अकूत संपत्ति के मालिक संत भय्यूजी महाराज यों तो अपने अनुयायियों को धर्म की राह दिखा कर, जिंदादिली से जीवन की मुश्किलों का सामना करने का पाठ पढ़ाते रहे लेकिन खुद पर मुश्किलें आन पड़ीं तो पलायनवादी होते हुए खुदकुशी कर ली.