आज का किशोर यानी कल का वयस्क दिशाहीन हो रहा है. ठीक है मानसूनी बादल कब कहां कितने बरसेंगे मालूम नहीं रहता पर बरसेंगे तो सही, यह पक्का रहता है पर आज हमारे किशोरों को नहीं मालूम कि कल क्या होगा. इस के जिम्मेदार किशोर नहीं हैं, वे नेता हैं जो अपना राग अलापते रहते हैं, वे अफसर हैं जो मेज थपथपाते रहते हैं, वे मुल्लापंडे हैं जो घंटेघडि़याल खड़काते रहते हैं, शिक्षा के दुकानदार हैं जो सारा समय पैसा सिर्फ पैसा कमाते रहते हैं.

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