केंद्र सरकार ने कुछ क्षेत्रों में 49 प्रतिशत तक विदेशी पूंजी निवेश किए जाने की अनुमति दी है. यह उस अनुमति से अलग है जिस में विदेशी कंपनियां विदेशी पूंजी के साथ भारत में पूरी तरह व्यापार व उत्पादन कर सकती हैं.

सिद्धांत के अनुसार किसी देश को अपनी भौगोलिक सीमाएं आर्थिक लेनदेन के लिए बंद नहीं करनी चाहिए. जब तक विश्व व्यापार है, तैयार सामान आए, पूंजी आए, निवेश आए, फैक्टरियां आएं, दुकानें आएं, सब एकसमान हैं. एक जगह का सामान सदियों से बहुत दूर तक बिकता रहा है. मोहनजोदड़ो की मुहरें अरब व यूरोप के देशों तक में मिली हैं. विश्व व्यापार भाईचारा, दोस्ती तो बढ़ाता ही है, यह तकनीक के अदलबदल का रास्ता भी खोलता है. इस पर किसी तरह का बंधन गलत है.

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