मानसिक रूप से विकलांग बच्चे अगर प्यारभरी परवरिश और सामाजिक अपनत्व के साथ पलेबढ़ें तो वे भी सामान्य लोगों की तरह जिंदगी में सकारात्मक व उपलब्धिभरे काम कर सकते हैं.