आप घर से दफ्तर, किसी टूर या अन्य काम से निकलते हैं तो घर सुरक्षित वापस आ जाएंगे या किसी अनहोनी का शिकार नहीं होंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं. वाहन नहीं है तो हो सकता है रास्ते में कहीं लिफ्ट लें और यदि वाहन है तो हो सकता है दयाभाव मन में आए और आप किसी को लिफ्ट दे दें लेकिन लिफ्ट का चक्कर कई बार माल और जान दोनों पर भारी पड़ जाता है. राहजनी करने वालों की गिद्ध दृष्टि सड़कों पर शिकार तलाशती रहती है और आप को पता भी नहीं चलता. जो जाल में फंसता है उसे कोई नहीं बचा सकता.

राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऐसे कई खतरनाक गिरोह सक्रिय हैं जो लिफ्ट दे कर लोगों को लूटते हैं. मामूली लालच में वे हत्या करने से भी नहीं चूकते. चारपहिया वाहन चालकों से लिफ्ट लेने में भी ये माहिर खिलाड़ी होते हैं. वाहन चालक झांसे में आ जाए, इस के लिए वे अपने साथ महिला व बच्चों को भी रखते हैं. लूटने वालों ने अनोखे तरीके ईजाद किए हुए हैं. अनजाने में लोग इन के शिकार हो जाते हैं.

डा. सुमन त्यागी, उत्तर प्रदेश के कसबा किठौर में निजी क्लीनिक चलाती थीं. एक दिन वे क्लीनिक के लिए निकलीं, लेकिन रहस्यमय हालात में लापता हो गईं. उन का मोबाइल भी स्विच औफ हो गया. परिजनों को चिंता हुई. इंतजार के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई. जम कर खोजबीन हुई. पार्षद पति डा. ब्रजेश त्यागी व उन से जुड़े लोगों ने हंगामा किया, जाम लगाया और पुलिस पर नाकामी का आरोप लगाया.

पुलिस ने अपहरण की धाराओं में मामला भी दर्ज कर लिया. सुमन को जमीन निगल गई थी या आसमान, कोई नहीं जानता था. कई महीने तक भी उन के जिंदा या मुर्दा होने का कुछ पता न चला. परिजनों ने सूचना देने वाले को 5 लाख रुपए का इनाम देने के पोस्टर भी कई स्थानों पर चस्पां कराए. डेढ़ साल के बाद भी सुमन का कोई सुराग नहीं लगा. परिजन व पुलिस दोनों ही थक कर शांत बैठ गए थे कि अचानक 13 जून को इस का राज खुल गया.

गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद पुलिस ने बावरिया गिरोह के 5 बदमाशों को गिरफ्तार किया. उन्होंने राजमार्गों पर होने वाली लूट व हत्याओं की कई वारदातों का इकबाल किया. इसी गिरोह ने कुबूल किया कि डा. सुमन त्यागी को भी उस ने ही अपनी जीप में लिफ्ट दे कर पहले लूट का शिकार बनाया और फिर गला दबा कर हत्या कर के शव को नहर में फेंक दिया.

फेंक देते थे नहर में शव

बेहद खूंखार इस गैंग ने दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, अलीगढ़, नोएडा व हापुड़ जैसे स्थानों को अपने निशाने पर रखा हुआ था. गिरोह का लूट का तरीका बिलकुल अलग था. ये लोग अपने पास बोलेरो जीप रखते थे. बस अड्डों पर बस के इंतजार में खड़े लोगों को बैठा लेते थे. लोग आसानी से झांसे में आ जाएं, इस के लिए अपनी पत्नी व बच्चों को भी बैठा कर रखते थे. रास्ते में लूटपाट कर के उन्हें सड़क पर हत्या कर के किसी जंगल या नहर में शव फेंक देते थे. गिरोह ने इसी तरह 100 से ज्यादा वारदातें कीं. पकड़े जाने के डर से ये इलाका बदलते रहते थे. हत्या व लूट के कई मामलों से परदा तो उठ गया, लेकिन इस के सरगना को पुलिस नहीं पकड़ सकी.

गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी का कहना है, ‘‘लोगों को अनजान लोगों व डग्गामारी करने वालों के वाहनों में बैठने से बचना चाहिए. पकड़े गए बदमाशों के अलावा और भी बदमाश हैं जो ऐसी ही वारदातें करते हैं. हम उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं.’’

नएनए हथकंडे

हाईवे पर लूट के कई तरीके हैं. कोई लिफ्ट दे कर लूटता है तो कोई ले कर. कोई पंक्चर होने की बात कर के तो कोई पैर पर गाड़ी चढ़ने की बात कह कर. कुश शर्मा नोएडा की एक मोबाइल कंपनी में जौब करता है. अपने परिजनों से मिल कर वह स्विफ्ट कार में सवार हो कर मेरठ से औफिस जा रहा था. वह जैसे ही मुरादनगर पहुंचा तो हलका जाम लग गया. इसी बीच एक युवक शीशे पर हाथ मार कर बाईं ओर से चिल्लाया कि मेरे पैर पर गाड़ी चढ़ा दी. कुश घबराहट में गाड़ी रोक कर नीचे उतर गया. युवक ने बेवजह शोर मचाया, ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था. वह वापस सीट पर आ कर बैठ गया. लेकिन इसी बीच डैशबोर्ड पर रखे उस के 2 महंगे मोबाइल गायब हो चुके थे. गाड़ी पैर पर चढ़ने की बात करने वाला युवक भी पलक झपकते ही नदारद हो गया.

दरअसल, कुश लूटपाट करने वाले गिरोह का शिकार हो गया था. यूपी के नैशनल हाईवे पर पड़ने वाले मोदीनगर व मुरादनगर थाने में इसी तरह के कई मामले दर्ज हैं. लूट करने वालों का दूसरा तरीका होता है आप की कार में पंक्चर बता कर. यह गिरोह कार में चलता है और उस के कुछ सदस्य पैदल होते हैं. गिरोह के सदस्य चालक को बताते हैं कि उस की कार के पिछले पहिए में पंक्चर हो गया है या पैट्रोल लीक हो रहा है. चालक नीचे उतर कर देखता है तो लूट का शिकार हो जाता है. एनसीआर के इंदिरापुरम थाने की पुलिस ने ऐसे गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार कर के कुछ मामलों का खुलासा किया. बकौल इंस्पैक्टर राजेश द्विवेदी, ‘‘हम ने जिस गिरोह को पकड़ा वह लोगों की कार के डैशबोर्ड पर रखे महंगे मोबाइल फोन लूटता था. यह गिरोह उन्हीं को निशाना बनाता था जो अधिकांश अकेले होते थे या जिन के डैशबोर्ड पर मोबाइल रखे होते थे. महंगे मोबाइल को डैशबोर्ड पर रखना लुटेरों को न्यौता देने जैसा साबित हो रहा है.’’

छात्र बन कर लेते हैं लिफ्ट

युवकों का ऐसा भी गिरोह होता है जो छात्र बन कर पहले लिफ्ट लेता है फिर लूटता है. चैकिंग के दौरान गाजियाबाद पुलिस ने शादाब, वसीम व अंकित को गिरफ्तार किया. इन तीनों बदमाशों के पास चोरी की 2 बाइकें व कुछ हथियार मिले. यह गिरोह रात को पीठ पर बैग लटका कर छात्रों की ड्रैस पहन कर खड़ा हो जाता था और कार चालकों से लिफ्ट लेता था. लिफ्ट देने वालों को लूट लिया जाता था. कई बार मोटरसाइकिल से कार को ओवरटेक कर के भी लूटपाट करते थे. जब अंकित से पूछा गया कि यह आइडिया कहां से आया तो उस ने बताया कि कार चालक जल्दी विश्वास करें, इसलिए वे छात्र बन कर रहते थे, ताकि लिफ्ट मिल जाए.

अंडामार लुटेरे

वाहन चालकों को लूट का शिकार बनाने के लिए अनोखे तरीके अपनाए जाते हैं. सड़कों पर अंडामार लुटेरे भी होते हैं. आप की चलती कार के शीशे पर यदि कोई मुरगी का अंडा फेंक दे तो उसे साफ करने के लिए कार रोकने, पानी डाल कर वाइपर चलाने की तत्काल गलती न करें. इस से लुटेरे आप को अपना शिकार बना सकते हैं. दरअसल, जैसे ही अंडे की जर्दी को साफ करने के लिए वाइपर चलाया जाता है, उस की सफेदी पूरे शीशे पर फैल जाती है. इस से शीशा बुरी तरह धुंधला हो जाता है मजबूरन कार रोकनी पड़ती है और इसी बीच पीछा करता गिरोह लूटपाट शुरू कर देता है.

लुटेरी हसीनाएं

सुनसान सड़क या बस स्टौप पर, कोई जींसटौप पहने खूबसूरत युवती आप से मोहक मुसकान के साथ लिफ्ट मांगे तो कई बार सोच लें, क्योंकि यह नुकसानदेह हो सकता है. ऐसी युवतियां लूट करने वाले गिरोह की सदस्य भी हो सकती हैं. कई बार वे अपने साथियों से लुटवा देती हैं तो कई बार हथियार की नोंक व इज्जत से खिलवाड़ करने का आरोप लगाने की धमकी दे कर खुद ही लूट लेती हैं. मामला लड़की का होता है, इसलिए शर्मिंदगी में कई बार लूट का शिकार व्यक्ति किसी से कुछ कह भी नहीं पाता. कई हाईवेज पर ऐसी लड़कियां सक्रिय हैं जिन्हें हर वक्त अपने शिकार की तलाश रहती है.

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