पर्यटन उद्योग को संजीवनी दे रहा हॉट एयर बैलून फ़ेस्टिवल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार रोज़ नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. वाराणसी की धरती से पहली बार हॉट एयर बैलून ने उड़ान भरा. अभी तक लोगों ने  बनारस के सुबह की छटा को गंगा के  किनारे घाटों से देखा होगा, पर अब योगी सरकार बनारस की सुबह के साथ ही घाटों की लम्बी शृंखला को  आसमान से देखने का भी मौका दे रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने वाराणसी में तीन दिनों का हॉट एयर  बैलून फेस्टिवल का आयोजन किया है. पर्यटक एडवेंचर टूरिज्म का आनंद ले रहे हैं. पर्यटक 19 नवंबर को देव दीपावली भी हॉट बैलन से देख सकेंगे. पर्यटकों के रुझान को देखते हुए सरकार इसका आगे भी संचालन कर सकती है.

बदलते काशी की बदलती तस्वीर अब लोग हाट एयर बैलून पर सवार होकर देख़ सकते हैं. बनारस के गंगा घाट हों या शहर, करीब एक घंटे की बैलून राइड में लगभग पूरे काशी का दर्शन हो जाएगा. अभी तक लोगों ने गलियों में घूमकर काशी को देखा होगा, लेकिन अब योगी सरकार ने आसमान से भी काशी दर्शन का प्रबंध कर दिया है. मोदी व योगी के प्रयासों से वाराणसी के चतुर्दिक विकास में पर्यटन उद्योग भी  एक महत्पूर्ण कड़ी है. कोविड काल में पर्यटन उद्योग पर भी काफी असर देखने को मिला था. हॉट एयर बैलून फेस्टिवल मंद पड़े पर्यटन उद्योग को संजीवनी देने का काम रही है.

पर्यटक अमित और  पुनीत ने बताया कि हॉट बैलून एयर का सफर बेहद रोमांचक है. हॉट एयर बैलून पर सवार होकर सूर्योदय और शहर दोनों  बेहद खूबसूरत नजर आ रहा था. देव दीपावली पर जब घाटों पर दीपक जलेंगे तो यह नज़ारा और भी अद्भुत होगा. हॉट एयर बैलून की विदेशी पायलट ने कहा कि वाराणसी जैसा नजारा आज तक उन्होंने कहीं नहीं देखा है.

वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने  देव दीपावली के मौके पर  तीन दिवसीय हॉट एयर बैलून फेस्टिवल का आयोजन किया है. पर्यटन विभाग के मुताबिक 18 और 19 नवंबर रात्रि की उड़ान टेडर्ड फ्लाइट के माध्यम से होगी, जबकि सुबह की उड़ान पूरे शहर में होगी. टेडर्ड उड़ान में बैलून  का नीचे का सिरा रस्सी से बंधा होगा और उड़ान नियंत्रित होगी और करीब 50 मीटर ऊपर तक बैलून उड़ सकेगा. बैलून गंगा पार डोमरी क्षेत्र से उड़ान भर रहा है.

GHKKPM: सई को किडनैप करेगा विराट के बचपन का दोस्त, आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल (Tv Serial)  ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai KisiKey Pyaar Meiin)  विराट-सई एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं. शो में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि विराट-सई के बीच सबकुछ ठीक चल रहा है. लेकिन शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में एक नयी एंट्री हो चुकी है. विराट के पुराने दोस्त की एंट्री हुई है. लेकिन विराट को जब पता चलता है कि उसका दोस्त एक वॉन्टेड क्रिमिनल है तो उसे बड़ा झटका लगता है.

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जब विराट सदा को मॉल में देखता है जहां पुलिस उसके पीछे होती है. सदा अपराधी बन गया, उसका संबंध विराट और उसके IPS पेशे से है और शो में  यह जल्द ही खुलासा होने वाला है.

 

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तो दूसरी तरफ सदा विराट से मिलता है पर और उसे पता चलता है कि सई उसकी पत्नी है. इस तरह  वो विराट और पुलिस से बचने के लिए सई को किडनैप करने की योजना बनाता है. शो में आप देखेंगे कि विराट और सई दिवाली सेलिब्रेट करेंगे और इसी सेलिब्रेशन के दौरान सई किडनैप होगी जिससे विराट टूट जाएगा.

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शो में आप देखेंगे कि सदा की मुलाकात सई से होगी. सदा खुद सई से मिलने जा रहा है जिसमें वह उसे पुलिस से बचने के लिए फंसा सके. तो खबर ये भी है कि शो में सई और विराट की फिर से सदा को एक अच्छे इंसान में बदलने की जर्नी भी दिखाई जाएगी.

तीन कृषि कानून: प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी की गलतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के व्यक्तित्व को करीब से जानने समझने वाले यह जानते हैं कि वह एक ऐसे राजनेता हैं जो पीछे मुड़कर नहीं देखते. या फिर यह कहें की आप यह भ्रम पैदा करते हैं की उन्होंने जो कदम उठाए हैं वह अंतिम सत्य हैं. और अगर कोई आलोचना करता है या उसमें मीन मेख निकालता है तो वह स्वयं गलत है. और फिर आगे चलकर के उनके समर्थक विरोध करने वालों पर ऐसे ऐसे आरोप लगाते हैं कि मानो नरेंद्र दामोदरदास मोदी का विरोध देश का विरोध है.

यही सब कुछ बहुत ही शिद्दत के साथ 1 साल तक तीन कृषि कानून के संदर्भ में यह प्रहसन भी देश और दुनिया ने देखा है.

पहले पहल तो इन तीन कृषि कानूनों को आनन-फानन में संसद में पास करवा दिया गया. और जब इसका विरोध हुआ तो कहा गया कि नहीं जो भी हुआ है वह सब तो कानून सम्मत है. क्योंकि नरेंद्र दामोदरदास मोदी तो देश के संविधान और कानून से हटकर के कुछ करते ही नहीं है. और फिर जब इन तीन कानूनों का विरोध होने लगा तो यह कहा गया कि जो लोग जो कानून को अपने हाथ में ले  रहे हैं वह लोग तो भोले भाले हैं और विपक्ष के नेताओं का मोहरा बने हुए हैं.

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एक साल के इस लंबे विरोध और रस्साकशी के दृश्य ब दृश्य यह कहा जा सकता है कि नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने प्रधानमंत्री की हैसियत से अपने संपूर्ण कबीना और उनकी भारतीय जनता पार्टी ने हर कदम कदम पर यह सिद्ध करने की कोशिश की कि किसानों के लिए लाया गया यह कानून हर दृष्टि से किसानों के हित में है. क्योंकि यह सरकार किसानों के हित के अलावा कुछ देख ही नहीं रही है. और जो कुछ चुनिंदा लोग विरोध कर रहे हैं वह तो आतंकवादी हैं! वह तो भटके हुए लोग हैं !! बहुसंख्यक किसान तो उनके  साथ हैं ही नहीं. क्योंकि यह कुछ चुनिंदा लोग ही आंदोलन कर रहे हैं इस तरह की भ्रामक बातें हैं. शायद देश के राजनीतिक परिदृश्य में किसानों के संदर्भ में पहली बार सभी ने देखा और नरेंद्र मोदी और भाजपा के कट्टर समर्थक रात दिन यही गीत गाते रहेगी जो लोग सिंघु बॉर्डर पर और अन्य जगहों पर मोर्चा संभाले हुए हैं वे लोग तो देशद्रोही हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी की यही गलती बहुत बड़ी गलतियां बन गई है. अब उन्हें न तो खाते बन रहा है ना निगलते. उन्होंने जिस तरीके से आनन-फानन में कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है वह भी उनके गले की फांस बन चुकी है. और अब आने वाले समय में ऊंट किस करवट बैठेगा यह भारत की जनता तय करने वाली है.

गलती दर गलती

3 कृषि कानूनों के संदर्भ में अगर हम विवेचना करें तो देखते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने  ऐतिहासिक गलतियां ही गलतियां की हैं. पहली गलती तो किसानों को विश्वास में लिए बगैर कानून बना देना है.

दूसरी गलती विपक्ष को अपने विश्वास में लिए बगैर तीन कृषि कानूनों को संसद में पास करवाना उनका एक ऐसा कारनामा है जो एक बहुत बड़ी गलती है.

और तीसरा- जिस तरीके से उन्होंने अचानक कृषि कानूनों को वापस ले लिया है यह भी एक बहुत बड़ी गलती है. राजनीतिक और सामाजिक प्रेक्षकों का कहना है कि 19 नवंबर गुरु नानक जयंती के पावन अवसर पर जिस तरीके से अचानक सुबह-सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र  दामोदरदास मोदी ने कृषि कानूनों को टीवी पर आ कर के वापस लेने की घोषणा की. उससे अच्छा यह होता कि वह अचानक किसानों के बीच चले जाते और उनसे संवाद करते हुए सौहार्दपूर्ण माहौल में इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर देते.

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अथवा दूसरा पक्ष यह हो सकता था कि किसान नेताओं की एक बैठक आयोजित की जाती और उसमें प्रधानमंत्री जी उन सब की बात को सुनते हुए इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर सकते थे. तीसरा देश की विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक करके भी वे अपनी बात को देश की जनता के सामने रख सकते थे. जिसका निसंदेह सकारात्मक प्रभाव जाता. मगर जिस तरीके से उन्होंने अचानक टीवी पर अवतरण लेकर  घोषणा की है उससे फजीहत ही हो रही है . लोगों को मौका मिल गया है उन्हें चारों तरफ से घेर कर के मानो अभिमन्यु बना चुके हैं. अब देखना यह है कि आज के भारत के महाभारत में आधुनिक अभिमन्यु का  क्या हश्र होने वाला है. नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी गलती यह है कि वह सबको साथ लेकर के चलने में बहुत पीछे रह जाते हैं परिणाम स्वरूप उन्हें जिस तरीके से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है वह उनकी छवि, उनके कार्यकाल और भारत की जनता के लिए भी दुर्भाग्य जनक है.

Anupamaa: बा ने मांगी वनराज से माफी तो बापूजी ने उठाया ये कदम

स्टार प्लस (Star Plus) का पॉपुलर सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में लगातार नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि बापूजी बा के साथ घर आने से मना कर देते हैं और बा की गलतियों का अहसास करवाते हैं, जिससे बा पूरी तरह टूट जाती है और उन्हें अपनी गलतियों का पछतावा होता है. शो के अपकमिंग एपिसोड में फुल ऑन ड्रामा देखने को मिलने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में आप देखेंगे कि अनुपमा बा को समझाती है कि उन्होंने बापूजी को सबके सामने इतनी बेइज्जती की. वह कोई भी सहन नहीं कर सकता है. बा ने बहुत गलत किया है. फिर वह बा को समझाती है और उन्हें शाह हाउस वापस लेकर लाती है.

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तो वहीं उन दोनों को  वनराज के गुस्से का सामना करना पड़ता है. वनराज बा को खूब सुनाता है. वह कहता है कि आपकी हिम्मत कैसे हुई मेरे पिताजी को सबके सामने बईज्जती करने की. वह आगे कहता है कि मैं अपने पिता के सम्मान के लिए जान दे भी सकता हूं और किसी की जान ले भी सकता हूं.

 

इतना ही नहीं वनराज बा को घर में आने से रोकता है. ऐसे में बा उसके आगे हाथ जोड़ती है. बा वनराज से कहती है कि उसे अन्दर आने दें. अनुपमा भी वनराज को इस बात के लिए समझाती है. वनराज किसी की नहीं सुनता है और बा के मुंह पर ही दरवाजा बन्द करने लगता है. अनुपमा उसे दरवाजा बन्द करने से रोकती है और कहती है कि ये गलती मत कीजिए.

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अनुपमा लगातार वनराज को दरवाजा बन्द करने से रोकती है. तभी बाबूजी वहां आ जाते है और उन्हें देखकर वनराज काफी इमोशनल हो जाता है. तो वहीं वनराज बापूजी के पैर में गिर जाता है और उन्हें वहां से जाने से रोकता है. बापूजी कहते हैं कि वो अपनी बेटी के घर ही रहने वाले है और अगर किसी ने उसकी बेटी को कुछ कहा तो वो उसका मरा मुंह देखेंगे.

शो में दिखाया जाएगा कि बापूजी अनुपमा के साथ जाने लगते है और उनके साथ बा भी जाने लगती है. ये देखकर वनराज टूट जाता है. ऐसे में वनराज फैसला लेता है कि जब तक बाबूजी लौटकर शाह परिवार नहीं आते तब तक वो अन्न का एक दाना नहीं खाएगा और पानी भी नहीं पियेगा.

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अपने हुए पराए- भाग 2: आखिर प्रोफेसर राजीव को उस तस्वीर से क्यों लगाव था

एक दिन प्रोफैसर राजीव अपनी डायरी ढूढ़ते करुणा के कमरे में आए. वहां उन्हें करुणा के साथ मेरी तसवीर दिख गई. वे हतप्रभ रह गए. तसवीर को अपने कमरे में ले गए. मुझे बुलाया, बोले, “बेटा, इतनी बड़ी चीज तुम ने मुझ से छिपाई?”

‘‘क्या अंकल?’’

‘‘बेटा, मैं जिसे बाहर तलाश रहा था वह मेरे घर में ही था.’’

मेरे अश्रु छलक गए, ‘‘अंकल, ऐसा कुछ नहीं है. हम मित्र हैं. आप पिता समान हैं मेरे. आप करुणा की शादी जहां करना चाहें, कर दें, मैं विरोध नहीं करूंगा, पूरा सहयोग दूंगा. हमारा करुणा का पवित्र रिश्ता है.’’

‘‘बेटा, यह बात मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आई. मैं तुझे अच्छी तरह से जानता हूं, करुणा तेरे साथ बहुत खुश रहेगी. तेरे जैसा दामाद मुझे कहां मिलेगा. दामाद बेटा ही होता है. बुलाओ, करुणा को.’’

करुणा यह सब अंदर से सुन रही थी, दौड़ी हुई आई. उन के पास बैठ गई. उन्होंने उस का हाथ मुझे देते हुए कहा, ‘‘आज मैं भारमुक्त हो गया, खुश रहो.’’ एकाएक उन्हें कम्पन हुआ, सीना जोर से धड़का, और गरदन एक तरफ मुड़ गई. वे चिरनिद्रा में लीन हो गए. मेरी आंखें छलछला आईं. करुणा चीख कर रो पड़ी. उन के जीवन का अंत ऐसा होगा, सोचा भी नहीं था.

अपने हुए पराए

इंट्रो

हार न मानने वाले प्रोफैसर राजीव बेटी करुणा के मामले में थकेहारे जैसे हो गए थे, लेकिन जिंदगी के आखिरी लमहों में घर में ही ऐसी तसवीर मिली जिस ने उन्हें हारने से बचा लिया.

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जिंदगी में हार न मानने वाले प्रोफैसर राजीव आज सुबह बहुत ही थके हुए लग रहे थे. मैं उन को लौन में आरामकुरसी पर निढाल बैठे देख सन्न रह गया. उन के बंगले में सन्नाटा था. कहां संगीत की स्वरलहरियां थिरकती रहती थीं, आज ख़ामोशी पसरी थी. मुझे देखते ही वे बोले, ‘‘आओ, बैठो.’’

उन की दर्दमिश्रित आवाज से मुझे आभास हुआ कि कुछ घटित हुआ है. मैं पास पड़ी बैंच पर बैठ गया.

‘‘कैसे हो नरेंद्र?’’ आसमान की ओर निहारते उन्होंने पूछा.

‘‘ठीक हूं,” मैं ने दिया. मेरा दिल अभी भी धड़क रहा था. मैं उन की पुत्री करुणा की तबीयत को ले कर परेशान था. 5 दिनों पूर्व वह अस्पताल में भरती हुई थी. फोन पर मेरी बात नहीं हो सकी. जब भी फोन लगाया स्विचऔफ मिला. चिंताओं ने पैने नाखून गड़ा दिए थे.

मुझे खामोश देख प्रोफैसर राजीव रुंधे स्वर से बोले, “दिल्ली से कब आए?”

‘‘कल रात आया.’’

‘‘इंटरव्यू कैसा रहा?’’

‘‘ठीक रहा.’’

कुछ देर खामोशी छाई रही. उन की आंखें अभी भी आसमान के किसी शून्य पर टिकी थीं. चेहरे पर किसी भयानक अनिष्ट की परछाइयां उतरी थीं जो किसी अनहोनी का संकेत दे रही थीं. मैं चिंता से भर उठा. करुणा को कुछ हो तो नहीं गया. लेकिन जब करुणा को चाय लाते देखा तो सारी चिंताएं उड़ गईं. वह पूरी तरह स्वस्थ्य दिख रही थी.

‘‘पापा चाय लीजिए,’’ करुणा ने चाय की ट्रे गोलमेज पर रखते हुए कहा.

मेरी नजरें अभी भी करुणा के चेहरे पर जमी थीं, लेकिन उस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देख हैरान रह गया, लगा नाराज है. करुणा चाय दे कर मुड़ी ही थी कि पैर डगमगा गए. मैं ने तुरंत हाथों में संभाल लिया. वह संभलती हुई बोली, ‘‘थैंक्यू.’’ मैं तुरंत अलग हो गया. प्रोफैसर राजीव बोले, “जब चलते नहीं बनता तो हाईहील की सैंडिल क्यों पहनती हो?”

‘‘फैशन है पापा.”

‘‘हूं, सभी मौडर्न हुए जा रहे हैं.’’

मैं समझ गया, उन का इशारा राहुल की बहू अपर्णा पर था. अपर्णा अकसर जींस व टोप पहने ही दिखती है.

मेरे पिताजी और प्रोफैसर राजीव की दोस्ती जगजाहिर थी. एक साथ उन्होंने पढ़ाईलिखाई की, नौकरी की. पड़ोस में मकान बनाया. किसी भी समारोह में गए, साथ गए. यहां तक कि चुनाव भी साथ लड़ा.

मेरे पिताजी कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे, जल्दी ही उन की मृत्यु हो गई. मुझे हिदायत दे गए थे कि प्रोफैसर राजीव के घर को अपना घर समझना, पूरी इज्जत देना. तब से मेरा आनाजाना लगा रहता है. प्रोफैसर राजीव मुझे अकसर याद करते रहते हैं और मैं उन के बाहरी काम निबटाता रहता हूं. वे अपने लड़के राहुल से अधिक विश्वस्त मुझे मानते हैं.

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प्रोफैसर राजीव का संपन्न परिवार है – पत्नी, एक लड़का, बहू और एक लड़की है. धर्म में उन की आस्था है. भजन, कीर्तन, भागवत जैसे कार्यक्रम वे कराते रहते हैं. करूणा जब एकाएक बीमार हुई और उसे अस्पताल में भरती होना पड़ा तो सभी चिंतित हो गए. मुझे भी शौक लगा. उसे पीलिया हो गया था. 10 दिन वह आईसीयू में भरती रही. तीनचार दिन मैं देखता रहा.

इसी बीच, मेरा इंटरव्यूकौल आ गया. मुझे दिल्ली जाना पड़ा. आज जब दिल्ली से वापस लौटा तो करुणा की याद ही दिल में बसी थी – वह कैसी है, अस्पताल से आई कि नहीं… सोचता हुआ प्रोफैसर राजीव के घर पहुंचा. प्रोफैसर राजीव बाहर ही मिल गए. उन्हें उदास देख मन में तरहतरह की शंकाएं पल गईं.

प्रोफैसर राजीव की चिंता मुझे अभी भी हो रही थी कि वे कुछ छिपाए हुए हैं. वरना तो ऐसे गमगीन वे कभी नहीं दिखे. करुणा के जाने के बाद मैं ने उन की चिंता का कारण पूछा तो वे टालते हुए उठ गए और अंदर कमरे में चले गए. उन के हावभावों ने मुझे फिर घेर लिया. मैं तुरंत करुणा के कमरे में गया. करुणा सोफे पर बैठी डायरी के पन्ने पलट रही थी, बोली, ‘‘कुछ काम?’’

‘‘क्या बिना काम के नहीं आ सकता?’’

‘‘रोका किस ने, मैं होती कौन हूं?’’

‘‘अच्छा, समझा.’’

‘‘क्या?’’

‘‘मैं दिल्ली चला गया था, इसलिए…’’

‘‘हां, मैं अस्पताल में थी और हुजूर दिल्ली चले गए.’’

‘‘इंटरव्यू था?’’

‘‘जानती हूं, मैं मर रही थी और आप छूमंतर हो गए, बता कर जा सकते थे.’’

‘‘सौरी, करुणा. प्लीज, मेरा जाना बहुत जरूरी था. पता है, मैं सिलेक्ट हो गया.’’

‘‘सच, नौकरी लग गई तुम्हारी?’’

‘‘हां, लग जाएगी.’’

यह सुनते ही वह मेरे गले से लग गई. उस की गर्म सांसों से मेरा दिल मधुर एहसास से भर उठा, होंठ उस के कपोलों से जा लगे. वह तुरंत दूर होती बोली, ‘‘यह क्या?’’

‘‘सौरी,’’ मैं ने कान पकड़ते हुए कहा.

एक मधुर मुसकन उस के चेहरे पर पसर गई जिसे मैं मंत्रमुग्ध सा देखता रह गया. तभी प्रोफैसर राजीव की आवाज कानों में पड़ी. मैं तुरंत उन के कमरे में गया.

‘‘क्या है अंकल?’’

बिना कुछ कहे- भाग 2: स्नेहा ने पुनीत को कैसे सदमे से निकाला

Writer- शिवी गोस्वामी 

आरती और मेरे रास्ते अब अलगअलग हो चुके थे. मैं उसे कुछ समझाना नहीं चाहता था और वह भी कुछ समझना नहीं चाहती थी.

मुझे बस हमेशा यह उम्मीद रहती थी कि अब उस का फोन आएगा और एक माफी से सबकुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन शायद कुछ चीजें बनने के लिए बिगड़ती हैं और कुछ बिगड़ने के लिए बनती हैं.

हमारी कहानी तो शायद बिगड़ने के लिए ही बनी थी. 5 साल का प्यार और साथ सबकुछ खत्म सा हो गया था.

मेरे घर में अब मेरे रिश्ते की बात चलने लगी थी, लेकिन किसी और लड़की से. मां मुझे रोज नएनए रिश्तों के बारे में बताती थीं, लेकिन मैं हर बार कोई न कोई बहाना या कमी निकाल कर मना कर देता था.

मुझे भीड़ में भी अकेलापन महसूस होता था. सब से ज्यादा तकलीफ जीवन के वे पल देते हैं, जो एक समय सब से ज्यादा खूबसूरत होते हैं. वे जितने मीठे पल होते हैं, उन की यादें भी उतनी ही कड़वी होती हैं.

धीरेधीरे वक्त बीतता गया. मेरे साथ आज भी बस, आरती की यादें थीं. मुझे क्या पता था आज मैं किसी से मिलने वाला हूं. आज मैं स्नेहा से मिला. हम दोनों की मुलाकात मेरे दोस्त की शादी में हुई थी.

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स्नेहा आरती की चचेरी बहन थी. साधारण नैननक्श वाली स्नेहा शादी में बिना किसी की परवा किए, सब से ज्यादा डांस कर रही थी. 21-22 साल की वह लड़की हरकतों से एकदम 10-12 साल की बच्ची लग रही थी.

‘‘बेटा, तुम्हारी गाड़ी में जगह है?‘‘ मेरे जिस दोस्त की शादी थी, उस की मम्मी ने आ कर मुझ से पूछा.

‘‘हां आंटी, क्यों?‘‘ मैं ने पूछा.

‘‘तो ठीक है, कुछ लड़कियों को तुम अपनी गाड़ी में ले जाना. दरअसल, बस में बहुत लोग हो गए हैं. तुम घर के हो तो तुम से पूछना ठीक समझा.‘‘

सजीधजी 3 लड़कियां मेरी कार में पीछे की सीट पर आ कर बैठ गईं. एक मेरे बराबर वाली सीट पर आ कर बैठ गई.

मेरे यह कहने से पहले कि सीट बैल्ट बांध लो, उस ने बड़ी फुर्ती से बैल्ट बांध ली. वे सब अपनी बातों में मशगूल हो गईं.

मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे मैं इस कार का ड्राइवर हूं, जिस से बात करने में किसी को कोई दिलचस्पी नहीं थी.

तभी स्नेहा ने मुझ से पूछा, ‘‘आप रजत भैया के दोस्त हैं न.‘‘

‘‘जी,‘‘ मैं ने बस, इतना ही उत्तर दिया. न तो इस से ज्यादा हमारी कोई बात हुई और न ही मुझे कोई दिलचस्पी थी.

आजकल के हाईटैक युग में जिस से आप आमनेसामने बात करने से हिचकें उस के लिए टैक्नोलौजी ने एक नया नुसखा कायम किया है, जो आज के समय में काफी कारगर है, और वह है चैटिंग.

स्नेहा ने मुझे फेसबुक पर रिक्वैस्ट भेजी और मैं ने भी स्वीकार कर ली.

हम दोनों धीरेधीरे अच्छे दोस्त बन गए. बातोंबातों में उस ने मुझे बताया कि उसे अपने कालेज के सैमिनार में एक प्रोजैक्ट बनाना है. मैं ने कहा, ‘‘तो ठीक है, मैं तुम्हारी मदद कर देता हूं.‘‘

इतने सालों बाद मैं ने उस के लिए दोबारा पढ़ाई की थी उस का प्रोजैक्ट बनवाने के लिए. कभी वह मेरे घर आ जाया करती थी तो कभी मैं उस के घर चला जाता. दरअसल, वह अपने कालेज की पढ़ाई की वजह से रजत के घर ही रहती थी. जब भी वह प्रोजैक्ट बनवाने के लिए आती तो बस, बोलती ही जाती थी. मेरे से बिलकुल अलग थी, वह.

एक दिन बातोंबातों में उस ने पूछा, ‘‘आप की कोई गर्लफ्रैंड नहीं है?‘‘

मैं उस को न कह कर बात वहीं पर खत्म भी कर सकता था, लेकिन मैं ने उस को अपने और आरती के बारे में सबकुछ सचसच बता दिया.

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‘‘ओह,‘‘ स्नेहा ने दुख जताते हुए कहा, ‘‘मुझे सच में बहुत दुख हुआ यह सब सुन कर. क्या तब से आप दोनों की एक बार भी बात नहीं हुई?‘‘ स्नेहा ने पूछा.

मैं ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ‘‘नहीं, और अब करनी भी नहीं है,‘‘ यह कह कर हम दोनों प्रोजैक्ट बनाने लग गए.

आज जब स्नेहा आई तो कुछ बदलीबदली सी लग रही थी. आते ही न तो उस ने जोर से आवाज लगा कर डराया और न ही हंसी.

मैं ने पूछा, ‘‘सब ठीक तो है न?‘‘

वह बोली, ‘‘कुछ बताना था आप को, आप मुझे बताना कि सही है या गलत.‘‘

हम अच्छे दोस्त बन गए थे. मैं ने उस से कहा, ‘‘हांहां जरूर, क्यों नहीं,‘‘ बोलो.

उस ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा, ‘‘मुझे किसी से प्यार हो गया है.‘‘

मैं ने कहा, ‘‘कौन है वह और क्या वह भी तुम से प्यार करता है?‘‘

उस ने कहा, ‘‘मालूम नहीं?‘‘

‘‘ओह, तुम्हारे ही कालेज में है क्या?‘‘ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं,‘‘ उस ने बस छोटा सा जवाब दिया.

Satyakatha: डॉक्टर की बीवी- रसूखदार के प्यार का वार- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

26वर्षीय विक्रम सिंह राजपूत बिहार की राजधानी पटना के लोहानीपुर गौरेया इलाके में रहता था. उस के घर में मातापिता के अलावा एक भाई सचिन था. विक्रम पटना मार्केट में स्थित एक जिम में बतौर ट्रेनर काम करता था. इस के अलावा वह मौडलिंग और भोजपुरी फिल्मों में भी काम करता था. 2015 में एक कांटेस्ट ‘देव एंड दिवा’ का विनर भी रहा था. इस के साथ ही उस के गानों के कई अलबम भी आए थे.

18 सितंबर को सुबह 6 बजे का समय था. पटना की सड़कों पर चहलपहल शुरू हो गई थी. कोई मौर्निंग वाक के लिए निकला था तो कोई काम पर जाने के लिए.

विक्रम का भी रोज यही समय होता था, जिम जाने का. वह अपनी स्कूटी से जिम जाने के लिए निकला. वह लोहा मंडी गली तक पहुंचा ही था कि वहां खड़े 2 बदमाशों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी, जिस से वह गंभीर रूप से घायल हो गया.

विक्रम को गोलियां मारने के बाद वे दोनों बदमाश वहां से निकल गए. विक्रम को 5 गोलियां लगीं. उस ने मदद के लिए आसपास मौजूद लोगों को आवाज दी, लेकिन किसी ने उस की मदद नहीं की.

विक्रम ने हिम्मत नहीं हारी. वह खुद स्कूटी चला कर एक निजी अस्पताल पहुंचा. लेकिन पुलिस केस होने की वजह से वहां के डाक्टरों ने उसे भरती करने से मना कर दिया गया.

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इस के बाद वह घटनास्थल से लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित पीएमसीएच पहुंच गया. वहां उसे डाक्टरों ने भरती कर लिया और औपरेशन कर के उस के शरीर से पांचों गोलियां निकाल दीं. जिस से उस की जान को कोई खतरा नहीं रहा.

पुलिस को सूचना दी जा चुकी थी. पुलिस अधिकारी घटनास्थल गए, वहां का निरीक्षण किया. आसपास के लोेगों से पूछताछ की, उस के बाद पीएमसीएच पहुंच गए. डाक्टरों ने जब घायल विक्रम को खतरे से बाहर बताया तो पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली.

पुलिस अधिकारियों ने विक्रम के बयान लिए. विक्रम ने अपने बयान में  पटना शहर के मशहूर फिजियोथैरेपिस्ट और जेडीयू नेता राजीव सिंह और उन की पत्नी खुशबू सिंह पर आरोप लगाया कि उन दोनों ने ही बदमाशों के जरिए उस पर जानलेवा हमला करवाया है.

वजह यह बताई कि उस का खुशबू सिंह से पैसों के लेनदेन का विवाद था. जो पैसे उस ने खुशबू सिंह से उधार लिए थे, वह सब उन को वापस कर चुका था. उस के बावजूद खुशबू उस की जान लेने पर आमादा थी. इस से पहले भी खुशबू ने उस पर ब्लेड से हमला किया था, जिस के कारण उसे 14 टांके लगे थे. चूंकि मामला हाईप्रोफाइल था. इसलिए पुलिस अधिकारियों ने उस के बयान का वीडियो बना लिया.

इसी बयान के आधार पर कदमकुआं थाने में डा. राजीव सिंह, उस की पत्नी खुशबू सिंह और अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 307, 120बी, 34 और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

डाक्टर दंपति से हुई पूछताछ

देर शाम पुलिस ने डाक्टर दंपति को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. थाने आ कर डा. राजीव सिंह बड़ी ठसक के साथ कुरसी पर बैठ कर मोबाइल पर अपनी पार्टी के करीबी नेताओं से बात करते रहे और अपनी पैरवी करने के लिए कहते रहे. कुछ नेताओं ने उन की इस मामले में पैरवी भी की, लेकिन वह पैरवी किसी काम न आई.

पुलिस अधिकारियों ने डा. राजीव और खुशबू से पूछताछ की. राजीव सिंह ने बताया कि फरवरी 2020 में विक्रम उन के संपर्क में आया था. उन्होंने विक्रम को बच्चों को डांस की टे्रनिंग देने के लिए रख लिया. लौकडाउन में वह घर पर आ कर बच्चों को टे्रनिंग देने लगा.

समय के साथ उस से रिश्ता सा जुड़ गया था. उस ने खुशबू से कुछ पैसे उधार लिए थे. उन पैसों को ले कर उन के बीच विवाद तो था, लेकिन उन्होंने विक्रम को जान से मारने की कोशिश नहीं की. चूंकि पुलिस के पास उस समय उन के खिलाफ कोई सबूत नहीं थे, इसलिए पूछताछ के बाद उन दोनों को घर भेज दिया.

अगले दिन 19 सितंबर को पुलिस की 2 टीमें बनाई गईं. एक तो डाक्टर दंपति से संबंधित जानकारियां जुटाने में लगाई गई तो दूसरी टीम शूटर्स तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने में लगाई गई.

डा. राजीव की पत्नी खुशबू की काल डिटेल्स में विक्रम से घटना से पहले 120 दिनों तक 1100 बार बात करने का पता चला. पिछले साल एक सितंबर से मई 2021 तक दोनों के बीच 1875 बार बात हुई. इन काल्स की कुल अवधि 5.50 लाख सैकेंड थी.

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इसी बीच सोशल मीडिया पर विक्रम और खुशबू के एक साथ घूमने और प्रेम दर्शाते फोटो वायरल हो गए. इस से काल डिटेल्स और दोनों के एक साथ फोटो देखने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई कि मामला पैसों के लेनदेन का न हो कर प्रेम प्रसंग का है.

एक औडियो भी वायरल हुआ, जिस में एक महिला विक्रम की मां को विक्रम को जान से मारने की धमकी दे रही थी. जो महिला धमकी दे रही थी, वह डा. राजीव सिंह की पत्नी खुशबू बताई जा रही थी.

पुलिस की दूसरी टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी. घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों के फोटो देखने के बाद इलाके के सभी कैमरों की सीसीटीवी फुटेज की जांच करते हुए पुलिस अगमकुआं थाना क्षेत्र के भागवत नगर इलाके तक पहुंच गई.

 अगले भाग में पढ़ें- सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग

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