इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले में व्यक्ति के अस्तित्व, गरिमा, आत्मसम्मान, स्वतंत्रता, विवेक आदि के उन हिस्सों पर बात करनी पड़ी जो दर्शनशास्त्र का हिस्सा हैं.