29 दिसंबर, 2018. समय सुबह के 4 बजे. स्थान थाणे. मुंबई से सटे जनपद थाणे के सिविल अस्पताल से कासारवाडवली पुलिस को एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिली, जिसे थाने में मौजूद इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने गंभीरता से लिया. उन्होंने चार्जरूम की ड्यूटी पर तैनात एसआई संतोष धाडवे को बुला कर अस्पताल से मिली सूचना के बारे में बताया और केस डायरी तैयार करने का निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने इस की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पुलिस कंट्रोलरूम को भी दे दी.

थाने में सूचना दर्ज करवाने के बाद इंसपेक्टर वैभव धुमाल अपने सहायक इंसपेक्टर कैलाश टोकले, एसआई विनायक निबांलकर, संतोष धाडवे, कांस्टेबल राहुल दडवे, दिलीप भोसले, राजकुमार महापुरे और महिला कांस्टेबल मीना धुगे को साथ ले कर थाणे सिविल अस्पताल के लिए रवाना हो गए.

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जिस समय पुलिस टीम अस्पताल परिसर में दाखिल हुई, तब तक डाक्टरों ने उस व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया था, जिसे संदिग्ध अवस्था में अस्पताल लाया गया था और लाने वाले उसे अस्पताल में छोड़ कर गायब हो गए थे. पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि मृतक को अस्पताल में उपचार के लिए रात के साढे़ 3 बजे लाया गया था.

उसे लाने वालों में एक सुंदर महिला और एक हट्टाकट्टा युवक था. उन का कहना था कि वह व्यक्ति घायल अवस्था में उन्हें कलवा बांध विलगांव की सुरंग के पास सड़क किनारे तड़पता हुआ मिला था. शायद वह किसी भारी वाहन की चपेट में आ गया होगा. इंसानियत के नाते वे उसे अस्पताल ले आए थे.

घायल की स्थित देख कर डाक्टर उस के उपचार में जुट गए. डाक्टर घायल के बारे में कुछ बताते उस से पहले ही उसे लाने वाली महिला और युवक दोनों अस्पताल से गायब हो गए. मृतक की उम्र 30 साल के आसपास थी. उस के सिर पर घाव और गले पर खरोचों के अलावा काले रंग का एक गहरा निशान भी था.

रहस्यमय लाश और अंजान महिला व युवक

अस्पताल के डाक्टरों और अस्पताल में तैनात पुलिस कांस्टेबल के बयानों के हिसाब से मामला काफी जटिल था. इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने मृतक की लाश का बारीकी से निरीक्षण किया तो उन्हें ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया जो महिला और उस के साथी युवक ने अस्पताल के डाक्टरों और कांस्टेबल को बताया था. बहरहाल प्राथमिक काररवाई के बाद इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने लाश का पंचनामा बना कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और थाने लौट आए.

थाने लौट कर इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने अपने सहायकों के साथ विचारविमर्श कर तफ्तीश की रूप रेखा तैयार की. इस के साथ ही उन्होंने इस बारे में डीसीपी अभिनाश आंमोरे, एसीपी महादेव भोर और थानाप्रभारी दत्तात्रेय ढोले को बता कर तफ्तीश शुरू कर दी.

जांच आगे बढ़ाने के लिए मृतक की शिनाख्त जरूरी थी. वह कौन था, कहां रहता था. उसे अस्पताल लाने वाली महिला और युवक कौन थे. जैसे कई सवाल थे, जिन का जवाब मिले बिना तफ्तीश आगे नहीं बढ़ सकती थी.

अस्पताल के सीसीटीवी के जो फुटेज मिले उन में मृतक और उसे लाने वालों की तसवीरें अस्पष्ट थीं. सारी कडि़यों को जोड़ना आसान तो नहीं था, लेकिन नामुमकिन भी नहीं था. सोचविचार कर इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने अपने स्टाफ के अनुभवी कर्मचारियों की एक टीम तैयार की और उसे 2 भागों में बांट कर अलगअलग जिम्मेदारी सौंप दी.

पहली टीम को उन्होंने कलवा बांध विलगांव सुरंग के पास की सच्चाई का पता लगाने भेज दिया. जिस का जिक्र डाक्टर और कांस्टेबल के बयानों में आया था. दूसरी टीम को उन्होंने अस्पताल से मिले सीसीटीवी के उन फुटेज के आधार पर आसपास के गांवों में जा कर मृतक और उसे अस्पताल लाने वालों के बारे में जानकारी हासिल करने को कहा.कहावत है कि विश्वास का वृक्ष कभी नहीं सूखता. इस मामले में भी यही हुआ.

पहली टीम बांध विलगांव से खाली हाथ लौट आई. बांध विलगांव के पास ऐसा कुछ नहीं हुआ था, जैसा उस महिला और युवक ने डाक्टरों को बताया था. इंसपेक्टर वैभव धुमाल को जो संदेह था सही निकला. इंसपेक्टर वैभव धुमाल को विश्वास था कि कोई न कोई राह जरूर निकलेगी.

शक की सूई सीधे हत्या की तरफ इशारा कर रह थी. यह बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी स्पष्ट हो गई थी. पता चला, उस के सिर पर घातक वार तो किया गया था, लेकिन उस की मौत गला घोंटने से हुई थी. साफ पता चल रहा था कि उस की बेरहमी से हत्या कर के पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई थी. इसी वजह से वह महिला और युवक शक के दायरे में आ गए.

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सरस सलिल विशेष

पहली टीम को भले ही कोई सुराग नहीं मिला था, लेकिन दूसरी टीम खाली हाथ नहीं लौटी.

इस टीम ने उस औटो वाले को खोज निकाला, जिस के औटो से मृतक को अस्पताल लाया गया था. औटो वाले की निशानदेही पर पुलिस टीम मृतक के परिवार तक पहुंच गई.

उस के परिवार ने मृतक की शिनाख्त गोपी नाइक के रूप में की. गोपी नाइक पत्नी अैर बेटी के सथ घोड़बंदर रोड गायमुख इलाके की टीएमसी कालोनी में रहता था. वह थाणे म्युनिसिपल कारपोरेशन में नौकरी करता था.

इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने तत्काल मृतक गोपी नाइक के भाई दिलीप नाइक और परिवार वालों से पूछताछ की. जब दिलीप नाइक को अस्पताल ले जा कर लाश दिखाई गई तो वह गोपी नाइक का शव देख कर फूटफूट कर रोने लगा.

दिलीप नाइक को अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई तो उस ने गोपी नाइक को अस्पताल लाने वाली महिला और उस के साथ के युवक को पहचान लिया. वह महिला मृतक की पत्नी प्रिया नाइक थी और उस के साथ वाला युवक उस का बौयफ्रैंड महेश कराले था.

पुलिस ने गोपी नाइक के भाई दिलीप नाइक की तहरीर पर केस दर्ज कर के शव गोपी नाइक को सौंप दिया. इंसपेक्टर वैभव धुमाल अपनी टीम के साथ जब गोपी नाइक के घर पहुंचे तो प्रिया घर में नहीं थी. पूछताछ में आसपड़ोस वालों ने बताया कि उन का घर पिछले 2-3 दिनों से बंद है. जब उन लोगों को यह जानकारी मिली कि गोपी नाइक की हत्या हो गई है, तो वे सन्न रह गए. उन का कहना था कि एक न एक दिन यह तो होना ही था. उन्होंने भी अंगुली प्रिया और महेश कराले की ओर उठाई.

खुलता गया रहस्य

पुलिस टीम को हत्या की सारी कडि़यों को जोड़ने के लिए साक्ष्यों की जरूरत थी. उन्होंने कालोनी के 2 व्यक्तियों को पंच बना कर घर की तलाशी ली तो घर की साफसफाई के बाद भी वहां गुनाह के निशान मिल ही गए, जिन्हें देख कर पुलिस टीम को यह समझने में देर नहीं लगी कि हत्या की साजिश घर के अंदर ही रची गई थी. घर के बैडरूम और बाथरूम के फर्श पर पडे़ खून के धब्बे हत्या की पूरी कहानी बयान कर रहे थे.

पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर के तेजी से तफ्तीश शुरू कर दी. पुलिस टीम ने प्रिया और महेश के सभी उन ठिकानों पर दबिश दी, जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी. घटना को 36 घंटे से अधिक बीत गए थे. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना थी कि प्रिया और महेश शहर छोड़ कर कहीं चले गए हों या शहर छोड़ने की कोशिश में हों.

यही सोच कर पुलिस टीमों ने शहर और जनपद की नाकेबंदी करा दी. साथ ही मुखबिरों को भी सचेत कर दिया गया. नतीजा यह निकला कि घटना के एक सप्ताह बाद पुलिस ने मुखबिरों की सूचना पर 5 जनवरी, 2019 की रात प्रिया नाइक और महेश कराले को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे अपने गांव से पैसों का जुगाड़ कर के महाराष्ट्र से बाहर भागने की तैयारी में थे.

मैट्रिक पास 28 वर्षीय प्रिया नाइक जितनी खूबसूरत और स्मार्ट थी, उतनी ही महत्त्वाकांक्षी भी थी. उस के सपने बहुत ऊंचे थे. शादी से पहले उस ने एक सुंदर स्वस्थ जीवनसाथी की कामना की थी. लेकिन उस के सपने उस समय धराशायी हो गए जब उस का विवाह उस के मनमुताबिक न हो कर दिव्यांग गोपी नाइक से हो गया.

गोपी और प्रिया का कोई मेल नहीं था. लेकिन परिवार की गरीबी और सामाजिक दबाव की वजह से उस ने समझौता कर लिया. गोपी को पति के रूप में स्वीकार कर वह अपनी गृहस्थी में रम गई.

गोपी नाइक थाणे म्युनिसिपल कारपोरेशन में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी था. वह अपने परिवार के साथ कलवा के अंकलेश्वर नगर में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के मध्यम वर्गीय परिवार में पिता किसान नाइक, मां, बहन और एक भाई दिलीप नाइक था. भाईबहन सभी की शादी हो चुकी थी और सब सेटल थे.

किशन नाइक सीधेसादे प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. समाज में उन का मानसम्मान था. प्रिया उन के दूर के एक रिश्तेदार की बेटी थी. जिसे किशन नाइक ने स्वयं अपने बेटे गोपी नाइक के लिए चुना था. प्रिया जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर गोपी नाइक और उस का पूरा परिवार बहुत खुश था.

गोपी नाइक प्रिया को बहुत प्यार करता था और उस की हर खुशी का ध्यान रखता था. पूरे परिवार के दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे. शादी के कुछ साल बाद गोपी नाइक को परिवार से अलग रहने के लिए जाना पड़ा.

उसे टीएमसी की तरफ से डा. भीमराव अंबेडकर कालोनी में मकान मिल गया था. यहां आने के कुछ दिनों बाद प्रिया ने एक बेटी को जन्म दिया. इस से गोपी और प्रिया का जीवन और भी हंसीखुशी से बीतने लगा. देखतेदेखते प्रिया की बेटी 7 साल की हो गई. वह सीनियर केजी में पढ़ रही थी. गोपी नाइक नौकरी कर रहा था और प्रिया कुशल गृहिणी की तरह घर संभाल रही थी.

मोबाइल ने बदल दी सोच और दुनिया

सामान्य रूप से चलते उन के दांपत्य जीवन के 8-10 साल कैसे निकल गए पता ही नहीं चला. इस की वजह गोपी का प्रिया के प्रति प्यार और विश्वास था. प्रिया भी गोपी के प्यार और अपनी गृहस्थी में डूबी थी. हालांकि कभीकभी गोपी की दिव्यांगत की सूई प्रिया के दिल में चुभ जाती थी. उस ने जवानी के चौखट पर खड़े हो कर जो सपना देखा था, वह पूरा नहीं हुआ था.

2016 में प्रिया नाइक का यह सपना उस समय अस्तित्व में आने लगा, जब उस के सामने 22 वर्षीय महेश कराले की तसवीर आई. महेश कराले ठीक वैसा ही था, जिस की प्रिया ने कभी कल्पना की थी. सुंदर आंखें, बलिष्ठ बाहें, गठीला बदन, चौड़ी छाती. प्रिया उस की दीवानी हो गई. धीरेधीरे प्रिया की इस दीवानगी ने गोपी और उस के बीच दरार पैदा कर दी. 2018 के मध्य में आ कर दरार इतनी बढ़ गई कि साल पूरा होतेहोते यह दरार गोपी नाइक के पूरे अस्तित्व को ही निगल गई.

22 वर्षीय महेश कराले और प्रिया नाइक की जानपहचान फेसबुक पर हुई थी. प्रिया नाइक जब से टीएमसी कालोनी में रहने आई थी, तब से उस के पास घर का ज्यादा काम नहीं था. बेटी को स्कूल और पति को काम पर भेजने के बाद वह घर में अकेली बोर हो जाती थी. थोड़ाबहुत समय टीवी के साथ जरूर गुजार लेती थी. लेकिन इस से मन को सुकून नहीं मिलता था. ऐसे में गोपी नाइक ने प्रिया को एक महंगा मोबाइल ला कर दे दिया. उस वक्त उस ने सोचा भी नहीं होगा कि वही मोबाइल उस के दांपत्य जीवन के मायने ही बदल देगा.

मोबाइल हाथ में आया तो प्रिया नाइक का दैनिक जीवन ही बदल गया. उस का मन घर के कामों में कम और मोबाइल में ज्यादा लगने लगा. वह फेसबुक पर अपना प्रोफाइल बना कर नएनए दोस्त बनाती और उन से चैटिंग करती. इसी के चलते वह महेश कराले की ओर आकर्षित हो गई. वह भूल गई कि वह 7 साल की बच्ची की मां और उस पर अटूट विश्वास करने वाले पति की पत्नी है.

महेश कराले का परिवार महाराष्ट्र के जनपद रायगढ़ के नेरल गांव का रहने वाला था. उस के पिता गोविंद कराले गांव के सम्मानित किसान थे. महेश कराले उन का सब से छोटा और लाडला बेटा था.

ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद जब उसे मुंबई रेलवे बोर्ड में सर्विस मिली तो उस ने गांव से थाणे आ कर उपनगर कर्जत में किराए का एक कमरा ले लिया. प्रिया की तरह महेश भी फुरसत के समय फेसबुक में डूब जाता था. प्रिया का प्रोफाइल और फोटो देख कर वह इतना प्रभावित हुआ कि उस की दोस्ती की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली.

फेसबुक के माध्यम से दोनों की 2 सालों तक दोस्ती चलती रही. दोनों फोन पर भी बातें करने लगे थे. मिलनेमिलाने की बात भी होने लगी. घटना से 6 महीने पहले दोनों एक तयशुदा जगह पर मिले और एकदूसरे के आगोश में सुकून खोज लिया. एक बार जब मर्यादा टूटी तो फिर यह एक आम सी बात हो गई. जब भी मौका मिलता दोनों अपनी जरूरतों को पूरा कर लेते थे.

शुरुआती कुछ दिनों तक प्रिया नाइक और महेश कराले का मिलनाजुलना पार्कों और रेस्टोरेंटों तक सी सीमित था. फिर धीरेधीरे यह सिलसिला प्रिया के घर तक पहुंच गया. चूंकि ऐसी बातें छिपती नहीं हैं, इसलिए इस की भनक आसपड़ोस के लोगों तक पहुंची तो उन में कानाफूसी होने लगी. यह भनक गोपी नाइक के कानों तक भी पहुंच गई.

उस ने जब प्रिया से सच्चाई जानने की कोशिश की तो उस ने बड़ी सफाई से इस बात को ऐसा घुमाया कि गोपी चुप रह गया. महेश कराले को उस ने अपना दूर का भाई बताया, जिस से बात वहीं खत्म हो गई.

प्रिया ने महेश कराले को अपना भाई बता कर अपने पापों को छिपाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन इस में वह पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई. उस के कारनामों का सच एक दिन सामने आ ही गया. प्रिया मोबाइल में सेव्ड उस के और महेश कराले के नंबर मैसेज और सेल्फी वगैरह ने हर राज से परदा उठा दिया.

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सब कुछ देख कर गोपी नाइक का दिमाग घूम गया. प्रिया से उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. वह प्रिया को बहुत ही प्यार करता था. उस की सारी जरूरतें पूरी करता था. उस ने किसी तरह अपने आप को संभाला और इस मुद्दे पर प्रिया को आडे़ हाथों लिया. यही नहीं उस ने प्रिया का मोबाइल फोन भी ले लिया. इस के साथ ही वह प्रिया को मानसिक और शारीरिक रूप से टौर्चर भी करने लगा.

यह सब प्रिया और महेश की सहनशक्ति से बाहर हो गया था. तंग आ कर उन दोनों ने गोपी नाइक को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया. इसीलिए वह धीरेधीरे पति से दूरियां बढ़ाती गई. लेकिन सीधासादा गोपी इसे समझ नहीं पाया. जब तक यह सब उस की समझ में आया तब तक काफी देर हो चुकी थी.

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हत्या की योजना के बाद

अपनी योजना के अनुसार घटना के एक सप्ताह पहले महेश कराले ने गोपी को अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने एक परिचित कैमिस्ट की मदद से ढेर सारी नींद की गोलियां खरीदीं और ला कर प्रिया को दे दीं. साथ ही उसे समझा भी दिया कि मौका मिलते ही गोपी को कैसे देगी.

घटना के दिन प्रिया ने वैसा ही किया भी, जैसा महेश कराले ने कहा था. उस ने गोपी नाइक की बीयर में करीब 30 गोलियां डाल दीं. लेकिन पता नहीं क्यों गोपी नाइक पर नींद की गोलियों का उतना असर नहीं हुआ. जितना होना चाहिए था. वह अर्द्धनिद्रा में बैड पर पड़ा करवटें बदलता रहा. प्रिया ने जब यह बात महेश कराले को बताई तो वह गोपी के घर आ गया. उस ने साथ लाए फिनायल का इंजेक्शन गोपी के शरीर में लगा दिया.

जैसेजैसे समय बीत रहा था वैसेवैसे प्रिया और महेश कराले के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. उन की धड़कनें तब और बढ़ गईं जब गोपी पर फिनाइल के इंजेक्शन का भी कोई खास असर नहीं हुआ. वह बाथरूम में जा कर उल्टियां करने लगा. प्रिया और महेश से यह सब सहन नहीं हुआ तो दोनों ने गोपी को खुद मौत की नींद सुला दिया.

महेश कराले ने गोपी नाइक का गला पकड़ा और प्रिया ने घर के अंदर रखे लोहे की रौड से उस के सिर पर वार किया. इस के बावजूद गोपी अपने आप को बचाने के लिए बाथरूम से भाग कर बैडरूम में आया, लेकिन वह गिर कर बेहोश हो गया. उस के बेहोश होने के बाद भी महेश कराले और प्रिया ने अपनी तसल्ली के लिए एक बार फिर पूरी ताकत से उस का गला दबाया.

गोपी नाइक की बेरहमी से हत्या करने के बाद दोनों ने संतोष की सांस ली. इस के बाद दोनों गोपी के शव को ठिकाने लगाने के बारे में विचारविमर्श करने लगे. काफी सोचविचार के बाद दोनों इस नतीजे पर पहुंचे कि पुलिस को गुमराह करने के लिए गोपी को घायल बता कर थाणे सिविल अस्पताल ले जाएं और उसे डाक्टरों के हवाले कर के वहां से निकल लें.

इसी योजना के तहत रात 2 बजे दोनों मृत गोपी के लहूलुहान शव को स्कूटर पर लाद कर थाणे बांध विलगांव की सड़क पर ले गए. वहां गोपी के शव को लेटा कर महेश ने अपना स्कूटर पास की झाडि़यों में छिपा दिया.

वहां से आटो पकड़ कर दोनों गोपी नाइक के शव को अस्पताल ले गए और डाक्टरों के हवाले कर के वहां से निकल गए. दोनों अस्पताल और पुलिस कांस्टेबल की नजरों से तो बच कर निकल गए. लेकिन अस्पताल की तीसरी आंख से नहीं बच पाए.

अस्पताल से निकल कर प्रिया और महेश कराले गोपी के घर आए. उन्होंने घर के अंदर बैडरूम और बाथरूम के फर्श पर बिखरे खून की साफसफाई कर दी. साढ़े 5 बजे प्रिया ने अपनी बेटी को उठाया और घर में ताला लगा कर महेश कराले के साथ निकल गई. वहां से दोनों सीधे माथेरान हिल चले गए.

लेकिन पैसों की कमी की वजह से महेश प्रिया को ले कर अपने गांव आ गया. ताकि पैसों का जुगाड़ कर के प्रिया को कहीं दूर ले जा सके. दोनों कहीं जा पाते इस से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए. दोनों ने योजना तो अच्छी बनाई थी, लेकिन उन का गुनाह छिप नहीं सका.

जांचअधिकारी इंसपेक्टर वैभव धुमाल ने प्रिया नाइक और महेश कराले से पूछताछ के बाद उन के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 228, 201 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया और उन्हें थाणे के मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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