रेस, रिलीजन, कास्ट, रंग के भेदभाव को चुनावी जंग में भुनाना निर्दोषों के लिए महंगा ही पड़ता है. अपने देश में अगर मुसलिम, दलित इस के शिकार बन रहे हैं तो पढ़ेलिखे, उदार, तार्किक अमेरिका में.