विदेश में पढ़ाई करने का चलन पुराना है, लेकिन बढ़ते खर्च, काउंसलिंग का कन्फ्यूजन और विदेशी शैक्षणिक संस्थानों की गिरतीउठती साख जैसे कई फैक्टर्स ने अब सारा परिदृश्य बदल दिया है.