राजनीति का गिरता स्तर कहें या फिर नेताओं के धर्मजाति से भरे पूर्वाग्रह. जिस के चलते हर पार्टी के नेता कुंठित बदजबानी कर सारी नैतिकता लांघ रहे हैं. नेताओं के इन ओछे बोलों पर अंकुश जरूरी है.