पंजाब में 4 दशकों पहले जब बिहारी मजदूर आने लगे थे तो उन्हें काम पर लगाए रखने के लिए किसानों ने उन्हें नशा कराना शुरू किया था ताकि उन्हें दर्द महसूस न हो और वे 12-14 घंटे काम कर सकें.