समाज बाहर से रंगरूप और बोलचाल में भले ही आधुनिक शैली का दिखता हो लेकिन विचारधारा के स्तर पर यह आज भी दकियानूसी, जातिवादी और धर्मांध बना हुआ है. सरकारी सोसाइटीज का हाल तो और भी बुरा है.