच जाती. मेरा सुहाग उजड़ने से बच जाता. मैं आप सब के सामने हाथ जोड़ती हूं.’ यह कमैंट पोस्ट होते ही हमेशा की तरह लोगों ने लिखना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार उपदेशों की बाढ़ थी.


किसी ने लिखा, ‘चिंता मत करो बहन. ऊपर वाला सब ठीक कर देगा. हिम्मत मत हारो.’
एक ने आध्यात्मिक नुसखा दिया, ‘आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू करवाइए, फिर देखिए चमत्कार.’
एक आदमी ने केवल अफसोस जताया, ‘बहुत बुरा हुआ. भाग्य में लिखे कष्ट तो भोगने ही पड़ते हैं.’
तभी एक की आवाज उठी, ‘कोई मदद करो रे भाई. उपदेश और हमदर्दी से किसी का इलाज नहीं होता.’
इस कमैंट के पीछे कई लोग पड़ गए. एक ने सवाल दागा, ‘आप ने कितनी मदद की है, जो दूसरों को बोल रहे हैं?’ दूसरे ने अपनी जेब की मजबूरी बताई, ‘मैं तो दे देता, लेकिन मेरे सारे पैसे अभी शादी की खरीदारी में खर्च हो गए.’


और फिर एक के द्वारा शक का बीज बोया गया, ‘बिना जानपहचान के आप को पैसे कैसे भेज दें? क्या पता यह कोई नकली आईडी हो? आजकल लोग खुद को मुसीबत में बता कर रकम ऐंठते रहते हैं.’
इस बात का कई लोगों ने तुरंत समर्थन किया. ‘सीमाकी प्रोफाइल पर कई दिनों तक यही बहस और तकरार चलती रही. मैसेज बौक्स में भी कुछ लोगों से निजीतौर पर बात कर के पैसों की मांग की जा रही थी. रमेश नाम का एक पुलिस वाला था, जो चुपचाप सारे कमैंट्स और पोस्ट को ध्यान से पढ़ रहा था. उस की पेशेवर आंखें इस कहानी में एक गहरा छेद देख रही थीं. उस के मन में कई सवाल घुमड़ रहे थे, ‘इतनी जल्दी इतना बड़ा हादसा? औनलाइन गुहार? मदद के लिए बारबार गुजारिश?’


एक दिन रमेश नेसीमाको एक निजी मैसेज भेजा. एक जाल बिछाते हुए उस ने लिखा, ‘क्या आप फोन पर बात कर सकती हैं? मैं अपना मोबाइल नंबर दे रहा हूं. आप मु? भी अपना मोबाइल नंबर भेज सकती हैं. आप किस शहर से हैं? अगर आप रायपुर से हैं, तो मिलिए. मैं आप की पूरी मदद करूंगा.’ उधर से तुरंत जवाब आया, जो रमेश के शक को और पुख्ता कर गया, ‘जी, मैं रायपुर से ही हूं, लेकिन इस समय दिल्ली में अपने मायके में हूं. यहीं मेरे पति का इलाज चल रहा है. आप जगह बताइए, मैं अपनी छोटी बहन को भेज दूंगी.’ रमेश को लगा कि लड़की सीधे मिलने से बचना चाहती है. रमेश ने मिलने का समय और रायपुर के बीचोंबीच घड़ी चौक का पता बता दिया.


अगले दिन रमेश को एक अनजान नंबर से फोन आया. एक लड़की की आवाज थी, ‘भैया, मैं सीमा की छोटी बहन बोल रही हूं. आप सोनडोंगरी जाइए.’ ‘‘लेकिन सीमाजी से तो बात हुई थी कि आप घड़ी चौक पर मिलेंगी?’’ रमेश ने अपनी आवाज सामान्य रखी. मेरे पैर में कल रात को मोच गई, इसलिए मैं नहीं सकती,’ लड़की ने बहाना बनाया. रमेश ने पता लिया और एक घंटे बाद सोनडोंगरी पहुंचने की बात कही. यह सब उस ने अपनी तेजतर्रार थाना प्रभारी विनीता मिश्रा को बताया. तभी योजना बन गई कि सिविल ड्रैस में जाना है, सारी हकीकत जाननी है.


योजना के तहत सोनडोंगरी पहुंच कर रमेश ने लड़की को फोन किया. लड़की ने जो पता बताया, वह जगह शहर के छोर पर, एकदम सुनसान थी. पुलिस वालों का माथा ठनका. थानेदार विनीता मिश्रा ने कहा, ‘‘रमेश, तुम अकेले अंदर जाओ. हम लोग उस घर के आसपास ही घात लगा कर रहेंगे. कोई गड़बड़ लगे, तो जोर से चीखना या केवल खांसना.’’ रमेश बताए गए मकान के पास पहुंचा.

बाहर एक साधारण, लेकिन खूबसूरत लड़की खड़ी थी. वही, जो फेसबुक परनेक बातेंवाली पोस्ट करती रही होगी. लड़की रमेश को अंदर ले गई, जहां 4 हट्टेकट्टे, बदमाश किस्म के नौजवान बैठे थे.
रमेश का शक अब ठोस यकीन में बदल चुका था. उस ने अपनी कमर में दबी पिस्तौल को टटोला, लेकिन सब्र से काम लिया.


‘‘अच्छा तो निकाल सारे पैसे,’’ उन में से एक बदमाश ने धमकाते हुए कहा.
रमेश ने कहा, ‘‘जी, पैसे बाइक की डिक्की में रखे हैं. अभी ले कर आता हूं,’’ यह कह कर वह तुरंत घर से बाहर निकला और जोर से खांसा झाड़ियों में छिपे पुलिस वाले फौरन सामने गए.
‘‘घर में बदमाश हैं. घर को घेर लिया जाए,’’ रमेश ने गरज कर कहा. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की.

कुछ जवान घर के बाहर घेरा डाले खड़े हो गए और बाकी अंदर घुसे.
बदमाशों ने चाकू निकाल कर डराने और भागने की नाकाम कोशिश की, लेकिन वे पुलिस के सामने टिक नहीं पाए और हिरासत में ले लिए गए. थाने ला कर उन की जम कर कुटाई की गई. घंटों की पूछताछ में उन्होंने अपना पूरा धंधा उगल दिया.
लड़की और चारों बदमाशों ने बताया कि वे कई नकली आईडी बना कर सालों से भोलेभाले लोगों को ठग रहे थे. वे इमोशनली ब्लैकमेल करते थे, लोगों को मिलने के लिए बुलाते थे, उन से मारपीट कर के पैसे छीनते थे और औनलाइन ठगी भी करते थे.


अगले ही दिन सब को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया. रमेश ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली, जिसे पढ़ कर लोग सन्न रह गए. सीमा की आईडीकी पोल खुल चुकी थी. रमेश ने उस लुटेरी लड़की और बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद की तसवीर भी पोस्ट की. दनादन कमैंट्स की बाढ़ गई, जिन में गुस्सा, शर्मिंदगी और राहत का मिलाजुला भाव था. रमेश ने अपनी पोस्ट के आखिर में एक चेतावनी दी, ‘किसी की मदद करना गलत नहीं है, लेकिन आजकल धोखाधड़ी का जाल इतना घना हो चुका है कि हमें आंखें खोल कर कदम उठाने की जरूरत है. किसी भी अनजान को मुसीबत के नाम पर पैसे भेजने से पहले उस की जांच जरूर करें.’ Hindi Story  



सरकारी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस की इंटैलिजैंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक आपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने बेरोजगारों को गुमराह कर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने की कोशिश करने वाले एक रैकेट का परदाफाश कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण और संस्कृति मंत्रालय की हूबहू नकल वाली फर्जी वैबसाइट बना कर नौजवानों को ठगने की योजना बनाई थी, जिस के तहत 150 अभ्यर्थियों का चयन कर जयपुर में लिखित परीक्षा भी ले ली गई.

लिखित परीक्षा में कामयाब दिखा कर आरोपी उन से ठगी की कोशिश करते इस से पहले ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. मेन आरोपी का नाम कुलदीप है, जो जयपुर का रहने वाला है और बीकौम, एलएलबी के दूसरे साल का छात्र है. दूसरा आरोपी पीयूष भी जयपुर का रहने वाला है और उस ने बीटैक (कंप्यूटर साइंस) कर रखा है. इन के पास से 2 स्मार्टफोन, एक लैपटौप, पासबुक, डैस्कटौप कंयूटर, एक आईपैड, एक टैबलेट बरामद किया गया.

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