जब चंडीगढ़ जैसे शहर में पढ़ीलिखी गाड़ी चलाती लड़कियों की खैर नहीं है, तो देश के कसबों और गांवों में क्या होता होगा, इस का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.