तब पत्थरों के बीच बैठे प्रेमी जोड़ों को देखता तो सोचता कितना प्रेम है इन में. आज सोच रहा हूं क्या वाकई प्रेम है इस दुनिया में? यूपी के एक छोटे से कसबे से मुंबई आया तो सोचा था अच्छी नौकरी मिल जाए तो फिर शादी करूंगा और घर बसा लूंगा.
यहां आया तो एक परिचित ने एक चाल की खोली में मेरे लिए रहने की व्यवस्था कर दी. मैं अखबार में विज्ञापन देखता और फिर इंटरव्यू देने जाता. काफी दिन हो गए थे नौकरी ढूंढ़तेढूंढ़ते. पैसे खत्म हो गए थे और उधार से काम चला रहा था.

एक दिन मेरी मुलाकात टोनी नाम के एक शख्स से हुई. उस ने मुझे बताया, ‘‘छोड़ो, बेकार है चप्पलें घिसना. शाम को चलो एक बंदे से मिलवाता हूं.’’
मैं ने पूछा, ‘‘किसी कंपनी के मालिक हैं? या फिर कोई औफिसर?’’
वह तेज हंसा फिर बोला, ‘‘शाम को पता चल जाएगा.’’

मैं मजबूर था

शाम को हम चल दिए तय समय पर. वह एक दबड़ेनुमा जगह थी. उस में एक छोटे से कमरे में औफिस जैसा बना था.
उस में बैठा शख्स मुझ से कहने लगा, ‘‘खूब पैसा है पर तुम्हें टापचिक यानी फैशन में रहना पड़ेगा. कस्टमर जो कहे उसे करना होगा. किसी भी हालत में उसे नाराज नहीं करना है. जो पैसा मिलेगा 60% तुम्हारा 40% हमारा. स्मार्ट हो तुम, बस खुद को टापचिक रखो.’’
मेरे पास पैसे नहीं थे. मैं कर भी क्या सकता था? दूसरी तरफ मुझे लगा कि इस में मेरा क्या जाएगा. मैं तैयार हो गया.
अब कल से मुझे एक ऐस्कौर्ट पुरुष बनना था, जिसे जिगोलो भी कहते हैं.

बेचैनी में काटी रात

पूरी रात मैं ने बेचैनी में काटी. दूसरे दिन शाम 6 बजे मुझे तैयार हो कर एक कैफे के बाहर खड़ा होना था. बांए पर हरी पट्टी बांधनी थी, जिस से मेरी पहचान करने में कस्टमर को परेशानी न हो. मुझे सिर्फ कार का एक नंबर दिया गया था. कोड था ‘हैप्पी डे’.

शाम के 6:12 बजे एक कार आ कर रुकी. मैं ने कार का नंबर प्लेट देखा. यह वही नंबर था जो मुझे दिया गया था. मैं कार की ओर बढ़ा तो ड्राइवर की सीट पर एक 35-36 साल की महिला थी. उस ने खिडक़ी के शीशे को नीचे कर मुझे देखा तो मैं ने उसे ‘हैप्पी डे मैम’ बोला. वह मुसकराई फिर पिछली सीट पर बैठने को इशारा किया. थोड़ी ही देर बाद हम एक शानदार होटल के बाहर खड़े थे.

उस ने साथ नहाने को औफर किया

होटल के कमरे में जाते ही उस महिला ने बीयर पी और मुझे भी पीने को कहा. मैं ने कहा मैं नहीं पीता, यह बुरी लत है तो वह हंसी फिर बोली, ‘‘नए लगते हो. कहां के रहने वाले हो?’’
मैं ने कहा, ‘‘सौरी मैम, जगह और पता नहीं बता सकता आप को.’’
उस ने “ओके” कहा और मुझे साथ नहाने को औफर किया. वह नहाते समय मुझ से लिपट गई और अपनी नाभी को मुझे चूमने के लिए कहा. बाद में हम कमरे में आ गए. बातों ही बातों में उस ने मुझे बताया कि उस के पति को सैक्स में ज्यादा फंकी करना पसंद नहीं. नितंबों तक को चूमना किसे कहते हैं यह नहीं जाना आज तक.
थोड़ी देर बाद वह मेरे ऊपर थी और सैक्स के समय वह तेजतेज सिसकारियां ले रही थी. हद तो तब हो गई जब उस ने मोबाइल में एक पोर्न क्लिक दिखा कर मुझ से ऐसा ही करने को कहा.
खैर, लगभग 3 घंटे हम साथ रहे. फिर बाद में मैं अपनी खोली पर आ गया था. पैसे एडवांस में ही मुझे मिल गए थे. 1 दिन में 5 हजार रूपए मेरे जेब में थे.

1-2 दिन तक मुझे कोई फोन नहीं आया. तीसरे दिन मुझे दोपहर 3 बजे एक जगह जाने को बोला गया. वह एक फ्लैट था. डोरबेल बजाने पर एक 26-27 साल की युवती ने दरवाजा खोला. मैं ने कोडवर्ड बताया तो वह दरवाजे से हट गई. मैं अंदर आ गया. उस ने मेरे हाथ से मोबाइल ले लिया और उसे स्विच्ड औफ कर दिया. फिर मुझे ड्राइंगरूम में ले गई और पूछा, ‘‘कोई कैमरा या रिकौर्डर वगैरह हो तो बता दो, वरना अच्छा नहीं होगा.’’
मेरे मना करने पर उस ने मुझे कौफी बना कर पिलाई फिर पूरी तरह नंगा होने को बोली.

हैरान था मैं 

मैं उस के सामने पूरी तरह निर्वस्त्र था. उस ने मेरी अंग की तारीफ की और पूछ बैठी, ‘‘क्या सभी पुरुषों का ‘ऐसा’ ही होता है?’’ मैं हैरान था.
उस ने मुझे बताया कि अगले 3 महीने बाद उस की शादी होने वाली है और वह शादी से पहले पुरुष शरीर को करीब से देखना चाहती थी.
मैं अवाक था. वह सुंदर थी और तब तक मेरी भी इच्छा सैक्स करने को हो रही थी. मैं ने पूछा, ‘‘मैम, क्या कंडोम लगाऊं?’’ उस ने मना कर दिया और बोली, ‘‘नहींनहीं, बस कुछ देर इसी तरह खड़े रहो. मेरी शादी होने वाली है.’’
खैर, कुछ देर बाद मैं वहां से निकल कर अपने खोली पर आ गया. मूड औफ था पर आज फिर बतौर फीस पैसे मिले थे इसलिए बाजार घूमने निकल पङा.

एक बार तो मैं बुरी तरह घिर गया था

मुझे एकसाथ 2 युवतियों को खुश करना था. वे दोनों ही काफी तेजतर्रार लग रही थीं. उन्होंने एकएक कर मेरे कपड़े उतारे और मुझे निर्वस्त्र ही डांस को बोलने लगीं. मेरे लिए यह सब आश्चर्यजनक था. पर उन्हें न तो नाराज कर सकता था और न ही मैं भाग सकता था. उस दिन मैं थक कर चूर हो गया था. 4-5 घंटे बाद खोली पर आया तो आते ही बिना खाएपीए सो गया.

एक दिन तो अजीब वाकेआ हुआ मेरे साथ

सरस सलिल विशेष

उस दिन मुझे जहां जाना था, उस के लिए मैं ने नए कपड़े खरीदे थे. हेयरस्टाइल सही कराए थे और अच्छे से तैयार हो कर निकला था.
होटल के जिस कमरे में मैं पहुंचा था वहां लगभग 42 साल की एक महिला थी. वह मुझे बताते हुए रो पड़ी. उस ने बताया कि वह अकेलेपन का शिकार है और पति उसे प्यार नहीं करता. उस ने बताया कि उस के पति ने घुटनों के ऊपर कभी किस नहीं किया. फोरप्ले के लिए तरस जाती है वह.
मेरे साथ सैक्स के दौरान वह इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उस ने जोश में मेरे दाएं कान पर कस कर दांत गड़ा दिए थे. मैं तो बिलबिला गया था.

लगभग 3 साल तक मैं पुरुष ऐस्कौर्ट का काम करता रहा. इस दौरान मैं ने बहुत पैसे कमाए. यह तो अच्छा रहा कि इस दौरान मैं कंप्यूटर कोर्स पूरा कर खुद एक कोचिंग सैंटर खोल कर बच्चों को पढ़ाने लगा.

मन में कई सवाल अधूरे रह गए

बीते दिनों को मैं याद करना नहीं चाहता. बस इतना ही कहना चाहूंगा कि पतियों को अपनी पत्नी को भरपूर प्यार करना चाहिए. उन्हें मानसिक सुख के साथ दैहिक सुख का भी खयाल रखना चाहिए. इतने दिनों में मैं ने जाना कि महिलाएं अकेलेपन और प्रेम के अभाव में ही गलत रास्ता चुनती हैं. यह अलग बात है कि कुछ महिलाएं इसे अपनी आजादी से जोड़ कर देखती हैं.

सही है, पुरुषों की तरह महिलाओं को भी अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने की आजादी मिलनी चाहिए. मगर मन में कई सवाल हैं जिन्हें अब जानने की कोई इच्छा नहीं है. पिछली गलतियों को भूल कर मुझे अब अपना और अपने परिवार का भविष्य संवारना है. अब से मैं बराबर समुद्र किनारे बैठने आऊंगा. मुझे यह देख कर अच्छा लगता है कि छोटीछोटी मछलियां लहरों के बहाव में किनारे जमीन पर आ जाती हैं. पर संघर्ष करतेकरते वे फिर से पानी में जा कर जिंदा बच जाती हैं.
काश, मैं भी कुछ साल पहले इन मछलियों से प्रेरणा ले पाता.

(नाम व पहचान गुप्त रखने के लिए पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं)

Edited By – Neelesh Singh Sisodia 

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