मुस्लिम समाज की संकीर्णताओं से रमजानी भलीभांति वाकिफ थीं. इसीलिए उन्होंने यौवन की दहलीज पर कदम रखने वाली अपनी बेटी सलमा को हर कदम सोचसमझ कर रखने की सलाह दी. फिर भी अनजाने में उस से एक भूल हो ही गई.