सरस सलिल विशेष

कभी सोचा है कि चाय का स्वाद ले कर खासा पैसा कमाया जा सकता है या परफ्यूम की खुशबू सूंघ कर कैरियर बनाया जा सकता है. पालतू जानवरों की ग्रूमिंग और पपेट्री में भी डिगरीडिप्लोमा हासिल किए जा सकते हैं. एक साइबर हैकर बनने के लिए भी डिप्लोमा कोर्स है. आजकल फ्यूनरल मैनेजमैंट से ले कर साइन लैंग्वेज तक के कोर्स कराए जा रहे हैं. सुनने में ये कोर्स भले ही अजीब लगते हों, लेकिन आज इन्हीं में कैरियर की बढ़ती मांग और पैसा है. यंग जैनरेशन के लिए लीक से हट कर ये कोर्स उन के कैरियर व समय को देखते हुए बैस्ट साबित हो रहे हैं.

एथिकल हैकिंग

हैकिंग ऐक्सपर्ट बन कर आप डिगरी और नौकरी दोनों पा सकते हैं. कई बड़ी कंपनियां एथिकल हैकर्स को सिक्योरिटी के लिए हायर करती हैं. एथिकल हैकर्स कंपनियों की आईटी इन्फौर्मेशन व डाटाबेस को सुरक्षित रखते हैं. सुरक्षा एजेंसियां हैकर्स द्वारा किसी अकाउंट को हैक करा कर गोपनीय जानकारियां इकट्ठा करती हैं. इस से उन्हें अपनी जांच को आगे बढ़ाने या सुबूत जुटाने में मदद मिलती है. इस सब को देखते हुए एथिकल हैंकिंग का कोर्स कैरियर के लिहाज से काफी अहम है.

हैकिंग द्वारा हैकर आप के कंप्यूटर या आप के संबंधित अकाउंट पर पूरी तरह से हावी हो जाता है. इस के बाद उसे आप के डाटा को चुराने या खत्म करने की आजादी मिल जाती है. वाईफाई इंटरनैट कनैक्शन से चलने वाले सिस्टम को हैक करना ज्यादा आसान होता है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर में घुसपैठ की बढ़ती समस्या से निबटने के लिए एथिकल हैकिंग का नया कोर्स कैरियर के लिए विकल्प के तौर पर बेहतरीन मौका बन कर सामने आया है.

साइबर क्राइम का बढ़ना : आज इस कोर्स की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि आएदिन साइबर क्राइम  होते रहते हैं. यह कोर्स नया है, इस के बारे में लोगों को कम जानकारी है. लेकिन इस के विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है. जैसेजैसे लोगों की निर्भरता इंटरनैट पर बढ़ती जा रही है, नैटवर्क सिक्योरिटी एक चुनौती बनती जा रही है. इस लिहाज से आने वाले दिनों में एथिकल हैकर्स की मांग उम्मीद से कहीं ज्यादा होगी. हर कंपनी अपने डाटा को सुरक्षित रखने या प्रतिद्वंद्वी कंपनी की रणनीति को समझने के लिए एथिकल हैकर्स रखने लगी है.

क्या है नया : एथिकल हैकिंग

कोर्स में इंटरनैट से संबंधित तमाम चीजों के बारे में सिखाया जाता है. इस से संबंधित कोर्स में सिक्योरिटी टैस्टिंग की कार्यप्रणाली, स्निफिंग, प्रीविलेज एस्कलेशन, हैकिंग, अटैकिंग नैटवर्क वर्क सिस्टम, हैकिंग वैब ऐप्लिकेशन, क्रौस साइट स्क्रिप्टिंग, ब्रेकिंग आईपी, सिस्टम हैकिंग, पासवर्ड क्रैकिंग आदि से संबंधित जानकारी दी जाती है.

स्पा मैनेजमैंट

जब से लोगों ने अपनी हैल्थ और फिटनैस पर ध्यान देना शुरू किया है, स्पा बिजनैस में काफी बूम आया है. अब थ्रीस्टार और फाइवस्टार हौस्पिटैलिटी के कई स्पा खुल गए हैं. लिहाजा, ऐक्सपर्ट स्पा मैनेजरों की मांग बढ़ गई है. इन का काम पूरे स्पा को बेहतर तरीके से संभालना होता है. एक स्पा मैनेजर को स्टाफ पर नजर रखने के अलावा और्डर की सप्लाई, क्लाइंट्स को अच्छी सर्विस देने व स्पा में अधिक से अधिक लोगों को सर्विस लेने के लिए आने को प्रोत्साहित करना होता है. इस के अलावा, वह स्पा के लिए कुछ मार्केटिंग ऐक्टिविटीज व मार्केटिंग प्लानिंग्स में भी हिस्सा लेता है.

स्किल्स : आप का कंप्यूटरसेवी होने के साथ स्ट्रौंग कम्युनिकेशन स्किल व इंटरपर्सनल स्किल भी बेहतर होनी चाहिए. इतना ही नहीं, आप को पूरे स्पा को मैनेज करना होता है, इसलिए आप के भीतर और्गनाइजेशन स्किल भी अच्छी होनी चाहिए. आप को न सिर्फ अपने यहां कार्यरत लोगों की क्षमताओं को पहचानना आना चाहिए, बल्कि उन की क्षमताओं के हिसाब से उन से बेहतर काम करवाना भी आना चाहिए.

संभावनाएं : एक स्पा मैनेजर पार्टटाइम, फुलटाइम या कौन्ट्रैक्ट के आधार पर भी काम कर सकता है. स्पा मैनेजर की आवश्यकता होटल, रिसौर्ट, हैल्थ क्लब, क्रूज शिप या चिकित्सकीय सैलून आदि में होती है. एक स्पा मैनेजर विदेशों में जौब के लिए भी अप्लाई कर सकता है.

फोटोनिक्स

फोटोनिक्स का कोर्स आम साइंस के कोर्सों से हट कर है. जब से टैली कम्युनिकेशन का क्षेत्र बढ़ा है तब से कंप्यूटिंग, सिक्योरिटी समेत और भी कई कार्यप्रणालियों में फोटोनिक्स मुख्य तकनीक बन गई है. इस तकनीक का इस्तेमाल इमेजिंग, चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवा, प्रतिरक्षा, औप्टिक्स व इलैक्ट्रौनिक्स, बायोटैक्नोलौजी,  चिकित्सा विज्ञान, सर्जरी, माइक्रोबायोलौजी और लाइफसाइंस में भी होता है.

कैसे मिलेगी ऐंट्री : देश के कई प्रमुख शिक्षण संस्थान फोटोनिक्स कोर्स की शिक्षा देते हैं. भौतिकी, रसायन और गणित विषय के साथ 12वीं की परीक्षा न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण कैंडिडेट्स फोटोनिक्स ऐंड औप्टोमेट्रिक्स के ग्रेजुएशन कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं.

इस के अलावा, आप डिप्लोमा कोर्स में भी एंट्री ले सकते हैं. डिप्लोमा कोर्स करने के बाद आप फोटोनिक्स टैक्नीशियन बन सकते हैं. वैसे द्विवर्षीय टैक्नीशियन प्रोग्राम के जरिए भी फोटोनिक्स टैक्नीशियन बना जा सकता है.

सरस सलिल विशेष

पर्सनल स्किल : यदि आप इस में कैरियर बनाना चाहते हैं तो जरूरी है कि इस क्षेत्र में होने वाली नईनई गतिविधियों पर सतत निगाह रखें और ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश करें. आप की फिजिक्स व मैथमेटिक्स अच्छी होनी चाहिए. इस में इंस्ट्रूमैंट डिजाइन करने पड़ते हैं, लिहाजा क्रिएटिव होना भी जरूरी है.

कहां है नौकरी : इस क्षेत्र के विशेषज्ञ साइंटिस्ट के तौर पर भी काम कर सकते हैं. उन्हें फोटोनिक्स पर शोध का काम करना होता है. फोटोनिक्स इंजीनियर चाहें तो किसी अनुभवी इंजीनियर के सहायक बतौर अपना कैरियर शुरू कर सकते हैं. योग्यता और अनुभव के आधार पर आप आगे चल कर रिसर्च डायरैक्टर या प्रिंसिपल इंजीनियर भी बन सकते हैं.

कहां से करें : इंडियन इंस्टिट्यूट औफ टैक्नोलौजी, मुंबई, नई दिल्ली, मणिपाल एकेडमी औफ हायर एजुकेशन, इंटरनैशनल स्कूल औफ फोटोनिक्स, कोचीन, सैंटर फौर एडवांस टैक्नोलौजी (केट), इंदौर, भाभा एटौमिक रिसर्च सैंटर, मुंबई, इंडियन इंस्टिट्यूट औफ साइंस, बेंगलुरु आदि संस्थानों से यह कोर्स किया जा सकता है.

पपेट्री

राजस्थान की लोककथाओं से निकल कर अब पपेट शो मौडर्न रंगढंग में रंग गए हैं. लगातार सरकारी उपेक्षा व उचित स्थान न मिलने के कारण यह कला धीरेधीरे लुप्त होने के कगार पर थी. लेकिन कई युवा थिएटर कलाकारों और कलाप्रेमियों ने इस कला को मौडर्न व एक कोर्स के रूप में शुरू करने का प्रयास किया है ताकि यह कला जिंदा रहे. इसे सीखने में सिर्फ उसी का मन रम सकता है जिस में क्रिएटिविटी हो और हर चीज को अलग नजरिए से देखता हो. किड्स इंटरटेनमैंट चैनलों और विज्ञापन एजेंसियों में इन की मांग हमेशा रहती है. लिज्जत पापड़ का वह खरगोश आज भी लोगों को याद है, वह पपेट का पहला विज्ञापन प्रयोग था.

कहां से करें : मुंबई यूनिवर्सिटी और कोलकाता पपेट थिएटर पपेट्री में सर्टिफिकेट कोर्स कराते हैं.

टी टेस्टिंग

अगर चाय पीने के शौकीन हैं तो टी टैस्टर बनना आप के लिए अच्छा कैरियर औप्शन हो सकता है. टी टैस्टर का काम अलगअलग चाय के स्वादों में अंतर समझना और टीलीफ, ग्रेड्स, कलर के बारे में जानकारी हासिल करना होता है. बेंगलुरू का इंडियन इंस्टिट्यूट औफ प्लांट मैनेजमैंट अपने सर्टिफिकेट कोर्स के जरिए टी मार्केटिंग, टी बिजनैस, टी टैस्टिंग तकनीक के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देता है और डिप्लोमा व डिगरी दोनों कोर्स कराता है. यह कोर्स टी बोर्ड और वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से कराया जाता है. असम का डिप्रास इंस्टिट्यूट औफ प्रोफैशनल्स भी डिगरीडिप्लोमा कोर्स कराता है.

इमेज कंसल्टिंग

आप को ग्लैमर इंडस्ट्री के प्रति लगाव है तो इमेज कंसल्टैंट के तौर पर अपना कैरियर बना सकते हैं. फैशन और कम्युनिकेशन डिगरी से मिलतेजुलते इस सर्टिफिकेट कोर्स के जरिए आप को कौर्पोरेट और फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी आसानी से हाईप्रोफाइल जौब मिल सकता है. इस कोर्स में आप को इमेज, स्टाइल, एटिकेट, कंडक्ट, लैंग्वेज और बिहेवियर जैसे जरूरी टौपिक्स के बारे में ट्रेनिंग दी जाती है और फिर आप टौप पर्सनैलिटीज की इमेज बनाने में उन की मदद करते हैं.

पैट ग्रूमिंग

आप पैसा कमाने के साथ यदि जानवरों के साथ भी कुछ वक्त बिताना चाहते हैं तो पैट ग्रूमिंग में कैरियर बना सकते हैं. आजकल लोग अपने पालतू जानवरों की देखभाल के पीछे काफी पैसा खर्च करने को तैयार हैं. लोग ऐसे प्रोफैशनल्स की तलाश में रहते हैं जो उन के पैट्स को अच्छी तरह से शेप में रखें. साथ ही, पैट शोज और कंपीटिशंस भी काफी बढ़ गए हैं, इस को देखते हुए भी पैट ग्रूमर्स की डिमांड बढ़ गई है. यही वजह है कि कई वेटेरिनरी कालेज और टौप ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट में इस के डिगरी कोर्सेज उपलब्ध हैं.

म्यूजिओलौजी

जिन की रुचि हिस्ट्री में है या जिन का दिमाग हमेशा एंटीक चीजों की तलाश व जानकारी जुटाने में लगा रहता है, म्यूजिओलौजी स्टडी उन के कैरियर के लिए बहुत अच्छा कदम साबित होगी. इस में आर्कियोलौजी, म्यूजियम मैनेजमैंट ऐंड कल्चर की जानकारी दी जाती है. नैशनल म्यूजियम इंस्टिट्यूट औफ हिस्ट्री ऐंड आर्ट, कन्वर्सेशन ऐंड म्यूजिओलौजी, नई दिल्ली कई कोर्स चलाते हैं. कोलकाता यूनिवर्सिटी भी एमए और एमएससी की डिगरी देती है.

बैचलर औफ रूरल स्टडी

भारत की आधी से ज्यादा आबादी जहां रहती है और आप उस से प्यार करते हैं तो बैचलर औफ रूरल स्टडी का कोर्स आप के लिए सब से अच्छा साबित होगा. इस कोर्स में एग्रीकल्चर, चाइल्ड डैवलपमैंट, रूरल मैनेजमैंट, कम्युनिटी डैवलपमैंट आदि विषय शामिल रहते हैं. गुजरात, उत्तर प्रदेश के कालेज डिप्लोमा कोर्स कराते हैं. भावनगर, यूनिवर्सिटी रूरल स्टडी में बैचलर और मास्टर डिगरी भी देती है.

जेरैंटोलौजी

उम्र बढ़ने पर साइकोलौजिकल और बायोलौजिकल क्या प्रभाव होते हैं, जेरैंटोलौजी में इस का अध्ययन किया जाता है. कई ओल्डएज होम और प्राइवेट व सरकारी हैल्थ सैक्टर्स में ऐसे पेशेवरों की मांग रहती है. आज कई ऐसे नर्गिंसहोम और हौस्पिटल हैं जो बुजुर्ग के इलाज और केयर के लिए जेरैंटोलौजी में डिगरी लेने वाले की तलाश में रहते हैं. इंस्टिट्यूट औफ होम इकोनौमिक्स नई दिल्ली, राम नारायण रुइया कालेज मुंबई, कोलकाता मैट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट औफ जेरैंटोलौजी में डिगरी और सर्टिफिकेट कोर्स करवाते हैं.