भारत में बाल विवाह को धर्म का जामा पहना कर पंडेपुजारियों की कमाई का जरीया बना दिया गया है. सवाल उठता है कि जब ऐसी शादियां गैरकानूनी हैं, तो कठघरे में धर्म के धंधेबाज क्यों नहीं खड़े किए जाते हैं?