सरस सलिल विशेष

वक्त वक्त की बात है. वक्त कब बदल जाए, कहा नही जा सकता. एक वक्त वह था जब एक फिल्मकार ने तापसी पन्नू को अपनी फिल्म से जोड़ने से यह कह कर मना कर दिया था कि वह ‘मार्केटेबल’नहीं हैं. पर अब वक्त बदल चुका है. अब बौलीवुड में उन्हें एक सफल अदाकारा माना जाता है. अब ‘पिंक’के बाद अमिताभ बच्चन के साथ दूसरी फिल्म ‘बदला’कर रही अदाकारा तापसी पन्नू के साथ हर कलाकार व फिल्मकार काम करने को आतुर है.

हाल ही में जब तापसी पन्नू से हमारी मुलाकात हुई, तो पता चला कि तापसी पन्नू को वह वक्त याद है, जब एक निर्माता ने यह कहकर उन्हें अपनी फिल्म में नहीं लिया था कि वह ‘‘मार्केटेबल नहीं हैं’. उस फिल्मकार को याद करते हुए वह खुद कहती हैं- ‘‘उसके बाद मैं कभी उस फिल्मकार से नहीं मिली. भविष्य में उससे मुलाकात होगी या नहीं, यह नहीं जानती. मगर मैं उम्मीद करती हूं कि मैं मार्केटेबल हो गयी हूं. आपको जानकर अचरज होगा कि फिल्म ‘मुल्क’ बनाते समय भी लोग कंफ्यूज थे कि मैं मार्केटेबल हूं या नहीं. अनुभव सिन्हा को लग रहा था कि इसमें अभिनय क्षमता है और यह अपना किरदार निभा लेगी. पर लोगों को मेरे फिल्म के चयन पर सौ प्रतिशत भरोसा नहीं था. पर अब मुझ पर भरोसा बढ़ गया. मैं चाहती हूं कि हर फिल्मकार को लगे कि मैं अच्छा काम कर सकती हूं. मेरे करियर का मकसद यही है कि जिस दिन दर्शक तापसी पन्नू के नाम पर फिल्म की टिकट खरीदेगी, उसी दिन मेरी सफलता होगी. उसी दिन मैं खुद को स्टार मान लूंगी. मैं यह नहीं मानती कि मुझे लगातार फिल्में मिलती जाएंगी. मुझे अभी भी संघर्ष करना पड़ेगा. मैं हर दिन भगवान से यही मनाती हूं कि मुझे हर दिन अच्छी फिल्में मिलती रहें और हर फिल्म सफल होती रहे. एक फिल्म के असफल होते ही मामला बिगड़ जाता है. अभी भी मुझे इस बात का डर है. ‘पिंक’के बाद मेरे प्रति दर्शकों की सोच भी बदली है. पर उससे पहले तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि मैं क्या कर रही हूं क्या नहीं? पर अभी भी लोग मेरे नाम पर अंधे होकर पैसा नहीं लगाएंगे.’’

पर वह स्थिति कब आएगी कि जब लोग अंधे होकर आपके उपर पैसे लगाएं? इस पर तापसी ने कहा- ‘‘उसके लिए स्टारडम पाना जरूरी है. फिल्म को अच्छी ओपनिंग मिलना जरुरी है. फिल्म की ओपनिंग के नंबर तय करते हैं कि आप स्टार हैं या नहीं. आप बिकाउ हैं या नहीं. मैं मानती हूं कि वर्तमान समय में पागलपन वाला स्टारडम किसी भी कलाकार के पास नहीं है. पर अभी भी कुछ कलाकारों को स्टारडम मिली हुई है. देखिए, कुछ फिल्में ट्रेलर के आधार पर लोग देखना पसंद करते हैं. तो कुछ फिल्मों को दर्शक कलाकार या निर्देशक के नाम पर यकीन करके देखने जाते हैं. मैं भी फिल्म देखने का निर्णय किसी निर्देशक या कलाकार के नाम पर ही करती हूं.’’