सरस सलिल विशेष

हमारे समाज में कुछ मर्द औरतों जैसे दिखते हैं. यहां तक कि वे अपनी खूबसूरती से बहुत सी औरतों को भी मात देते हैं. उन्हें अकसर ट्रांसजैंडर, लेडी बौय या टीगर्ल के नाम से पुकारा जाता है. ‘लेडी बौय’ ऐसे लड़के होते हैं, जो सैक्स बदलवा कर अपने बदन को एक खूबसूरत लड़की के रूप में ढलवा लेते हैं. इस की वजह यह है कि ऐसे लड़के जो लड़की बनना चाहते हैं, उन्हें हमारे समाज में अधूरा समझा जाता है. उन्हें नामर्द कह कर दुत्कारा जाता है. किसी भी ‘लेडी बौय’ की खूबसूरती, कामुकता और चंचलता के पीछे भी आधुनिक चिकित्सा का कमाल है. हार्मोन चिकित्सा उन में सैक्स बदलाव ही नहीं लाती, बल्कि भावनात्मक बदलाव भी लाती है. यही वजह है कि कई ‘लेडी बौय’ औरतों की तुलना में ज्यादा कमसिन होते हैं. कभीकभी तो ये आम औरतों को भी मात देते दिखते हैं.

कुछ ‘लेडी बौय’ तो मौडलिंग की दुनिया में बतौर नाम कमा रहे हैं. इन में कनाडा के ‘लेडी बौय’ जेना तालकोवा व फिलिपींस के गीना रोसेरा खास हैं. जब कोई जवान लड़का खुद को एक लड़की के रूप में महसूस करने लगता है, तो क्या होता है? यह एक गंभीर सवाल है और यही एहसास उसे ‘लेडी बौय’ बनने पर मजबूर कर देता है, क्योंकि उस का चालचलन व बरताव उस के मूल सैक्स से मेल नहीं खाता. असल में यह गलती कुदरत से होती है और भुगतनी पड़ती है एक बेकुसूर इनसान को. इस कुदरती गलती से छुटकारा पाने के लिए अकसर ट्रांसजैंडर अपने सैक्स को बदलवाना चाहते हैं और यही जरूरत उन्हें ‘लेडी बौय’ बना देती है.

मशहूर सुपरमौडल 30 साला जीना रुकेरो ने साल 2014 में पहली बार अपनी असली पहचान उजागर की थी कि वे एक ट्रांसजैंडर यानी ‘लेडी बौय’ हैं. उन्होंने पूरी दुनिया के सामने अपना राज उजागर करते हुए कहा था कि जन्म के समय वे एक लड़का थीं. कई सामाजिक वजह और अपने काम के चलते वे अपनी असली पहचान उजागर नहीं कर पाई थीं. वे अपना सैक्स बदलवा कर इस मुकाम पर पहुंची हैं. जीना रुकेरो को 15 साल की उम्र में उन के एक जानने वाले की मदद से एक ब्यूटी कौंटैस्ट में हिस्सा लेने के लिए राजी किया गया था. तब से उन की जिंदगी ही बदल गई. 19 साल की उम्र में उन्होंने थाईलैंड में अपना सैक्स बदलवाया था. इस के बाद उन्हें अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहने की इजाजत मिल गई. उन्होंने अपने सर्टिफिकेट में अपना नाम जीना रुकेरो के रूप में दर्ज करा लिया. उस के बाद उन्होंने मौडलिंग को अपना कैरियर चुना.

आज जीना रुकेरो जैंडर प्राउड और्गेनाइजेशन की वकील होने के साथसाथ ट्रांसजैंडरों के लिए काम करती हैं. 17 जून, 2015 को डैमोक्रैटिक राष्ट्रीय समिति की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन के काम को ले कर सम्मानित भी किया था.

ऐसे बदले सैक्स

भारत के अलगअलग अस्पतालों में सैक्स बदलवाने के तकरीबन सौ मामले आते हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट व किंग जौर्ज मैडिकल कालेज में हर साल सैक्स बदलवाने के तकरीबन आधा दर्जन केस आते हैं. ऐसे मामलों में औरत से मां बनने की चाह रखने वालों की तादाद बहुत कम होती है. ज्यादातर केस मर्द से औरत बनने वालों के होते हैं. एक डाक्टर के मुताबिक, औरत से मर्द बनने की प्रक्रिया आसान होती है, जबकि मर्द से औरत बनने की प्रक्रिया बहुत ही मुश्किल होती है. इस की वजह यह भी है कि हर मर्द में कुछ फीमेल हार्मोन पाए जाते हैं. मर्द से औरत बनाने का आपरेशन का पहला चरण आरकिएक्टौमी कहलाता है. इस में मर्द के अंग को हटाया जाता है. इस के बाद इलैक्ट्रालाइसिस से चेहरे व शरीर के दूसरे अंगों के बाल हटाए जाते हैं.

आपरेशन के आखिरी चरण को वैजाइना प्लास्टी कहते हैं. इस में मर्द के अंग की जगह औरत का अंग लगाया जाता है. इस आपरेशन में औसतन 6 घंटे का समय लगता है और कम से कम 6 दिन तक मरीज को अस्पताल में रहना पड़ता है. इस के बाद औरत बन चुके मर्द को घर पर ही रह कर 2-3 महीने तक बैड रैस्ट करने की सलाह दी जाती है. इसी दौरान हार्मोनल ट्रीटमैंट भी चालू रहता है. औरत के हार्मोन के असर से मर्द का बदन खूबसूरत बनना और जिस्मानी बदलाव होना शुरू हो जाता है. अब चर्चा करते हैं औरत से मर्द बनने की प्रक्रिया के बारे में. इस प्रक्रिया का पहला चरण मास्टेक्टौमी कहलाता है, जिस में औरत की छाती हटाई जाती है. दूसरा चरण हिस्ट्रेक्टौमी कहलाता है, जिस में औरत के अंग व दूसरे उपांगों को हटाया जाता है. तीसरा व आखिरी चरण फलोप्लास्टी कहलाता है. इस में मर्द के अंग व अंडकोशों को लगाया जाता है. माहिर डाक्टरों के मुताबिक, आपरेशन से ही सबकुछ नहीं बदल जाता. सैक्स बदलवाने वाले या वाली को अपने बरताव में भी बदलाव लाना पड़ता है. कुछ मामलों में तो जिंदगीभर दवाएं खानी पड़ती हैं. भारत में सैक्स बदलवाने वालों की तादाद बहुत कम है. इस के उलट थाईलैंड जैसे देशों में बहुत ज्यादा है, जहां सैक्स का कारोबार जोरों पर है. मलयेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर में तो हर महीने 10 से 20 तक सैक्स बदलवाने के आपरेशन होते हैं.