गांव की लड़कियों को अगर सरकारी नौकरी नहीं मिलती है तो वे प्राइवेट नौकरी नहीं करती हैं. ऐसे में अब पढ़ाई करने के बाद भी गांव की लड़कियां नौकरी के बजाय चूल्हाचौका करने पर मजबूर हो रही हैं.