विजय को बड़ा गर्व था अपने परिवार पर, बेटेबहुओं के आपसी प्यार पर. चाहे कुछ भी हो जाए उन के दिए संस्कार कभी व्यर्थ नहीं जाएंगे. लेकिन विजय को पक्षाघात क्या हुआ? घर की तो स्थिति ही बदल गई...
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