सरस सलिल विशेष

नए सहायक प्रबंधक नवीन कौशिक को उस शाम विश्वास हो गया कि अर्चना नाम की सुंदर चिडि़या जल्दी ही पूरी तरह उस के जाल में फंस जाएगी.

सिर्फ महीने भर पहले ही नवीन ने इस आफिस में अपना कार्यभार संभाला था. खूबसूरत, स्मार्ट और सब से खुल कर बातें करने वाली अर्चना ने पहली मुलाकात में ही उस के दिल की धड़कनें बढ़ा दी थीं.

जरा सी कोशिश कर के नवीन ने अर्चना के बारे में अच्छीखासी जानकारी हासिल कर ली.

बड़े बाबू रामसहायजी ने उसे बताया, ‘‘सर, अर्चना के पति मेजर खन्ना आजकल जम्मूकश्मीर में पोस्टेड हैं. अपने 5 वर्ष के बेटे को ले कर वह यहां अपने सासससुर के साथ रहती हैं. सास के पैरों को लकवा मारा हुआ है. पूरे तनमन से सेवा करती हैं अर्चना अपने सासससुर की.’’

बड़े बाबू के कक्ष से बाहर जाने के बाद नवीन ने मन ही मन अर्चना से सहानुभूति जाहिर की कि मन की खुशी और सुखशांति के लिए जवान औरत की असली जरूरत एक पुरुष से मिलने वाला प्यार है. मेजर साहब से दूर रह कर तुम सासससुर की सेवा में सारी ऊर्जा नहीं लगाओ तो पागल नहीं हो जाओगी, अर्चना डार्लिंग.

करीब 30 साल की उम्र वाली अर्चना को मनोज और विकास के अलावा सभी सहयोगी नाम से पुकारते थे. वे दोनों उन्हें ‘अर्चना दीदी’ क्यों कहते हैं, इस सवाल को उन से नवीन ने एक दिन भोजनावकाश में पूछ ही लिया.

‘‘सर, वह हमारी कोई रिश्तेदार नहीं है. बस, मजबूरी में उसे बहन बनाना पड़ा,’’ विकास ने सड़ा सा मुंह बना कर जवाब दिया.

‘‘कैसी मजबूरी पैदा हो गई थी?’’ नवीन की उत्सुकता फौरन जागी.

विकास के जवाब देने से पहले ही मनोज बोला, ‘‘सर, इनसानियत के नाते मजबूर हो कर उसे बहन कहा. उस का कोई असली भाई नहीं है. उस का दिल रखने को काफी लोगों की भीड़ के सामने हम ने उसे बहन बना लिया एक दिन.’’

‘‘आप उस के चक्कर में मत पडि़एगा, सर,’’ विकास ने अचानक उसे बिन मांगी सलाह दी, ‘‘किसी सुंदर औरत का अनिच्छा से भाई बनना मुंह का स्वाद खराब कर देता है.’’

‘‘वैसे मेरा कोई खास इंटरेस्ट नहीं है अर्चना में, पर पति से दूर रह रही इस तितली का किसी से तो चक्कर चल ही रहा होगा?’’ नवीन ने अपने मन को बेचैन करने वाला सब से महत्त्वपूर्ण सवाल विकास से पूछ लिया.

‘‘फिलहाल तो किसी चक्कर की खबर नहीं उड़ रही है, सर.’’

‘‘फिलहाल से क्या मतलब है तुम्हारा?’’

‘‘सर, अर्चना पर दोचार महीने के बाद कोई न कोई फिदा होता ही रहता है, पर यह चक्कर ज्यादा दिन चलता नहीं.’’

‘‘क्यों? मुझे तो अर्चना अच्छी- खासी ‘फ्लर्ट’ नजर आती है.’’

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‘‘सर, जैसे हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती वैसे ही शायद यह ‘फ्लर्ट’ चरित्र की कमजोरी न हो.’’

‘‘छोड़ो, हम क्यों उस के चरित्र पर चर्चा कर के अपना समय खराब करें,’’ और इसी के साथ नवीन ने वार्त्तालाप का विषय बदल दिया था.

अर्चना का कोई प्रेमी नहीं है, इस जानकारी ने नवीन के अंदर नया उत्साह भर दिया और वह डबल जोश के साथ उस पर लाइन मारने लगा.

‘‘सर, हम सब यहां आफिस में काम करने के लिए आते हैं और इसी की हमें तनख्वाह मिलती है. हंसीमजाक भी आपस में चलता रहना चाहिए, पर शालीनता की सीमाओं के भीतर,’’ अर्चना ने गंभीरता से नवीन को कई बार इस तरह से समझाने का प्रयास किया, पर कोई फायदा नहीं हुआ.

‘‘अपने दिल को काबू में रखना अब मेरे लिए आसान नहीं है,’’ ऐसे संवाद बोल कर नवीन ने उस को अपने जाल में फंसाने की कोशिश लगातार जारी रखी.

फिर उस शाम नवीन ने जोखिम उठा कर अपने आफिस के कमरे के एकांत में अचानक पीछे से अर्चना को अपनी बांहों में भर लिया.

नवीन की इस आकस्मिक हरक त से एक बार को तो अर्चना का पूरा शरीर अकड़ सा गया. उस ने अपनी गरदन घुमा कर नवीन के चेहरे को घूरा.

‘‘मैं तुम से दूर नहीं रह सकता हूं…तुम बहुत प्यारी, बहुत सुंदर हो,’’ अपने मन की घबराहट को नियंत्रित रखने के लिए नवीन ने रोमांटिक लहजे में कहा.

‘‘सर, प्लीज रिलेक्स,’’ अर्चना अचानक मुसकरा उठी, ‘‘आप इतने समझदार हैं, पर यह नहीं समझते कि फूलों का आनंद जोरजबरदस्ती से लेना सही नहीं.’’

‘‘मैं क्या करूं, डियर? यह दिल है कि मानता नहीं,’’ नवीन का दिल बल्लियों उछल रहा था.

‘‘अपने दिल को समझाइए, सर,’’ नवीन से अलग हो कर अर्चना ने उस का हाथ पकड़ा और उसे छेड़ती हुई बोली, ‘‘बिना अच्छा दोस्त बने प्रेमी बनने के सपने देखना सही नहीं है, सर.’’

‘‘अगर ऐसी बात है, तो हम अच्छे दोस्त बन जाते हैं.’’

‘‘तो बनिए न,’’ अर्चना इतरा उठी.

‘‘कैसे?’’

‘‘यह भी मैं ही बताऊं?’’

‘‘हां, तुम्हारी शागिर्दी करूंगा तो फायदे में रहूंगा.’’

‘‘कुछ उपहार दीजिए, कहीं घुमाने ले चलिए, कोई फिल्म, कहीं लंच या डिनर हो…चांदनी रात हो, हाथ में हाथ हो, फूलों भरा पार्क हो…सर, पे्रमी हृदय को प्यार की अभिव्यक्ति के लिए कोई मौकों की कमी है?’’

‘‘बिलकुल नहीं है. अभी तैयार करते हैं, कल इतवार को बिलकुल मौजमस्ती से गुजारने का कार्यक्रम.’’

‘‘ओके,’’ अर्चना ने नवीन को उस की कुरसी पर बिठाया और फिर मेज के दूसरी तरफ पड़ी कुरसी पर बैठ कर बड़ी उत्सुकता दर्शाते हुए उस के बोलने का इंतजार आंखें फैला कर करने लगी.

रविवार साथसाथ घूम कर बिताने के उन के कार्यक्रम की शुरुआत फिल्म देखने से हुई. सिनेमाघर के सामने दोनों 11 बजे मिले.

नवीन अच्छी तरह तैयार हो कर आया था. महंगे परफ्यूम की सुगंध से उस का पूरा बदन महक रहा था.

‘‘सर, मुझे यह सोचसोच कर डर लग रहा है कि कहीं कोई आप के साथ घूमने की खबर मेरे सासससुर तक न पहुंचा दे,’’ अर्चना ने घबराए अंदाज में बात की शुरुआत की, ‘‘कल को कुछ गड़बड़ हुई तो आप ही संभालना.’’

‘‘कैसी गड़बड़ होने से डर रही हो तुम?’’

‘‘क ल को भेद खुला और मेरे पति ने मुझे घर से बाहर कर दिया तो मैं आप के घर आ जाऊंगी और आप की श्रीमती जी घर से बाहर होंगी.’’

‘‘मुझे मंजूर है, डार्लिंग.’’

‘‘इतनी हिम्मत है जनाब में?’’

‘‘बिलकुल है.’’

‘‘तब उस मूंछों वाले को हड़का कर आओ जो मुझे इतनी देर से घूरे जा रहा है.’’

नवीन ने दाईं तरफ घूम कर मूंछों वाले लंबेचौड़े पुरुष की तरफ देखा. वह वास्तव में अर्चना को घूर रहा था. नवीन ने माथे पर बल डाल कर उस की तरफ गुस्से से देखा, तो उस व्यक्ति ने अपनी नजरें घुमा लीं.

‘‘लो, डरा दिया उसे,’’ नवीन ने नाटकीय अंदाज में अपनी छाती फुलाई.

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‘‘थैंक यू. चलो, अंदर चलें.’’

अर्चना ने हाल में प्रवेश करने के लिए कदम बढ़ाए ही थे कि एक युवक से टकरा गई.

उस युवक के साथी ने अर्चना का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘जमाना बदल गया है, दोस्त. आज की लड़कियां खुलेआम लड़कों को टक्कर मारने लगी हैं.’’

‘‘शटअप,’’ अर्चना ने नाराज हो कर उसे डांट दिया.

‘‘इतनी खूबसूरत आंखों के होते हुए देख कर क्यों नहीं चल रही हो तुम?’’ पहले वाले युवक ने अर्चना का मजाक उड़ाते हुए सवाल किया.

‘‘शटअप, यू बास्टर्ड, लेडीज से बात करने की तमीज…’’

नवीन अपना वाक्य पूरा भी नहीं कर पाया था कि युवक ने फौरन उस का कालर पकड़ कर झकझोरते हुए पूछा, ‘‘क्या है, मुझे गाली क्यों दी तू ने?’’

‘‘मेरा कालर छोड़ो,’’ नवीन को गुस्सा आ गया.

‘‘नहीं छोडं़ूगा. पहले बता कि गाली क्यों दी?’’

नवीन ने झटके से उस युवक से अपना कालर छुड़ाया तो उस की शर्ट के बटन टूट गए. उस का उस युवक पर गुस्सा बढ़ा तो हाथ छोड़ने की गलती कर बैठा.

इस से पहले कि भीड़ व अर्चना उन में बीचबचाव कर पाते, उन दोनों युवकों ने नवीन पर 8-10 हाथ जड़ दिए.

खिसियाया नवीन पुलिस बुलाना चाहता था पर अर्चना उसे खींच कर हाल के अंदर ले गई.

कोने वाली सीट पर अर्चना के साथ बैठ कर नवीन का मूड जल्दी ही ठीक हो गया. उस ने दोचार रोमांटिक संवाद बोले, फिर उस के कंधे से सटा और झटके से अर्चना का हाथ पकड़ कर उसे चूम लिया.

‘‘भाइयो, आज तो डबल मजा आएगा. एक टिकट में 2-2 फिल्में देखेंगे. एक दूर स्क्रीन पर और दूसरी बिलकुल सामने. पहली एक्शन और दूसरी सेक्स और रोमांस से भरपूर होगी,’’ बिलकुल पीछे वाली सीट से एक युवक की आवाज उभरी और उस के 3 दोस्त ठहाका मार कर हंसे.

अर्चना झटके से नवीन की दूसरी दिशा में झुक कर बैठ गई. नवीन ने पीछे घूम कर देखा तो चारों युवक एकदूसरे की तरफ देख कर हंस रहे थे. उन में 2 युवक वही थे जिन के साथ उस का बाहर झगड़ा हुआ था.

नवीन की बगल में 1 मिनट पहले आ कर बैठे आदमी ने उसे बिन मांगी सलाह दी, ‘‘जनाब, आजकल का यूथ बदतमीज हो गया है. उन से उलझना मत. अपनी पत्नी के साथ घर जा कर प्यार मोहब्बत की बातें कर लेना.’’

नवीन ने गरदन मोड़ कर देखा तो पाया कि बाहर अर्चना को घूरने वाला बड़ीबड़ी मूंछों वाला व्यक्ति ही उस की बगल में बैठा था.

नवीन कोई प्रतिक्रिया दर्शाता, उस से पहले ही अर्चना फुसफुसा कर बोली, ‘‘सर, इस हाल का मैनेजर मेरे पति का परिचित है. मैं उस के सामने नहीं जाना चाहती हूं. आप समझदारी दिखाते हुए शांत हो कर बैठें.’’

नवीन मन मसोस कर सीधा बना बैठा रहा. वह जरा भी हिलताडुलता तो पीछे से फौरन आवाज आती, ‘‘अब चालू होगी दूसरी फिल्म.’’

पिक्चर हाल के अंधकार का तनिक भी फायदा न उठा सकने और 4-5 सौ रुपए यों ही बेकार में खर्च करने का अफसोस मन में लिए नवीन 3 घंटे बाद अर्चना के साथ पिक्चर हाल से बाहर आ गया.

अर्चना ने कुछ खाने की फरमाइश की तो फिर से उत्साह दर्शाते हुए नवीन उसे उस के मनपसंद होटल में ले आया.

दुर्भाग्य ने यहां भी नवीन का साथ नहीं छोड़ा और अर्चना के साथ जी भर कर दिल की बातें करने का मौका उसे नहीं मिला.

हुआ यों कि वेटर उन के लिए जो डोसासांभर ले कर आया उस में अर्चना की सांभर वाली कटोरी में लंबा सा बाल निकल आया.

‘‘आज इस होटल के मालिक की खटिया खड़ी कर दूंगी मैं,’’ नवीन को बाल दिखाते हुए अर्चना की आंखों से गुस्से की चिंगारियां उठ रही थीं.

‘‘तुम जा कहां रही हो?’’ उसे कुरसी छोड़ कर उठते देख नवीन परेशान हो उठा.

‘‘मालिक से शिकायत करने…और कहां?’’ अर्चना झटके से उठी तो एक और लफड़ा हो गया.

मेज को धक्का लगा और उस पर रखा खाने का सामान व प्लेटेंगिलास फर्श पर गिर कर टूट गए.

3 वेटर उन की मेज की तरफ बढ़े और अर्चना मालिक के कक्ष की तरफ. हाल में बैठे दूसरे लोगों के ध्यान का केंद्र वही बनी हुई थी.

अर्चना ने होटल के मालिक को खूब खरीखोटी सुनाई. उसे बोलने का मौका ही नहीं दिया उस ने. वह बेचारा मिमियाता सा ‘मैडम, मैडम’ से आगे कोई सफाई नहीं दे पाया.

अर्चना के चीखनेचिल्लाने व धमकियां देने से परेशान होटल मालिक ने अपने सामने दोबारा उन की मेज लगवाई. डोसासांभर इस बार ‘आन दी हाउस’ उन के सामने पेश किया गया, पर अर्चना का मूड ज्यादा नहीं सुधरा. वह वेटरों को लगातार गुस्से से घूरती रही. नवीन ने उसे समझाने की कोशिश की, तो वह भी अर्चना के गुस्से का शिकार हो गया.

जब वे दोनों होटल के बाहर आए तो नवीन ने दबी जबान में कुछ देर बाजार में घूमने की बात कही. अर्चना ने साफ मना कर दिया.

‘‘कुछ देर सामने सुंदर पार्क में चल कर बैठते हैं. मेरा दिमाग शायद वहीं बैठ कर ठंडा होगा,’’ अर्चना के इस प्रस्ताव का नवीन ने मुसकरा कर स्वागत किया.

‘‘आज न जाने किस मनहूस का मैं ने सुबह मुंह देखा, जो इतना अच्छा दिन खराब गुजर रहा है? तुम जैसी सुंदरी के साथ पार्क में घूमना मेरे लिए तो गर्व की बात है.’’

नवीन की बात सुन कर अर्चना मुसकराई, तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

पार्क काफी बड़ा था. अर्चना की मांग पर वे दोनों बातें करते हुए उस का चक्कर लगाने लगे.

पार्क के पीछे का हिस्सा सुनसान व ज्यादा घने पेड़पौधों वाला था. यहीं एकांत में पड़ी बैंच पर अर्चना बैठ गई तो नवीन भी उस की बगल में बैठ गया.

बातें करते करते अचानक नवीन ने अर्चना को कंधे से पकड़ा और अपने नजदीक कर अपनी बांहों में भरने की कोशिश की.

अर्चना ने अपने को छुड़ाने की कोई खास कोशिश नहीं की, पर नवीन को फौरन ही अपनी बांहों के घेरे से उसे मुक्त करने को मजबूर होना पड़ा.

2 सादी वरदी में पुलिस वाले एक घनी झाड़ी के पीछे से अचानक उन के सामने प्रकट हुए और शिकारी की नजरों से घूरते हुए पास आ गए.

‘‘शर्म नहीं आती तुम दोनों को सार्वजनिक स्थल पर अश्लील हरकतें करते हुए. समाज में गंदगी फैलाने के लिए तुम जैसे लोगों का मुंह काला कर के सड़कों पर घुमाना चाहिए,’’ लंबे कद का पुलिस वाला नवीन को खा जाने वाली नजरों से घूर रहा था.

‘‘बेकार में हमें तंग मत करो,’’ नवीन ने अपने डर को छिपाने का प्रयास करते हुए तेज स्वर में कहा, ‘‘हम कोई गलत हरकत नहीं कर रहे थे.’’

‘‘अब थाने चल कर सफाई देना,’’ दूसरे पुलिस वाले ने उन्हें फौरन धमकी दे डाली.

‘‘मैं पुलिस स्टेशन बिलकुल नहीं जाऊंगी,’’ अर्चना एकदम से रोंआसी हो उठी.

‘‘यह इस की पत्नी नहीं हो सकती,’’ लंबे कद का पुलिस वाला अपने साथी से बोला.

‘‘ऐसा क्यों कह रहे हैं, सर?’’ उस के साथी ने उत्सुकता दर्शाई.

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‘‘अरे, अपनी बीवी के साथ कौन इतने जोश से गले मिलने की कोशिश करता है?’’

‘‘इस का मतलब यह किसी और की बीवी के साथ ऐश करने यहां आया है. गुड, हमारा केस इस कारण मजबूत बनेगा, सर.’’

‘‘नवीन, कुछ करो, प्लीज,’’ अर्चना के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं.

‘‘देखिए, आप दोनों को जबरदस्त गलतफहमी हुई है. हम कोई अश्लील हरकत…’’

‘‘कर ही नहीं सकते क्योंकि इन के बीच गलत रिश्ता है ही नहीं मिस्टर पुलिसमैन,’’ अचानक झाड़ी के पीछे से निकल कर उन का एक और सहयोगी मनोज उन के सामने आ गया.

उस के साथ विकास भी था. इन्हें देख कर पुलिस वाले ज्यादा सतर्क  और गंभीर से नजर आने लगे.

‘‘आप इन दोनों को जानते हैं?’’ लंबे पुलिस वाले ने सख्त स्वर में सवाल किया.

‘‘जानते भी हैं और इन के साथ भी हैं. यह हैं हमारी अर्चना दीदी,’’ विकास ने परिचय दिया.

‘‘और यह साहब?’’ उस ने नवीन की तरफ उंगली उठाई.

‘‘यह हमारे नवीन भैया हैं, क्योंकि उम्र में सब से बड़े हैं. अब आप ही बताइए कि कहीं भाईबहन अश्लील हरकत…छी, छी, छी,’’ विकास ने बुरी सी शक्ल बना कर दोनों पुलिस वालों को शर्मिंदा करने का प्रयास किया.

‘‘अगर ये भाईबहन हैं तो यह इसे गले लगाने की क्यों कोशिश कर रहा था?’’ दूसरे  पुलिस वाले ने अपने माथे पर बल डाल कर प्रश्न किया.

‘‘जवाब दीजिए, नवीन भाई साहब,’’ मनोज ने उसे ‘हिंट’ देने की कोशिश की, ‘‘अर्चना दीदी आजकल जीजाजी की सेहत के कारण चिंतित चल रही हैं. कहीं आप उन्हें हौसला बंधाने को तो गले से नहीं लगा रहे थे?’’

‘‘बिलकुल, बिलकुल, यही बात है,’’ नवीन अपनी सफाई देते हुए उत्तेजित सा हो उठा, ‘‘मेजर साहब, यानी कि मेरे जीजा की तबीयत ठीक नहीं चल रही है. इसलिए यह दुखी थी और मैं इसे सांत्वना…’’

‘‘क्या आप के पति फौज में मेजर हैं?’’ लंबे पुलिस वाले ने नवीन को नजरअंदाज कर अर्चना से अचानक अपना लहजा बदल कर बड़े सम्मानित ढंग से पूछा.

‘‘जी, हां,’’ अर्चना ने संक्षिप्त सा जवाब दिया.

‘‘यह आप की बहन हैं?’’ दूसरे ने नवीन से पूछा.

‘‘जी, हां.’’

‘‘असली बहन हैं?’’

‘‘जी, नहीं. ये आफिस वाली बहन हैं,’’ मनोज बीच में बोल पड़ा.

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मतलब यह कि  हम सब एक आफिस में साथसाथ काम करते हैं और वहां सब के बीच भाईबहन का रिश्ता है.’’

‘‘आप को विश्वास नहीं हो रहा है तो नवीन भैया से पूछ लीजिए,’’ विकास बोला था.

दोनों पुलिस वालों ने नवीन को पैनी निगाहों से घूरा तो उस ने फौरन हकलाते हुए कहा, ‘‘हांहां, हम सब वहां भाईबहन की तरह प्यार से रहते हैं.’’

‘‘आप को परेशान किया इसलिए माफी चाहते हैं, मैडम,’’ लंबे कद के पुलिस वाले ने अर्चना से क्षमा मांगी और अपने साथी के साथ वहां से चला गया.

जहां वे बैठे थे वहां से सड़क नजर आती थी. वहां खड़ी एक सफेद रंग की कार में बैठे ड्राइवर ने अचानक जोरजोर से हार्न बजाना शुरू कर दिया.

‘‘मुझे वह बुला रहे हैं,’’ ऐसी सूचना दे कर अर्चना अचानक उठ खड़ी हुई.

‘‘कौन बुला रहा है?’’ नवीन ने चौंकते हुए पूछा.

‘‘थैंक यू, नवीन भैया, लंच और फिल्म दिखाने के लिए बहुतबहुत धन्यवाद,’’ उस के सवाल का कोई जवाब दिए बिना अर्चना उस सफेद कार की तरफ चल पड़ी.

‘‘नवीन भैया,’’ मनोज ने ये 2 शब्द मुंह से निकाले और अचानक ठहाका मार कर हंसने लगा.

‘‘सर, वैलकम टू दी अर्चना दीदी क्लब,’’ विकास ने भी अपने सहयोगी का हंसने में साथ दिया.

‘‘देखो, ये बात किसी को आफिस में मत बताना,’’ अपने गुस्से को पी कर नवीन ने उन दोनों से प्रार्थना की.

दोनों ने मुंह पर उंगली रख कर उन्हें अपने खामोश रहने के प्रति आश्वस्त किया, पर वे दोनों अपनी हंसी रोकने में असफल रहे.

नवीन ने जब कार के ड्राइवर को बाहर निकलते देखा तो जोर से चौंका. ड्राइवर वही बड़ीबड़ी मूंछों वाला शख्स था जिसे उन्होंने सिनेमा हाल के बाहर अर्चना को घूरते हुए देखा था और जो अंदर हाल में उस की बगल में बैठा था.

‘‘यह कौन है?’’ नवीन ने उलझन भरे स्वर में पूछा.

‘‘यह मेजर साहब हैं…अर्चना के पति,’’ विकास ने जवाब दिया.

‘‘पर…पर अर्चना ने मुझे सच क्यों नहीं बताया?’’

‘‘सर, हमें भी नहीं बताया था और हम बन गए अर्चना दीदी क्लब के पहले 2 सदस्य. अपने फौजी जवानों की मदद से…होटल व सिनेमा हाल के मालिक से उन की दोस्ती है और उन दोनों की मदद से मेजर साहब अपनी छुट्टियों में अर्चना दीदी को तंग करने वाले हमारेतुम्हारे जैसे किसी रोमियो को ‘अर्चना दीदी क्लब’ का सदस्य बनवा जाते हैं.’’

‘‘और ये दोनों पुलिस वाले नकली थे?’’

‘‘नहीं, सर, ये मिलिटरी पुलिस के लोग थे.’’

‘‘किसी को यों बेवकूफ बनाने का तरीका बिलकुल गलत है,’’ नवीन अपनी कमीज के टूटे बटनों को छू कर उस घटना को याद कर रहा था जब 2 युवकों ने, जो यकीनन फौजी सिपाही थे, उस पर हाथ उठाया था.

‘‘सर, आप के साथ जो गुस्ताखी हुई है, यह उस गुस्ताखी की सजा है जो आप ने यकीनन अर्चना दीदी के साथ की होगी. वैसे मेजर साहब दिल के अच्छे इनसान हैं और उन का एक संदेशा है आप के लिए.’’

‘‘क्या संदेशा है?’’

‘‘आर्मी क्लब में आप सपरिवार उन के डिनर पर मेहमान बन सकते हैं. आज वह दोनों पारिवारिक मित्र हैं और आप  चाहें तो उसी श्रेणी में शामिल हो सकते हैं.’’

‘‘सर, आप को क्लब जरूर आना चाहिए. अपनी भूल को सुधारने व क्षमा मांगने का यह अच्छा मौका साबित होगा,’’ बहुत देर से खामोश मनोज ने नवीन को सलाह दी.

कुछ पलों तक नवीन खामोश रह कर सोचविचार में डूबे रहे. फिर अचानक उन्होंने अपने कंधे उचकाए और मुसकरा पडे़.

‘‘दोस्तो, हम ‘अर्चना दीदी क्लब’ के सदस्यों को मिलजुल कर रहना ही चाहिए. मैं सपरिवार क्लब में पहुंचूंगा.’’

नवीन की इस घोषणा को सुन कर विकास और मनोज कुछ हैरान हुए और फिर उन तीनों के सम्मिलित ठहाके से पार्क का वह कोना गूंज उठा.