‘‘कितना दिखावा करती है न वह, एक बात भी मन से नहीं करती. आखिर कोई कितनी बनावट कर सकता है. कोई तो सीमा होनी चाहिए. बिना गहराई के कोई भी भाव प्रभावहीन सा लगता है. पता नहीं, लोग इतना अभिनय कैसे कर लेते हैं.’’