सरस सलिल विशेष

उत्तराखंड के पर्यटकस्थल मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है. यहीं केंप्टीफाल रोड पर स्थित है सन 1959 में स्थापित ऐतिहासिक लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए), जहां सिविल सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है. साल में एक बार आयोजित होने वाले यहां के समारोह में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि होते हैं.

अक्तूबर, 2016 के अंतिम सप्ताह की एक दिलकश सुबह को हौस्टल के अपने कमरे में बैठी खूबसूरत और आकर्षक व्यक्तित्व की वारिस आईएएस टीना डाबी किसी सोच में गुम थीं कि उन के कानों में चिरपरिचित मीठी आवाज गूंजी, ‘‘हैलो टीना, क्या सोच रही हो?’’

‘‘ओह अतहर, बस ऐसे ही कुछ सोच रही थी.’’ टीना ने टालने वाले अंदाज में कहा तो अतहर ने नजदीक आ कर पूछा, ‘‘आखिर ऐसे ही क्या सोच रही थी?’’

‘‘यही कि तुम ने मेरे दिल में कितनी जल्दी जगह बना ली, यू आर लविंग परसन.’’

‘‘मुझे तो शायद वक्त लगा, लेकिन तुम ने तो पहली नजर में ही यह काम कर लिया था.’’

‘‘लेकिन सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी हम अपनी जिंदगी का अहम फैसला ले लेंगे.’’

‘‘एक बात कहूं टीना?’’

‘‘यस.’’

अतहर ने टीना की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘जब हम किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहते हैं तो पूरी कायनात उसे पूरा करने में लग जाती है. मेरे प्यार का मसला भी कुछ ऐसा ही रहा.’’

उस की बात पर टीना ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘रियली, तुम्हारी ऐसी बातें ही मुझे करीब ले आईं. तुम सचमुच परफैक्ट इंसान हो.’’

‘‘शायद तुम से मिलने के बाद ऐसा हो गया हूं.’’

‘‘ओके.’’

‘‘प्लीज कम, क्लास चलते हैं.’’ अतहर ने कहा.

इस के बाद दोनों रूटीन क्लास के लिए चले गए. प्रतिदिन सुबह पीटी, जिम और योगा के बाद प्रशासनिक पढ़ाई होती है. टीना डाबी और अतहर आमिर उल शफी खान आईएएस टौपर थे. दोनों साथ ही प्रशासनिक प्रशिक्षण ले रहे थे. उन का ताल्लुक वैसे तो अलगअलग जातिधर्म से था, उन के घरों के बीच भी मीलों का फासला था, लेकिन चंद महीने में ही वे एकदूसरे के दिलों के करीब आ गए थे.

उन की धड़कनें एक ही तराना गुनगुनाने लगी थीं तो उन्होंने दिल के इस रिश्ते को छिपाया भी नहीं. इस के बाद वे सुर्खियों में आ गए. उन की मोहब्बत और इरादों से वक्त के साथ हर कोई वाकिफ हो चला था. उन की मोहब्बत परवान चढ़ रही थी. ये ऐसे लमहे होते हैं, जिन्हें हर कोई जीने के साथ यादों के महल में हमेशा के लिए करीने से सजा लेना चाहता है.

सरस सलिल विशेष

वक्त रफ्तारफ्ता बीत रहा था. उन की इस मोहब्बत से पहले चंद लोग ही वाकिफ थे, लेकिन 9 नवंबर को सोशल मीडिया के जरिए टीना ने यह बात जमाने के सामने जाहिर कर दी थी. अतहर और टीना ने प्यार को मंजिल दे कर एकदूसरे को हमसफर बनाने का फैसला कर लिया, क्योंकि उन के इस फैसले से उन के घर वालों को कोई ऐतराज नहीं था.

उन की मोहब्बत का किस्सा जगजाहिर हुआ तो उन्हें जैसे एक अनचाहे तूफान से रूबरू होना पड़ा. प्यार का कोई मजहब नहीं होता. चर्चित आईएएस जोड़ी ने भी प्यार करते वक्त मजहब नहीं देखा. लेकिन उन के इस फैसले से धर्म के ठेकेदारों को ऐतराज हो गया. उन्होंने लव जिहाद से जोड़ कर इसे मजहबी रंग दे दिया.

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर चल निकला. एक संगठन ने तो टीना के घर वालों को पत्र लिख कर टीना को समझाने और धर्म न बदलने की सलाह तक दे डाली. शादी रोकने या फिर अतहर को हिंदू धर्म अपनाने की बात कही. इस सब से दोनों आहत हुए. प्यार जिंदगी के किसी मोड़ पर कब किसे किस से हो जाए, इस बात को कोई नहीं जानता.

टीना और अतहर के मामले में भी ऐसा ही था, क्योंकि जो जिंदगी का बड़ा फैसला कर रहे थे, वे कुछ महीने पहले तक एकदूसरे को बिलकुल नहीं जानते थे. टीना का संबंध एक आर्थिक रूप से संपन्न दलित परिवार से है. उन के पिता जसवंत डाबी और मां हिमानी टेलीकौम डिपार्टमेंट में इंजीनियर थे. उन का परिवार पहले भोपाल में रहा, उस के बाद करीब 10 साल पहले दिल्ली की बीएसएनएल कालोनी में आ कर शिफ्ट हो गया था.

उस समय टीना सातवीं में पढ़ रही थी. कौन्वेंट औफ जीसस एंड मैरी स्कूल में उन की पढ़ाई हुई. हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में वह टौपर रहीं. सन 2014 में राजधानी दिल्ली के सब से अच्छे कालेज माने जाने वाले लेडी श्रीराम कालेज से उन्होंने ग्रैजुएशन किया. पढ़ाई में अव्वल रहने वाली टीना को स्टूडेंट औफ द ईयर भी घोषित किया गया था.

पौलिटिकल साइंस उन का पसंदीदा विषय था. उन के परिवार में मातापिता के अलावा एक बहन रिया थी. इंजीनियर दंपति टीना को सफलता की बुलंदियों पर देखना चाहता था. हिमानी ने बेटी से सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने को कहा. वह पढ़ने में होशियार थी ही, इसलिए इस सपने को साकार करने की ठान ली.

टीना की मां ने बेटी की पढ़ाई के लिए नौकरी छोड़ने का मन बना कर घर वालों की सलाह पर रिटायरमेंट ले लिया. उन्हें बेटी पर पूरा भरोसा था. उस ने जुनून के साथ पढ़ाई कर के यूपीएससी की परीक्षा दी. 10 मई, 2016 को परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिस में कुल 1078 परीक्षार्थी पास हुए. इन सब से खुशनसीब 0256747 रोल नंबर वाली 22 साल की टीना रहीं, जिस ने कम उम्र में ही पहली पोजीशन हासिल कर ली थी. यह कोई मामूली बात नहीं थी. आईएएस की परीक्षा भारत की सब से कठिन परीक्षा मानी जाती है. उस से भी बड़ी बात यह थी कि यह टीना का पहला प्रयास था.

टीना की यह सफलता कोई किस्मत का खेल नहीं थी, इस के लिए उन्होंने शुरू से ही मेहनत की थी. यह उस सपने का फल था, जिस के लिए वह प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ती थी. टीना के साथ दिल का रिश्ता जोड़ने वाले आमिर जम्मूकश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले थे. उन के पिता मोहम्मद शफी खान गवर्नमेंट हायर सैकेंडरी स्कूल में अध्यापक और मां ताहिरा गृहिणी थीं.

परिवार में अतहर से छोटा एक भाई और 2 बहनें भी थीं. शफी खान चूंकि खुद शिक्षक थे, इसलिए उन्होंने बच्चों की शिक्षा को भी खास महत्त्व दिया. उन के बडे़ बेटे अतहर ने यूपीएससी परीक्षा में दूसरी पोजीशन हासिल की थी. वह आतंकवाद का दंश झेल रहे कश्मीर से एक मिसाल बन कर निकले कि वहां के नौजवान शिक्षा से भी बड़ा लगाव रखते हैं.

मृदुभाषी अतहर का व्यक्तित्व आकर्षित करने वाला था. टीना के साथ उन के प्यार का सफर भी कुछ अलग रहा. 11 मई को दिल्ली के नौर्थ ब्लौक के डिपार्टमेंट औफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग औफिस में आयोजित एक सम्मान समारोह में दोनों की मुलाकात सुबह के समय हुई थी. मुलाकात भले ही साधारण थी, लेकिन अतहर के लिए बेहद खास थी.

इसी पहली मुलाकात में टीना को देख कर उन के दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं. वह टीना को अपना दिल दे बैठे थे. उन्हें इस बात का भी मलाल नहीं था कि टीना मेरिट में उन से एक कदम आगे हो कर बाजी मार ले गई थी. वह एकतरफा प्यार का शिकार हो गए थे. कहते हैं, पहली नजर का प्यार बहुत गहरा होता है. अतहर ने कभी सोचा भी नहीं था कि टीना की तरफ वह इस तरह आकर्षित हो जाएंगे.

शाम होतेहोते वह टीना के घर जा पहुंचे. हालांकि बहाना उस के परिवार वालों से मिलने का था, लेकिन दिल का राज कुछ और ही था. दिल के हाथों मजबूर हो कर टीना की चाहत उन्हें उन के दरवाजे तक खींच ले गई थी. उसी दिन दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता बन गया था. कुछ दिनों बाद दोनों प्रशिक्षण के लिए अकादमी चले गए.

अतहर ने टीना का हर तरह से खयाल रखना शुरू कर दिया. वह अपने दिल की बात टीना से खुल कर कह देना चाहते थे, लेकिन कभी हिम्मत नहीं कर पाए. टीना नादान नहीं थी. वह अतहर के जरूरत से ज्यादा लगाव रखने का मतलब समझ रही थी. वह भी अतहर के व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी थी. इस तरह अतहर ने टीना के दिल में जगह बना ली थी.

जज्बातों को दिल में कैद रखना कोई आसान नहीं होता. अतहर ने अपने दोस्तों के सामने यह राज उजागर किया कि वह टीना से प्यार करते हैं. यह बात टीना को पता चल गई थी, लेकिन वह खामोश ही रहीं. आखिर अतहर ने अपने दिल की बात कहने का फैसला किया और अगस्त, 2016 में दोनों जयपुर गए थे तो अतहर ने अपने दिल की बात टीना से कह दी.

टीना ने इस के लिए वक्त मांगा. शायद वह उसे अच्छी तरह से समझ लेना चाहती थी. दोनों की सोच एक थी और आदतें भी. वक्त के साथ अतहर से रैंक में जीतने वाली टीना दिल से हार गई. पहली नजर से शुरू हुआ प्यार आईएएस अकादमी जा कर परवान चढ़ा. दोनों का वक्त रोज साथसाथ बीतने लगा. उन्होंने प्यार को पंख दे कर जिंदगी भर साथ निभाने का वादा कर लिया. उन्होंने अपने प्यार को छिपाया नहीं और घर वालों के सामने अपने इरादे जाहिर कर दिए. उन के घर वाले मिले और टीना और अतहर की खुशियों पर अपनी रजामंदी की मोहर लगा दी. एक दलित लड़की का मुसलिम लड़के से प्यार जमाने के सामने आया तो सुर्खियां बन गया. प्यार को धर्म की बंदिशों के बीच उलझाने की कोशिश शुरू हो गई. धर्म और जाति को ले कर पहले से ही बड़ी खाईं है. जाति के भीतर भी कई गोत्र होते हैं, लेकिन टीना और अतहर ने इन बंदिशों को तोड़ दिया. अलगअलग जातिधर्म के होने के बावजूद दोनों के घर वाले उन के इस नए रिश्ते से खुश हैं. सगाई के बाद अगले साल वे विवाह करने वाले हैं. टीना का कहना है कि दूसरी जाति और धर्म के लड़के से प्यार कर के उस ने कोई गुनाह नहीं किया है. यह उस की जिंदगी का फैसला है, जिसे किसी के सामने कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है. वह अपनी पसंद पर खुश है, उस के मातापिता खुश हैं, लेकिन कुछ आपत्तिजनक कमेंट्स से वह डिस्टर्ब जरूर है. पर सार्वजनिक जीवन में रहने की कुछ कीमत तो चुकानी ही पड़ती है.

अतहर का कहना है कि उस के लिए यह खुशी की बात है कि दोनों एकदूसरे को अच्छी तरह जानतेसमझते हैं. वह टीना को देखते ही उस पर फिदा हो गया था. उसे टीना की मुसकराहट, हर किसी के बारे में अच्छी सोच, खयालात और बातचीत करने का अंदाज बहुत पसंद है. धर्म का इस्तेमाल इंसानों को जोड़ने के लिए किया जाना चाहिए न कि तोड़ने के लिए. इंसान को उस की अच्छाइयों से पहचाना जाना चाहिए न कि उस की जाति या धर्म से.

– कथा पात्रों से बातचीत पर आधारित