यह ठीक है कि व्यापारी और दुकानदार अंतत: घरों की सेवा करते हैं और उन्हें रोजमर्रा का सामान दिलाते हैं पर इस का मतलब यह नहीं कि इस चक्कर में वे अपने ग्राहकों की बस्तियों को ही उजाड़ दें.