साध्वी माला उसे कामवासना से परे वैराग्य का प्रवचन देने आई थी. लेकिन उलटे उस ने साध्वी को ऐसी शिक्षा दी कि साध्वी को एहसास होने लगा कि वह छलती आ रही थी.