पर उस की पत्नी मोहिनी उसे गच्चा दे जाती है. वह कभी छोटी बेटी को सुलाने का बहाना बना देती है तो कभी घर का ज्यादा काम करने की वजह से बदन दर्द की शिकायत करते हुए मुंह फेर कर सो जाती है. कभी नजदीक आती भी है तो बेमन से.

महेंद्र इस बात से चिड़चिड़ा हो गया है. वह ऑफिस में भी खुश नहीं रहता है. कभीकभार तो वह अपने साथी कर्मचारियों से भी भिड़ जाता है. नतीजतन अब वह शराब पीने लगा है और कभीकभार किसी प्रोफेशनल लड़की को पैसे दे कर उस के साथ रात बिता लेता है. बहाना बनाता है ऑफिस के टूर का या नाईट शिफ्ट का.

अभी तक तो उस के परिवार में सब कुछ सही चल रहा है पर जब मोहिनी को इस बारे में पता चलेगा तो गुस्से का बम जरूर फूटेगा. लेकिन इस में गलती किस की ज्यादा बड़ी है? मोहिनी के महेंद्र से दूर रहने की या महेंद्र की चोरीछिपे बाजारू औरत के साथ संबंध बनाने की?

ये भी पढ़ें- बारिश में इश्क की खुमारी

अगर महेंद्र शराब न पीता और किसी पराई औरत के साथ संबंध नहीं बनाता और अपनी समस्या सीधे मोहिनी को बताता कि उसे अपनी पत्नी का जिस्मानी प्यार चाहिए तो उस की कोई गलती नहीं होती. मोहिनी को भी उस के जज्बात समझने का मौका मिल जाता पर महेंद्र पहले कुढ़ता रहा और जो रास्ता उस ने अपनाया वह बिलकुल गलत था.

ये भी पढ़ेंसुहागरात पर बेकाबू मत होने दो जज्बात

वैसे मोहिनी का भी कम कुसूर नहीं है. उस का महेंद्र से बहाने बना कर दूर रहना या बेमन से उस के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाना ही इस समस्या की असली जड़ है. उसे अपने बच्चों की खुशियों के अलावा पति की इच्छा का भी ध्यान रखना चाहिए. शादी के जयदा साल हो जाने का यह मतलब नहीं है कि पति और पत्नी तन का प्यार बिलकुल न करें, बल्कि यह तो उन के रिश्ते को और ज्यादा मजबूत करता है. अगर मोहिनी महेंद्र को रात का देह सुख दे देती तो उसे यों गलत रस्ते की ओर रुख ही नहीं करना पड़ता. यहां इन दोनों को समझदारी दिखानी चाहिए थी. बाद में ऐसा हुआ भी. जब मोहिनी को लगा कि महेंद्र उस के कटकटा सा रहने लगा है तो वह ताड़ गई कि मामला गड़बड़ है. वह अपने नाम की तरह खूबसूरत तो थी ही इसलिए पति को अपनी तरफ खींचना उस के बाएं हाथ का खेल था. बात ज्यादा बिगड़ने से पहले उस ने महेंद्र को दोबारा से अपना बना लिया और उस की रातों को दोबारा से रंगीन बनाना शुरू कर दिया.

Tags:
COMMENT