सत्ता के अमृत मंथन में कब किस की जरूरत पड़ जाए यह नहीं कहा जा सकता इसलिए मायावती और अखिलेश यादव फिलहाल भाजपा की ट्रौल आर्मी को गोलियों से बचे हैं.