शशांक ने परिश्रम के बल पर कंपनी में विशेष अहमियत तो बना ली थी, पर वह पत्नी सरिता को समय न दे पाने की वजह से उस का विश्वास खोता जा रहा था. वह तो हरिराम था जिस ने शशांक को समय पर सही राह दिखा दी.