बाबाजी के सामने बैठे युवक ने झट से अपने हाथ में थामी कपड़े की छोटी सी पोटली बाबा की ओर बढ़ा दी. उस में शायद मिट्टी थी. बाबा ने पोटली से चुटकी भर मिट्टी निकाल कर अपनी हथेली पर रख कर उसे सूंघा.