देशभर में अराजकता इतनी बढ़ गई है कि कहीं भी कोई युवा जोड़ा अब सुरक्षित नहीं रह गया है. नैतिकता के नाम पर गांवगांव, कसबेकसबे में गुंडों के गुट राह चलते किसी भी जोड़े को पकड़ लेते हैं और उन पर इम्मोरल होने का आरोप लगा कर तुरंत सजा देते हैं. वे खुद बच निकलते हैं क्योंकि इसे संस्कृति की रक्षा करने के लिए किया गया काम जो कहा जाता है.

आजकल ऐसे बहुत से वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन में खेतों में 3-4 लड़के किसी जोड़े को पकड़ कर मारतेपीटते हैं, लड़की का रेप करते हैं, वीडियो बनाते हैं और फिर दनदनाते हुए निकल ही नहीं जाते, वीडियो को पोस्ट भी कर देते हैं. उन्हें मालूम है कि आज के माहौल में उन्हें कोई नहीं पकड़ेगा.

छत्तीसगढ़, जहां भारतीय जनता पार्टी का राज है, के कोरबा क्षेत्र में 19 साल के एक लड़के ने बिना कारण आत्महत्या कर ली. मातापिता हैरान थे कि क्या हुआ. 10 दिनों बाद पता चला जब एक लड़की पुलिस थाने पहुंची कि सुनसान रास्ते में 2 लड़कों ने उस का रेप किया था और उस के साथ मौजूद लड़के, जिस ने आत्महत्या कर ली, को रेप होते हुए देखने को मजबूर किया था.

इस शर्मिंदगी को वह लड़का सह नहीं पाया और उस ने आत्महत्या कर ली. लड़की इस अपराधभाव से मुक्त नहीं हो पाई और 10 दिनों बाद उस ने कटघोरा के पुलिस स्टेशन पहुंच कर शिकायत दर्ज करा दी.

एक तरफ देश में बेटी बचाओ के नारे लगाए जा रहे हैं, दूसरी ओर बेटियों का खुलेआम नैतिकता के नाम पर बलात्कार किया जा रहा है. दोस्ती करना और प्रेम करना हर युवा का अधिकार है पर पाखंड के पुजारी इस प्रेम पर पाबंदी लगाना चाहते हैं ताकि विवाह केवल जातियों में, कुंडलियां मिला कर, दानदक्षिणा दे कर ही हो. दरअसल, यह संस्कृति बचाओ अभियान नहीं है, बल्कि यह व्यापार बचाओ अभियान है.

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