सरस सलिल की शॉर्ट स्टोरी

उम्र के अंतिम पड़ाव पर कोई जीना तो नहीं छोड़ देता. अकेलेपन में अगर खटासभरे रिश्ते मिलें तो नए रिश्तों की नई चाशनी घोलने में बुराई क्या है. पर कमबख्त समाज का क्या, जो हर बात पर ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ का बेसुरा राग अलापता रहता है.

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