दिल्ली के बेहद पौश माने जाने वाले महारानी बाग निवासी गौरव कुमार बिजनैस के सिलसिले में सिंगापुर गए हुए थे. कोठी में उन की पत्नी स्वाति अकेली ही थीं. साफसफाई का काम करने वाली मार्गरिटा 23 मई, 2017 को बैडरूम की सफाई कर रही थी तो उसे लगा कि बैडरूम की खिड़की का शीशा अपनी जगह से थोड़ा हटा हुआ है. देख कर ही लगता था कि किसी ने शीशे को बाहर से खोलने की कोशिश की थी.

मार्गरिटा ने यह बात स्वाति को बताई तो उन्होंने भी शीशे को गौर से देखा. सचमुच खिड़की का शीशा अपनी जगह से हटा हुआ था. उन्होंने अन्य नौकरों को बुला कर दिखाया तो सभी ने एक राय से कहा कि कुछ गड़बड़ जरूर है. स्वाति ने नौकरों की मदद से कोठी के सामान की जांच की तो सब कुछ अपनी जगह था.

गौरव कुमार का औफिस कोठी में ही था. औफिस के रिसैप्शन पर रखी सेफ में काफी कैश रखा रहता था. स्वाति ने सेफ खोली तो उस में रखे करीब 3 लाख रुपए और 250 यूएस डौलर गायब थे. स्वाति ने फोन कर के यह बात पति को बताई तो उन के कहने पर स्वाति ने तुरंत कपड़े बदले और मार्गरिटा तथा अन्य नौकरों को साथ ले कर थाना न्यू फ्रैंड्स कालोनी जा पहुंची.

थानाप्रभारी सुशील कुमार से मिल कर उन्होंने अपनी कोठी पर घटी वारदात के बारे में बताया. थानाप्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी अफसर को केस दर्ज करने का आदेश दे दिया.

ड्यूटी अफसर ने इस मामले को भादंवि की धारा 457, 180 के अंतर्गत दर्ज कर लिया. तत्पश्चात इस केस की जांच एएसआई सुरेश कुमार को सौंप दी गई. सुरेश कुमार शाम को महारानी बाग स्थित गौरव कुमार की कोठी पर गए. उन्होंने घटनास्थल का मुआयना करने के साथ स्वाति से पूछताछ की. स्वाति ने उन्हें बैडरूम में ले जाकर वह खिड़की भी दिखाई, जिस का शीशा हटा कर चोर बैडरूम में दाखिल हुआ था.

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सुरेश कुमार ने उस खिड़की को गौर से देखा, जिस का शीशा बड़ी सफाई से हटा कर चोर अंदर आया था. उसे देख कर सुरेश कुमार को समझते देर नहीं लगी कि चोरी करने वाला काफी शातिर था. उन्होंने फोन कर के क्राइम टीम को बुला लिया और सारे सबूत जुटाए. क्राइम टीम ने चोर के फिंगरप्रिंट्स तथा पैरों के निशान भी उठाए. इस काररवाई के बाद सुरेश कुमार थाने लौट आए.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट थानाप्रभारी सुशील कुमार को दे दी. थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी. चोरी का यह मामला दिल्ली जैसे महानगर के लिए कोई बड़ा तो नहीं था, लेकिन चूंकि इस तरह के कई मामले अन्य थानों में लगातार दर्ज हुए थे, इसलिए महत्त्वपूर्ण भी था और अपराध के नजरिए से गंभीर भी.

इस घटना की सूचना मिलने के बाद दक्षिणपूर्वी दिल्ली के डीसीपी रोमिल बानिया ने इस केस को हल करने की जिम्मेदारी औपरेशन सेल के एसीपी के.पी. सिंह को सौंप कर चोरों को जल्दी से जल्दी पकड़ने का आदेश दिया.

एसीपी के.पी. सिंह ने चोरों को पकड़ने के लिए दिल्ली के दक्षिणपूर्वी जिले के स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र सिंह, एसआई प्रवेश कसाना, एएसआई दयानंद, हैडकांस्टेबल नरेश कुमार और दयानंद की एक टीम बनाई. वह खुद भी टीम के साथ उन चोरों की तलाश में जुट गए, जो दक्षिणपूर्वी दिल्ली की पौश कालोनियों में चोरियां कर रहे थे. इन चोरों के निशाने पर कोठियां ही होती थीं.

इंसपेक्टर राजेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ महारानी बाग स्थित स्वाति की कोठी पर पहुंचे और उन से सारी जानकारी ली. अपना बयान दर्ज कराने के दौरान स्वाति ने उन्हें एक मोबाइल फोन देते हुए बताया कि यह फोन उन्हें बैडरूम में मिला था. हो सकता है, यह फोन उसी चोर का हो, जिस ने उन के यहां चोरी की थी.

मोबाइल फोन को देख कर राजेंद्र सिंह को लगा, इस से उन की राह आसान हो गई है. वह सैमसंग कंपनी का कीमती मोबाइल फोन था. मोबाइल एसआई प्रवेश कसाना को सौंप कर राजेंद्र सिंह कोठी के अन्य नौकरों से पूछताछ की. इस के बाद वह अपनी टीम के साथ वापस लौट आए.

मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की गई तो पता चला कि वह मोबाइल फोन इरफान नाम के किसी व्यक्ति का था. उस के दूसरे नंबरों के बारे में पता कर के उन्हें सर्विलांस पर लगा दिया गया. एसआई प्रवेश कसाना यह देख कर हैरान थे कि चोर न केवल बारबार अपना नंबर बदल रहा था, बल्कि वह अपना मोबाइल फोन भी कुछ ही दिनों में बदल देता था.

राजेंद्र सिंह ने चोर के ठिकाने का पता लगाने की जिम्मेदारी एसआई प्रवेश कसाना को सौंप रखी थी. वह उस चोर के बारे में पता करने के लिए रातदिन एक किए हुए थे. आखिर जुलाई के पहले सप्ताह में उन्होंने चोर का पता लगा ही लिया. उस का नाम इरफान ही था और वह बिहार के जिला सीतामढ़ी के गांव जोगिया का रहने वाला था. उस समय उस की लोकेशन उस के गांव की ही मिल रही थी.

6 जुलाई को स्पैशल स्टाफ की यह टीम बिहार के जिला सीतामढ़ी पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से इरफान को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने न्यू फ्रैंड्स कालोनी सहित दिल्ली में हुई कई अन्य चोरियों का अपराध स्वीकार कर लिया.

8 जुलाई को सीतामढ़ी की अदालत में पेश कर के इरफान को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया और दिल्ली की साकेत अदालत में पेश कर के चोरी का सामान बरामद करने के लिए उसे 7 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान इरफान से की गई पूछताछ और चोरी के सामानों की बरामदगी की जो कहानी सामने आई, वह काफी दिलचस्प थी—

रफान उर्फ उजाला उर्फ आर्यन खन्ना बिहार के जिला सीतामढ़ी के थाना पुकरी के छोटे से गांव जोगिया का रहने वाला था. उस के परिवार में अब्बा मोहम्मद आबिद, मां रेहाना तथा 2 भाई सलमान और गुलफाम थे. गांव में इरफान का छोटा सा मकान था. पूरा परिवार उसी में रहता था. पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. गांव में मेहनतमजदूरी कर के वह किसी तरह परिवार को पाल रहे थे. जहां घर का खर्चा ही मुश्किल से चल रहा हो, वहां आबिद अपने बच्चों को पढ़ानेलिखाने की कहां से सोचता. उस के तीनों बेटे स्कूल तो गए, पर 8वीं से ज्यादा कोई नहीं पढ़ सका.

गरीबी की मार ने इरफान और उस के भाइयों को कमउम्र में ही रोजीरोटी की तलाश में घरपरिवार छोड़ कर बाहर जाने को मजबूर कर दिया. एकएक कर के तीनों भाई मांबाप को छोड़ कर नौकरी की तलाश में दिल्ली आ गए.

सब से पहले सलमान दिल्ली आया. वह बैग और पर्स बनाने का काम करने लगा. दिल्ली में पैर जमाने के बाद उस ने छोटे भाई गुलफाम को भी अपने पास बुला लिया. दोनों भाई दिल्ली से घर रुपए भेजने लगे तो घर की आर्थिक स्थिति कुछ संभल गई. धीरेधीरे सब कुछ ठीक हो गया. इस के बाद एकएक कर के तीनों भाइयों की शादियां भी हो गईं.

सब से छोटा इरफान गांव में ही बीवी के साथ रहता था. वह वहीं छोटामोटा काम कर के और बड़े भाइयों की मदद से अपना गुजारा कर रहा था. लेकिन जब वह एक बेटी का बाप बना तो जिम्मेदारी बढ़ने से वह भी गांव छोड़ कर दिल्ली चला आया और भाइयों के साथ बैग, लेडीज पर्स और बटुए बनाने का काम सीख कर काम करने लगा.

इरफान के ही गांव का सलीम भी दिल्ली में रहता था. ये सभी दिल्ली के तुर्कमान गेट में रहते थे. एक ही गांव के होने के कारण कुछ ही दिनों में सलीम और इरफान में गहरी दोस्ती हो गई. दोनों अपनी कोई भी बात एकदूसरे से नहीं छिपाते थे.

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इरफान ने कुछ दिनों तक तो बैग, पर्स आदि बनाने का काम किया, उस के बाद उस ने सलीम के साथ मिल कर बाहरी दिल्ली के बवाना में बैग और पर्स की दुकान खोल ली. दोनों ने इस उम्मीद से दुकान खोली थी कि इस से उन्हें ठीकठाक कमाई होगी, लेकिन 2 साल तक दुकान चलाने के बाद फायदा होने की कौन कहे, उन्हें काफी नुकसान हो गया. मजबूरन उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी.

इस बीच इरफान एक और बच्ची का बाप बन गया था. खर्चा बढ़ गया था, जबकि कमाई का साधन खत्म हो गया था. वह घर रुपए नहीं भेज पाया तो परेशान हो कर उस की पत्नी दोनों बेटियों को उस के हवाले कर के मायके चली गई. इरफान दोनों बेटियों को मां को सौंप कर दिल्ली चला आया.

इरफान का दोस्त सलीम काम करने के अलावा छोटीमोटी चोरियां भी करता था, लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं गया. उस ने इरफान को भी चोरी करने की सलाह दी. इरफान को थोड़ा डर तो लगा, लेकिन और कोई रास्ता न देख वह सलीम के साथ चोरी में किस्मत आजमाने के लिए तैयार हो गया. सलीम ने उसे चोरी के सारे गुर बता दिए.

उस के पास मोटरसाइकिल थी, जिस से वह ऐसे घरों की तलाश में निकलता था, जिस में रहने वाला परिवार कहीं बाहर गया होता था. इरफान उस घर में घुसता और सारा माल समेट कर कुछ दूरी पर इंतजार कर रहे सलीम को फोन कर देता. सिगनल मिलते ही वह उसे लेने पहुंच जाता. कुछ घरों में चोरी करने के बाद जब इरफान के हाथ काफी रकम और सोने के गहने लगे तो उन्हें बेच कर दोनों ठाठ की जिंदगी जीने लगे. अब दोनों की लाइफस्टाइल भी बदल गई थी.

इरफान बचपन से ही कपड़ों का शौकीन था. वह फिल्मी हीरो जैसे कपड़े पहनना चाहता था, लेकिन पैसों के अभाव में उस का यह शौक पूरा नहीं हो रहा था. लेकिन जब चोरी से पैसे आए तो सब से पहले उस ने ब्रांडेड कपड़े, महंगा स्मार्ट फोन और घूमने के लिए नई मोटरसाइकिल खरीदी. यही नहीं, पत्नी तो थी नहीं, इसलिए वह बाजारू लड़कियों के साथ अय्याशी करने लगा. उसे कोई रोकनेटोकने वाला था नहीं, इसलिए उस के मन में जो आता, वह वही करता था.

इरफान और सलीम ने चोरी को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया था. यह सौ फीसदी मुनाफे का धंधा था. चूंकि वे दोनों कभी पकडे़ नहीं गए, इसलिए उन की हिम्मत बढ़ती गई. इरफान काफी खुश था. वह जब भी गांव जाता, काफी बनठन कर जाता. उस के हावभाव और शाही खर्च देख कर गांव वाले हैरान थे. सभी को यही लगता था कि इरफान बहुत बड़ा बिजनैसमैन है. गांव वालों की नजरों में खुद को बड़ा आदमी दिखाने के लिए वह गांव वालों की भलाई के काम करने लगा. उस ने कई गरीब लड़कियों की शादी कराई, गांव में बीमार लोगों के इलाज के लिए हेल्थ कैंप लगवाए.

इरफान द्वारा किए गए कामों से घरघर में उस की चर्चा होने लगी. जिस का उस ने इलाज करवाया, जिन गरीबों की बेटियों की शादियां करवाईं, उन की नजर में वह भगवान तो नहीं, लेकिन वे उसे उस से कम भी नहीं मानते थे.

वह गांव में अकसर नेताओं की तरह कुरतापैजामा पहनता था, जबकि दिल्ली में अपटूडेट शहरी बन कर रहता था. उस ने दिल्ली में अपने लिए कार भी खरीद ली थी और शाहीन बाग में किराए का मकान भी ले लिया था.

उसे बेटियों की पढ़ाई की चिंता हुई तो उन का दाखिला दिल्ली के किसी अच्छे स्कूल में कराने के लिए वह उन्हें दिल्ली ले आया. लेकिन काफी प्रयास के बाद भी किसी अच्छे स्कूल में उन का दाखिला नहीं हो सका. मजबूर हो कर वह उन्हें अपनी मां के पास गांव छोड़ आया.

इरफान दिलफेंक और अय्याश युवक था. अय्याशी के लिए वह दिल्ली और मुंबई के डांस बारों के चक्कर लगाने लगा. अगर कभी उसे किसी डांसर से अपनी पसंद का गाना सुनना होता तो इस के लिए वह 10-20 हजार रुपए देने से भी पीछे नहीं हटता था.

वह लाखों रुपए दोस्तों और लड़कियों पर खर्च कर देता था. रुपयों के लालच में दिल्ली ही नहीं, मुंबई में भी उस की कई गर्लफ्रैंड थीं. जिन से वह अलगअलग समय पर मिल कर मौज करता था.

2 साल पहले उस की मुलाकात आगरा की रेशमा से हुई थी. वह अपनी छोटी बहन शबनम के साथ बिहार के दरभंगा में प्रोग्राम देने गई थी. इरफान भी वहां गया था. इरफान ने रेशमा और शबनम के एकएक ठुमके पर हजारों रुपए लुटा दिए थे. उस के ठाठबाट और शाही खर्च देख कर रेशमा उस पर मर मिटी.

प्रोग्राम खत्म होने के बाद रेशमा इरफान से मिली. इस मुलाकात में इरफान भी रेशमा को दिल दे बैठा. रेशमा भोजपुरी फिल्मों में छोटेमोटे रोल भी करती थी. इस के बाद इरफान कई बार रेशमा के साथ मुंबई गया, जहां दोनों ने खूब सैरसपाटे किए. इरफान के रुपए खत्म हो जाते तो वह चोरी करने दिल्ली आ जाता. एक बार उस ने जालंधर में भी चोरी की थी.

22 मई की रात को उस ने महारानी बाग के बिजनैसमैन गौरव कुमार की कोठी में चोरी की. माल समेटने के दौरान उस का मोबाइल गिर गया, जिस से सुराग लगा कर स्पैशल स्टाफ की टीम उस के गांव जा पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने उस की निशानदेही पर 250 ग्राम सोना बरामद किया है. उस के साथ धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार किया गया है. इरफान चोरी का सारा सामान उसे ही बेचता था.

रिमांड अवधि खत्म होने पर इरफान को दिल्ली की साकेत की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में था.

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