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‘‘बच्चे के जन्म के समय जब मुझे तुम्हारे सहारे की जरूरत थी, तब तुम जेल में थे. उस समय मैं किन भावनात्मक पीड़ा से गुजरी, तुम कभी न समझ पाओगे, क्योंकि तुम्हें पत्नी के प्रेम की नहीं, उस के जिस्म की भूख थी.

‘‘पता नहीं, तुम ने किसकिस औरत की इज्जत लूटी है. अब खुद पर पड़ी तब भी तुम्हारा जमीर नहीं जागा. केवल तुम्हारे अहम ने सिर उठा लिया, क्योंकि तुम्हें लगता था कि तुम्हारी पत्नी की ओर किसी की बुरी नजर से देखने की हिम्मत कैसे हो गई.

‘‘अगर ऐसा नहीं होता तो तुम उस बलात्कारी डाक्टर की जान लेने पर उतारू नहीं होते, बल्कि उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के बारे में सोचते और कड़ी से कड़ी सजा दिलाना चाहते.

‘‘तुम ने मुझ से जबरदस्ती शादी की. तुम से डर कर मैं ने तुम्हारा विरोध नहीं किया, क्योंकि मैं जानती थी कि तुम्हारा जमीर तुम्हारी आपराधिक भावना के नीचे दब गया है. तुम मेरी भावना को नहीं समझोगे.’’

‘‘फिर, सोचा कि पत्नी होने के नाते मैं तुम्हें समझा लूंगी. मैं ने कई बार कोशिश की, लेकिन तुम नहीं माने. कोर्ट में तुम ने यह हलफनामा दिया है कि तुम बेल लेने के बाद किसी तरह के आपराधिक काम नहीं करोगे, लेकिन तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हो.

‘‘अब तो सुधर जाओ. अपने लिए न सही, मेरे लिए भी नहीं, तो कम से कम अपने बच्चे के लिए ही सही. क्या तुम चाहते हो कि तुम्हारा बेटा भी तुम्हारे जैसा ही अपराधी बने?’’

‘‘अब चुप हो जाओ नैना. तुम गलत नहीं कह रही हो. सच तो यह है कि मैं शुरू से अपराधी नहीं था. बचपन में आपराधिक किस्म के लड़कों से मेरी दोस्ती हो गई. उन्हीं की गलत सोहबत से मुझे नशा करने की आदत लग गई थी.

‘‘नशे के इन महंगे शौक को पूरा करने के लिए मेरे पास पैसा नहीं था, इसलिए लूटपाट करने लग गया. एक बार जो अपराध की दुनिया में घुसा तो उस से बाहर निकलना मुश्किल हो गया.

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‘‘तुम सच कहती हो नैना, बचपन से अब तक लगातार अपराध की दुनिया में बने रहने के बावजूद मुझे समाज से नफरत भी कम नहीं मिली. यह सब मेरी नादानी और नासमझी के चलते हुआ. इस में मेरे मातापिता का योगदान भी कम नहीं था. उन्होंने उस समय मेरी आपराधिक हरकत को नजरअंदाज किया जब मुझे इस की बहुत जरूरत थी.

‘‘घर में उस तरह का माहौल नहीं मिला, जो मुझे एक अच्छा इनसान बनने में मदद करता है. पर आज तुम्हारी बातें सुन कर मुझे लगा कि तुम्हारी बातों में बहुत सचाई है. कानून को हाथ में ले कर मैं सीधे समाज और सामाजिक संस्थाओं से लड़ना चाह रहा हूं, जो निश्चित ही न मेरे फायदे में होगा, न मेरे परिवार के और न ही समाज के, इसलिए मैं तुम्हारे साथ शहर जा कर उस डाक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराऊंगा और उसे कानून के तहत सजा दिलाने की कोशिश करूंगा.’’

चूंकि रात में नैना के साथ यह बलात्कार की घटना हुई थी, इसलिए उस की तुरंत डाक्टरी जांचपड़ताल की जानी जरूरी थी, ताकि बलात्कार का सुबूत मिटे नहीं और आरोपी महीप घटना का सुबूत मिटाने में कामयाब न हो जाए, इसलिए नैना और दिलीप दोनों ने तुरंत शहर जा कर रात वाली घटना के संबंध में महीप के खिलाफ उस को नशा खिला कर रेप करने की रिपोर्ट लिखवाई.

पहले तो पुलिस वालों ने महीप के खिलाफ एफआईआर लिखने से मना किया, पर जब उस की बात सुन कर लोकल अखबार के कुछ रिपोर्टर जुट गए, तब मजबूरन पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी.

दिलीप जानता था कि इस तरह की घटनाओं में पुलिस पैसे ले कर मामले को रफादफा करने की कोशिश करती है, इसलिए तुरंत ही उस ने न्यूज चैनलों को इस की सूचना दी. पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद नैना को मैडिकल जांच के लिए स्थानीय अस्पताल भेजा.

तब तक यह बात पूरे शहर में जंगल की आग जैसी फैल गई थी. डाक्टर महीप गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गया था और वहीं से उस ने अपने दबदबे से नैना की डाक्टरी जांच करने वाले डाक्टरों को प्रभावित करने की कोशिश शुरू कर दी थी.

तब तक टीवी खबरिया चैनलों पर नैना के साथ बलात्कार की खबर पूरे देश में फैल गई और इस की सूचना पाते ही जिले के पुलिस अधीक्षक ने तुरंत नैना की मैडिकल जांच के लिए जिले के चिकित्सा अधीक्षक से एक मैडिकल टीम बनाने के लिए कहा, ताकि नैना के साथ बलात्कार की सचाई का पता चल सके.

चूंकि महीप के पिता शहर के नामीगिरामी आर्थोलौजिस्ट थे, इसलिए इस घटना की चर्चा पूरे शहर में होने लगी. इस का नतीजा यह हुआ कि प्रणीता और महीप का नर्सिंगहोम पलक झपकते ही बदनाम हो गया. उस के क्लिनिक में भरती मरीज दूसरे अस्पताल में जाने लगे और नए मरीज आने बंद हो गए.

जब प्रणीता को इस घटना के बारे में मालूम हुआ, तो वह बहुत चिंतित हो गई. उसे यह मालूम तो था कि महीप किसी भी औरत को देख कर लार टपकाने लगता है और हवस उस पर हावी होने लगती है, लेकिन वह इस लैवल तक नीचे गिर जाएगा कि किसी मरीज को बेहोशी की दवा दे कर उस के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी हरकत करेगा, इस का विश्वास नहीं था.

जैसे ही यह खबर प्रणीता को मिली, वह अपनी बीमार मां को छोड़ कर ससुराल पहुंची. वहां पहुंचने पर पता चला कि महीप बगैर किसी को बताए कहीं चला गया है और पुलिस उस की खोज में जहांतहां छापामारी कर रही है.

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महीप के पिताजी काफी चिंतित थे और पुलिस से मामले को रफादफा करने के लिए एक बड़ी रकम रिश्वत के रूप में देने की पेशकश कर रहे थे, लेकिन चूंकि मामला बलात्कार का था और पूरे देश में इस तरह की घटनाएं काफी तूल पकड़ रही थीं, इसलिए पुलिस इस मामले की तहकीकात में काफी सावधानी बरत रही थी.

महीप की एक नादानी के चलते उस का पूरा परिवार ही नहीं, बल्कि उस के ससुर का डाक्टरी वाला पेशा भी बुरी तरह प्रभावित होने लगा था.

पुलिस ने महीप की गिरफ्तारी पर दबाव बनाने के लिए प्रणीता को पूछताछ के लिए थाने में बुला लिया. सच तो यह था कि प्रणीता को महीप के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

इधर अखबारों और टीवी के जरीए जब हिमांशु को सूचना मिली तो उस का शक और पुख्ता हो गया कि रश्मि की मौत के पीछे महीप का ही हाथ था. वह अब तक महीप को माफ नहीं कर पाया था, फिर भी प्रणीता के ऊपर अचानक आई मुसीबत और उस के प्रति मन में गहरे लगाव होने के चलते वह उस से मिलने कानपुर आया.

पुलिस ने महीप के पिता को भी पूछताछ के लिए थाने में बुला लिया था. सच तो यह था कि उन्हें भी घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

पुलिस प्रणीता और उस के ससुर पर हर तरह का दबाव दे कर महीप के बारे में जानना चाहती थी, क्योंकि पुलिस को यह विश्वास नहीं हो रहा था कि महीप के छिपने के बारे में पत्नी और उस के पिता को मालूम न हो.

इस से बचने के लिए हिमांशु ने कानपुर के पुलिस अधीक्षक से मिलने की योजना बनाई. यह संयोग ही था कि कानपुर के पुलिस अधीक्षक उस के एक दोस्त के बहुत ही करीबी थे, इसलिए उस ने अपने दोस्त से मदद मांगी और जब वह पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में मिला, तो उन्होंने महीप को जल्द ही कोर्ट में हाजिर कराने के भरोसे पर प्रणीता और उस के पिताजी को थाने से छुड़वा दिया.

उधर न्यूज चैनल वाले बारबार यह खबर दे रहे थे कि पुलिस जानबूझ कर आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही है और मामले में लीपापोती करने में लगी हुई है.

जब इस की सूचना टीवी के जरीए लखनऊ में छिपे महीप को मिली तो उस ने अब अपनेआप को पुलिस के हवाले कर देना ही ठीक समझा. इस संबंध में उस ने प्रणीता से बात की तो उस ने उसे कोर्ट में हाजिर हो जाने के लिए कहा, क्योंकि पूछताछ में पुलिस उस को टौर्चर कर सकती थी.

महीप ने दूसरे दिन कोर्ट में सरैंडर कर दिया. मजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेज दिया, लेकिन इस घटना ने उस की मुसीबतें और भी बढ़ा दीं.

जैसा कि होता है, जब किसी पर किसी औरत के शोषण होने की शिकायतें आनी शुरू होती हैं, तो दूसरी औरतें भी अपना मुंह खोलना शुरू कर देती हैं. नैना के बलात्कार के आरोप लगते ही 2 और औरतों ने भी महीप पर जिस्मानी शोषण के आरोप लगाए.

प्रणीता ने जिन मामलों को सालों पहले समझाबुझा कर खत्म करा दिया था, उन में भी महीप के खिलाफ आवाज उठने लगी. देखते ही देखते महीप इस तरह के कई आरोपों से घिर गया.

पूछताछ के लिए पुलिस ने उसे भी रिमांड पर ले लिया. पुलिस की सख्त पूछताछ में महीप ने अपने सारे जुर्म कबूल कर लिए.

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हिमांशु कुछ दिनों तक प्रणीता के साथ रहा. अचानक आए इस घटनाक्रम ने सबकुछ तहसनहस कर दिया था. उन दोनों का क्लिनिक एक ही था. एक बार जब शिकायत हुई, तो क्लिनिक बुरी तरह बैठ गया.

कुछ दिनों तक इस का असर प्रणीता के पिता के क्लिनिक पर भी पड़ा, लेकिन वह सुधर गया. महीप काफी कोशिशों के बावजूद भी जेल से बाहर नहीं निकल पाया.

सैशन जज की कोर्ट से उस की बेल रिजैक्ट हो गई थी. हाईकोर्ट ने भी उसे बेल देने से इनकार कर दिया. हां, इतना जरूर किया कि ट्रायल कोर्ट को मामले में फास्ट ट्रायल करने का निर्देश दे दिया.

कोर्ट ने एकसाथ 3 केसों का ट्रायल किया और तीनों में महीप को उम्रकैद की सजा सुनाई.

इधर, प्रणीता मालीतौर पर तो टूटी ही थी, शारीरिक और मानसिक रूप से भी काफी टूट गई. उस के पास अब आमदनी का कोई जरीया नहीं बचा था. क्लिनिक बंद हो गया था, इसलिए उस ने क्लिनिक को किराए पर चढ़ा दिया.

इस के बाद प्रणीता ने अपने पिता के क्लिनिक के बगल में भाड़े पर एक मकान ले कर नया क्लिनिक खोल लिया. धीरेधीरे क्लिनिक में फिर से मरीजों की भीड़ लगने लगी.

महीप से प्रणीता की शादी हुए 7 साल बीत गए थे, पर उन्हें अब तक कोई औलाद न थी. मैडिकल जांच से पता चला था कि महीप में बच्चा पैदा करने की ताकत नहीं थी. यह जानने के बाद प्रणीता काफी परेशान हो गई थी,

पर यह सोच कर कि इस में महीप का कोई कुसूर नहीं है, उस ने उस का साथ निभाने का फैसला लिया था. दोनों ने यह तय किया था कि वे किसी अनाथालय से कोई बच्चा गोद ले लेंगे.

पर, हालात बदले, तो प्रणीता के विचार भी बदलने लगे. उस के पापा ने कहा कि जो इनसान डाक्टर हो कर अपने मरीज के साथ बलात्कार कर सकता है, वह हैवान है, उस के साथ जिंदगी बिताना नरक से कम नहीं है. ऐसा इनसान कभी भी किसी औरत की इज्जत नहीं कर सकता, इसलिए उस से तलाक ले लेना ही ठीक रहेगा.

प्रणीता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी ऐसा भी दिन आएगा.

‘‘पर पापा, आज जबकि महीप सजा भुगत रहा है, उसे पत्नी की मदद की बड़ी जरूरत है. क्या अब तलाक की अर्जी लगाना ठीक होगा?’’

‘‘बेटी, भले ही वह अपने किए की सजा भुगत रहा?है, पर उस की सोच में कोई सुधार नहीं हुआ है. मुझे जेल के सूत्रों से खबर मिली है कि जेल में अब उस के साथी खतरनाक अपराधी हैं, उन्हीं से मिल कर वह दूसरे अपराध की योजना बनवाता है.’’

यह सुन कर प्रणीता के तो होश ही उड़ गए. उसे भी पिछली बार जेल अधीक्षक ने कहा था कि महीप का संबंध कुछ बहुत खतरनाक सजायाफ्ता अपराधियों से हो गया है. वह उसे समझा दे, अच्छे बरताव पर सरकार कैदियों की सजा की सीमा में छूट देती है. पर जब प्रणीता ने महीप से इस बारे में बात की तो वह इसे हंस कर टाल गया. पर जब आज यही बात उस के पापा ने कही, तो अविश्वास की कोई वजह नहीं रह गई.

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फिर भी प्रणीता ने सोचा कि एक बार महीप को इस तरह की आपराधिक हरकतों से दूर रहने की चेतावनी दे देनी चाहिए.

कुछ दिनों बाद जब प्रणीता जेल के गेट पर महीप से मिली और उस से इस बारे में पूछा, तो उस ने साफसाफ कह दिया कि उसे अपने काम से काम रखना चाहिए.

अब प्रणीता के मन में यह बात भी घर करने लगी थी कि उसे धोखा दिया गया था. शादी के पहले से ही महीप जानता था कि वह औलाद पैदा नहीं कर सकता है, पर यह बात उस से और उस के पिता से छिपाई गई थी.

उसी दिन से प्रणीता ने तय कर लिया था कि वह महीप से तलाक ले लेगी. उस के साथ अब जिंदगी बिताने का कोई मतलब नहीं था.

जब प्रणीता ने कोर्ट में महीप से तलाक की अर्जी लगाई, तो महीप बौखला गया और उस के बारे में अनापशनाप बातें करने लगा. यहां तक कि उसी को चरित्रहीन ठहराने की कोशिश करने लगा.

महीप के पिताज भी बेटे की इन काली करतूतों से बहुत दुखी थे. उन्होंने उस को डाक्टर बनाने में बहुत पैसा खर्च किया था.

महीप का एक छोटा भाई भी था. वह पढ़ने में काफी तेज और सुशील स्वभाव का था. उस ने अपने बल पर आर्थोलौजी से एमडी की थी और अब अपने पिता के कामों में हाथ बंटाता था.

महीप के इस दुराचार से समाज में उस के पिता की भी काफी बदनामी हुई थी, इसलिए वह उस से मन ही मन बहुत दुखी थे.

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