किसी की दरिंदगी भरी गलती को ढोती मोहनी अंदर ही अंदर घुटती जा रही थी. उस का मन आत्मग्लानि से भरा था. फिर आशी ने ऐसी क्या बात कह दी कि आत्मग्लानि से भरी मोहनी को नई राह मिल गई?
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