सरस सलिल विशेष

राजस्थान में पिछले दिनों औरतों को ले कर एक नए तरह का खौफ समाज को जकड़े रहा. इस डर से घबराई औरतों ने तथाकथित तौर पर खुद ही अपने बाल काटने शुरू कर दिए, बाजुओं पर लहसुन की गांठें बांध लीं, घर के बाहर दरवाजे के दोनों ओर गोबर, सिंदूर और रोली के हाथ बनाए गए. हालात ये रहे कि गांव में अगर कोई भीख मांगने वाला भी आ जाता, तो कुहराम मच जाता. छोटे लैवल के साधुबाबाओं की तो जैसे शामत ही आ गई. भगवा धारण किए हर किसी शख्स को शक की निगाह से देखा जाने लगा. यहां तक कि उन को दान में अनाज, रोटी और पुराने कपड़े भी देने से परहेज किया गया. बच्चियों को स्कूल जाने से रोका जाने लगा.

खौफ इतना बढ़ गया कि शाम को औरतों का अकेले घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया. आदिवासी जिले बांसवाड़ा से शुरू हुई इस अफवाह ने देखते ही देखते अजमेर, चित्तौड़गढ़, सीकर, नागौर, चुरू, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर के बाद जयपुर समेत बड़े शहरों के साथ तकरीबन पूरे प्रदेश में अपनी जड़ें जमा लीं.

मानसिक तनाव का आलम यह रहा कि औरतें खुद अपने बाल काटने के बाद बेहोश हो जातीं और जब होश में आतीं, तब तक उन की याददाश्त से यह सब गायब हो जाता.

सोशल मीडिया के साथसाथ प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया ने इस अफवाह को बढ़ाने में आग में घी का काम किया. सोशल साइटों के तमाम जरीयों से लोग इस अफवाह के शिकार होते देखे गए. कई जगह पढ़ेलिखे लोग भी इस तरह की अफवाह को आगे बढ़ाते रहे.

आईटी ऐक्सपर्ट दिलीप सोनी कहते हैं कि इस तरह की तसवीरें फोटोशौप कर एकदूसरे को भेजी गईं, जिस की जानकारी आसानी से जुटाई जा सकती है. यहां तक कि अफवाह फैलाने वाले तक भी पहुंचा जा सकता है.

हालांकि, सरकार की तरफ से इन अफवाहों को काबू में करने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.

डाक्टर भी अंधविश्वासी

 औरतों के बाल काटने की अफवाह की शिकार एक औरत का इलाज कराने उस के परिवार वाले बाड़मेर के सरकारी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल में डाक्टर सुरेंद्र बाहरी ने अंधविश्वास की हदें ही पार कर दीं.

डाक्टर ने उस औरत को होश में लाने के लिए पहले अगरबत्ती से पूजा की. इस के बाद भी जब उसे होश नहीं आया, तो डाक्टर ने उसे थप्पड़ जड़ दिए. डाक्टर के इस इलाज का वीडियो वायरल हो गया.

जब इस मामले में डाक्टर से बात की गई, तो उन का कहना था कि महिला का इलाज करते समय उन का भी सिर भारी हो गया था.

दरअसल, बाड़मेर व दूसरे कई जिलों में बीते कई दिनों से औरतों के बाल काटने की शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही थीं.

अफवाह का आलम यह था कि बाड़मेर के एसपी गगनदीप सिंगला को सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील जारी करनी पड़ी थी.

वहीं बाड़मेर शहर के नजदीक महाबार गांव के लोगों का कहना था कि भारी बारिश के चलते गांव में बीते कई दिनों से बिजली नहीं थी. इस दौरान अंधेरे का फायदा उठा कर औरतों के बाल काटे जा रहे थे.

प्रशासन में भी डर

राजस्थान में बाल काटे जाने जैसी जादूटोने की अफवाहों से प्रदेश का प्रशासन भी डर का शिकार होता नजर आया. इसी बीच 5 जुलाई, 2017 से राजधानी जयपुर में सरकारी अफसरों को डायन प्रताड़ना निवारण और नियम के तहत खास ट्रेनिंग दी गई.

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जयपुर जिले के कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि यह खास ट्रेनिंग नई दिल्ली की पीएलडी संस्था द्वारा दी गई. इस में डायन प्रताड़ना निवारण 2015 और नियम 2016 के तहत जिलास्तरीय एकदिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा गया, जो जयपुर में कलक्ट्रेट सभागार में कराया गया.

ऐसे सामने आया सच

 औरतों की चोटी कटने की मारवाड़ से शुरू हुई अफवाह राजधानी जयपुर तक भी आ पहुंची. सांगानेर इलाके में 14 जुलाई, 2017 को ऐसी 3 घटनाएं सामने आईं, लेकिन हाथोंहाथ सच खुल भी गया. एक मामले में घटना वाली जगह पर लगे कैमरे से पता चला कि औरत पहले खुद ही चोटी काट कर फेंक गई, फिर आधा घंटे बाद लौट कर चोटी कटने का दिखावा किया और हंगामा करने लगी.

पुलिस का मानना है कि दूसरी घटनाओं में भी ऐसा ही हुआ होगा. पुलिस के मुताबिक, सांगानेर इलाके में पिछले दिनों एक रिसोर्ट में मजदूरी कर रही औरत ने यह कह कर हंगामा खड़ा कर दिया कि जानवर जैसे दिखने वाले किसी आदमी ने उस की चोटी काट दी. इस पर वहां भीड़ जुट गई. पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो उस औरत का झूठ पकड़ा गया.

कैमरे में साफ नजर आ गया कि वह औरत पास में एक कमरे में गई थी. वहां 2 मिनट ठहरी, फिर तकरीबन 4 बजे निकली और खुद ही बाल गिरा कर चल दी. इस के बाद तकरीबन साढ़े 4 बजे लौटी और उस जगह पहुंचते ही गिरने का नाटक करने लगी और हाथ में लाई पानी की बालटी फेंक दी.

इस मामले में पुलिस अब उस औरत के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगी. साथ ही, ऐसी दूसरी घटनाओं की तह तक जाएगी और अफवाह साबित कर सच जनता के सामने रखेगी.

उधर, जयपुर के ही शिकारपुरा रोड पर जोतड़ावाला में बाबाजी की ढाणी में भी एक औरत ने अपनी चोटी कटने की शिकायत की.

उस औरत का कहना था कि वह बाड़े में मवेशियों को चारा डाल रही थी, तभी किसी ने उस की चोटी काट दी. हालांकि घर में किसी बाहरी आदमी के घुसने की तसदीक नहीं हुई.

त्रिशूल का निशान

 14 जुलाई, 2017 को बीकानेर की 4 औरतों ने बाल कटने का दावा किया. इन में से 2 औरतों ने शरीर पर त्रिशूल बनाने की भी बात कही. उन औरतों को सरकारी अस्पताल में भरती कराया गया. जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने खुद नाखूनों से पेट पर त्रिशूल का निशान बनाया था. दोनों की जांच रिपोर्ट भी सामान्य आई थी.

बीकानेर में देव गैस गोदाम के पास रहने वाली एक औरत नर्बदा देवी अपने परिवार वालों के साथ सुबह 6 बजे सरकारी अस्पताल पहुंची और बाल काटने, पेट पर त्रिशूल बनाए जाने और इस के बाद बेहोशी आने की शिकायत की. डाक्टरों की जांच में उस की भी रिपोर्ट सामान्य आई.

बातचीत में सामने आया कि उस औरत ने खुद ही नाखूनों से पेट पर त्रिशूल का निशान बना लिया था.

क्या है सच

 निवाई कसबे में ऐसी 6 औरतों से बात की गई, जिन का दावा था कि किसी अनदेखी ताकत ने उन के बाल काट लिए.

खातोलाई के जोगियों के महल्ला की रहने वाली सुमन योगी के साथ 12 जुलाई, 2017 को एक घटना घटी थी. परिवार वाले अब झाड़फूंक से उस का इलाज करवा रहे हैं.

जब इस घटना के बारे में उस से पूछा गया, तो सुमन ने रुकरुक कर पूरी बात बताई, जैसे याद करने में उसे दिक्कत आ रही हो.

जब उस से यह सवाल पूछा गया कि कहीं बाल खुद तो नहीं काट लिए, तो जवाब में वह गुस्से में एक सांस में कह गई कि अपने बाल कोई खुद भी काट सकता है क्या?

भाबरू इलाके की हंसा, बियावास की रेखा और मंजू के बाल कट गए हैं, लेकिन कैसे कटे और किस ने काटे, यह बात वे नहीं बता सकीं. सभी का यही कहना था कि घटना के समय वे बेहोश हो गई थीं.

कोटपुतली में 13 जुलाई, 2017 को 2 ऐसी औरतों को बीडीएम अस्पताल में भरती कराया गया था, जिन का दावा था कि किसी ने उन के बाल काट लिए.

बेरी की एक विवाहिता व कांसली की एक 17 साला लड़की के बाल कटने पर उन्हें बीडीएम अस्पताल में भरती कराया गया था. उन के परिवार वालों का कहना था कि दोनों केसों में किसी अनदेखी ताकत ने उन के बाल काट लिए.

जांच करने वाले डाक्टरों का कहना था कि अगर ये औरतें सच बोल रही होतीं, तो घटना के बाद सदमे की वजह से ब्लड प्रैशर असामान्य रूप से बढ़ जाता, लेकिन दोनों ही जिस्मानी रूप से पूरी तरह सेहतमंद थीं. जांच के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई.

चौमू के गोविंदगढ़ में 9 जुलाई, 2017 को बाल काटने की 3 घटनाएं सामने आई थीं. अब पुलिस ने इन तीनों में खुलासा किया है कि वे शिकायतें झूठी निकली थीं.

गोविंदगढ़ के डीएसपी महावीर चोटिया ने बताया था कि तीनों ही मामलों में मुराद पूरी होने के लिए बाल काटे गए. बाद में अफवाह का सहारा लेते हुए झूठी कहानी बना दी गई.

सोशल मीडिया पर भेजे जा रहे तांत्रिकों के फोटो का सच जानने के लिए आईटी ऐक्सपर्ट आरके लदाना से राय लेते हुए फोटो दिखाया गया, तो उन्होंने उन फोटो को इंटरनैट से लिया गया बताया और कहा कि इन्हें फोटोशौप में ऐडिट किया गया है.

मन का वहम

करौली के जिला सीजेएम रामपाल जाट ने इस तरह की घटनाओं के बारे में सोशल मीडिया पर खास संदेश जारी किया, ताकि इस तरह की अफवाहों से आम जनता भी अपना बचाव कर सके.

रामपाल जाट का कहना है कि यह सब मन का वहम है. इस को इतना तूल मत दो. हां, बाल भी कट सकते हैं. ऐसे दौरे भी पड़ सकते हैं. पर कोई दूसरा आ कर ऐसा कर के चला जाए, वह भी कोई अनदेखी ताकत, ऐसा मुमकिन नहीं है.

अगर इस बारे में गंभीरता से सोचा जाएगा, तो कई राज सामने आएंगे. अगर कोई अनदेखी ताकत या तांत्रिक ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहा है, तो वह पूरे गांव के एक या 2 घरों में ही ऐसा क्यों करेगा, बल्कि वह तो पूरे गांव की हर औरत के बाल एक ही रात में काट सकता है, क्योंकि उस के पास तो ताकत है.

हिस्टीरिया है वजह

 चाकसू सैटेलाइट अस्पताल के सीनियर डाक्टर सतीश कुमार सेहरा बताते हैं कि किसी पढ़ेलिखे परिवार के साथ अभी तक ऐसी घटनाएं नहीं हुईं. ये घटनाएं उन्हीं औरतों के साथ हुई हैं, जिन को हिस्टीरिया जैसे दौरे पड़ते हैं या वे किसी मानसिक तनाव से पीडि़त हैं या साधुबाबाओं के चक्कर में रहती हैं या फिर वे मानसिक रूप से बीमार हैं.

सरस सलिल विशेष

जिन के भी साथ ऐसा हादसा हुआ है, उन को किसी न किसी तरह का तनाव जरूर है. कभीकभी रात को सोते हुए अपने खुद के सीने पर हाथ आ जाता है और हम बड़बड़ाने लगते हैं. कभीकभी हम खुद भी ऐसा महसूस करते हैं, जैसे हमारे ऊपर कोई बैठ गया है. एकदम से दम घुटने लगता है और हम बेचैन हो जाते हैं.

सौ में से एक इनसान ऐसा होता है, जिस को नींद में चलने की बीमारी होती है. वह गहरी नींद में उठ जाता है और दिन में कुछ सोच रखा होता है, वही काम करने की फिराक में बाहर निकल जाता है. ऐसे में कोई ठोकर लगने पर वह जाग जाता है और वापस आ कर सो जाता है.

जागरण या नवरात्र के प्रोग्राम आप ने देखे होंगे. उन में जब कालिका का भजन या गाना आता है, तो वहां बैठी 20 से 40 औरतें एकसाथ जोरजोर की आवाजें निकालती हैं. इसे ‘मास हिस्टीरिया’ कहते हैं. यह एक तरह की बीमारी है और यह अफवाहों से भी फैलती है. दिमागी बीमार आदमी के ऊपर इस का सौ फीसदी असर पड़ता है.

जहर देने वाला गिरोह

 यह खबर सब से पहले नागौर जिले से मिली थी और आग की तरह पूरे राजस्थान में फैल गई. खबर यों फैली कि एक औरत हवा में आती है और लोगों के बाल काटती है. इस के बाद बिल्ली, मक्खी, चूहा कुछ भी बन कर हवा में ही गायब हो जाता है. लेकिन यह महज एक कोरा अंधविश्वास है.

सोशल मीडिया पर इस की काफी चर्चा हो रही है और कई फोटो भी सामने आए हैं. लोगों में फैले डर को देख कर जब पुलिस ने कार्यवाही की, तब पता चला कि यह कुछ लोगों का गिरोह है, जो लोगों को रात में अकेला देख कर उन के बाल काटता है और उन को ऐसी जहरीली चीज सुंघाता है, जिस से वे बेहोशी की हालत में आ जाते हैं और धीरेधीरे नशीली चीज के असर से 2-3 दिन में मर जाते हैं.

यह जानकारी पुलिस को उस गिरोह के पकड़े गए 2 लोगों ने बताई. गिरफ्त में आए उन लोगों ने पुलिस को बताया कि वे यह सब लोगों में डर फैलाने के लिए कर रहे हैं और लोगों के बाल तो सिर्फ उन को डराने के लिए काटते हैं, बाकी सारा काम वह जहरीली चीज करती है.

सच नहीं, कोरी अफवाह

बाल कटने की बढ़ती अफवाह के मद्देनजर एडीजी (ला एंड और्डर) एनआर रेड्डी ने आदेश जारी किया. इस में कहा गया कि अफवाह की सूचना पर एसपी या एडिशनल एसपी मौके पर जाएं और सच का पता लगा कर लोगों को समझाएं.

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा का भी यही कहना है कि कोई गिरोह अफवाह फैला कर अंधविश्वास को बढ़ावा देना चाह रहा है. हम इस के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर रहे हैं.