सरस सलिल विशेष

19 सितंबर, 2015 को जनता की जागरूकता के चलते जयपुर के प्रताप नगर की हल्दीघाटी कालोनी में रहने वाली गरिमा का 9 महीने का बेटा मयंक एक ओझा की काली करतूत का शिकार होने से समय रहते बचा लिया गया.

मयंक का अपहरण उसी की सगी बूआ सावित्री ने किया था, जो बेऔलाद थी. वह एक ओझा से अपना इलाज करा रही थी.

यह महज एक घटना नहीं है. साल 2014 में शीतल का केस अजमेर से जयपुर आया था. वह दिमागी तौर पर बीमार थी. उस समय इलाज अजमेर में ही ‘दरगाह मुर्रान वाले बाबा’ कर रहे थे. शीतल घर पर अजीबो गरीब हरकतें करती थी, मगर जैसे ही बाबा के पास जाती थी, ठीक हो जाती थी.

शीतल के माता पिता बाबा से इलाज तो करा रहे थे, पर सिलसिला बढ़ता देख कर जयपुर भागे. जब शीतल को काउंसलर के सामने बैठाया गया, तो ‘हकीकतेइश्क’ बयान हो गया.

‘दरगाह मुर्रान वाले बाबा’ जवान थे और शीतल उन के प्यार में फंस चुकी थी, पर घर  वालों को कैसे बताए, इसलिए भूतों का सहारा लिया गया. शीतल को यह कौन समझाए कि उस बाबा के चक्कर में न जाने कितनी लड़कियां खुद को बरबाद कर चुकी होंगी.

एक और मामला जयपुर के गंवई इलाके के थाने चाकसू का है. एक दिन कविता के पेट में दर्द उठा, तो पिता झाड़ा लगवाने एक बाबा के पास ले गए.

15-16 साल की कविता पर बाबा मेहरबान हो गए और पिता की कमजोरी पकड़ी ‘शराब’. अब बाबा पिता को शराब और बेटी को झाड़ा लगाने घर पहुंचने लगे. मां ने बाबा की नीयत भांपी और थाने में मामला दर्ज करा कर उसे गिरफ्तार कराया. ये तीनों मामले मीडिया, थाना और जनता के सामने अपराध के रूप में उभर कर आए, पर दिलचस्प बात तो यह है कि हर चार कदम की दूरी पर ऐसे अपराध हो रहे हैं.

साधुओं के झांसे में धार्मिक आस्था में जकड़े परिवारों की छोटी उम्र की लड़कियां आसानी से आ जाती हैं. इन तांत्रिकों का नैटवर्क इतना तगड़ा होता है कि हर कदम पर इन के दूत हैं. ये चौकन्ने ‘दूत’ ही शिकार की कमजोरियां पकड़ते हैं. हर दो कदम पर इस तरह की दुकान चलती है. जयपुर के टोंक रोड के आसपास महज 4-5 किलोमीटर के दायरे में ऐसी 20 जगहें हैं, जहां सुबह सुबह भूत उतारने का काम होता है.

मेहंदीपुर बालाजी में तो अंधविश्वास का ऐसा तांडव देखने को मिलता है कि आम आदमी की रूह कांप जाए. भूतों के इलाज का ऐसा फलता फूलता कारोबार शायद ही कहीं और देखने को मिले. यहां धूप अगरबत्ती के धुएं में घुटते लोग न जाने कितने दिनों से बिना नहाए, बिना खाए घूमते रहते हैं.

किसी को रस्सी से बांध कर रखा गया है, तो किसी को जंजीर से. किसी को उलटा लटका दिया गया है, तो किसी को पेड़ से बांध दिया गया है.

माना जाता है कि मरीज को किसी भी तरह की चोट पहुंचाना ऊपर वाले का प्रसाद है. यहां पर किसी तरह का मानवाधिकार लागू नहीं होता. यहां कोई स्वयंसेवी संस्था भी नजर नहीं आती. यहां पुलिस प्रशासन का जोर नहीं चलता है, क्योंकि सबकुछ धर्म की आड़ में जो होता है.

एक मामला यह भी

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‘‘बता तू कौन है, वरना तुझे जला कर भस्म कर दूंगा?’’ मंदिर के पुजारी व बाबा रामकेश ने सुनीता की चोटी पकड़ कर जब उस से पूछा, तो वह दर्द के मारे चीख पड़ी, ‘‘बाबा, मुझे छोड़ दो.’’

सुनीता को दर्द से कराहते देख कर भी बाबा को उस पर जरा भी तरस नहीं आया. वह उसे सोटा मारने लगा, तो वह दर्द से चीखती हुई वहीं औंधे मुंह गिर पड़ी.

उसे गिरता देख बाबा ने उस पर पानी के दोचार छींटे मारे, फिर भी जब वह नहीं उठी, तो बाबा घबरा गया. उस ने अपनी जान बचाने के लिए लोगों से कहा, ‘‘घबराने की कोई बात नहीं, कुछ देर बाद इसे होश आ जाएगा…’’

‘‘अभी आता हूं,’’ कह कर बाबा जो गया, तो लौट कर आया ही नहीं. इधर सुनीता को काफी देर बाद भी होश नहीं आया, तो उसे डाक्टर के पास ले जाया गया. डाक्टर ने सुनीता की नब्ज टटोली, तो पता चला कि वह मर चुकी थी.

सुनीता की मौत की सूचना मिलने पर पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

पुलिस ने सुनीता के भाई की शिकायत पर आरोपी बाबा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज तो कर लिया, लेकिन भूत भगाने वाला वह पाखंडी बाबा आज भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर है.

एक घटना राजस्थान के पोखरण इलाके की है. पिछले दिनों बिमला के घर वाले उसे ऐसे ही झाड़फूंक वाले बाबा के पास ले गए. बिमला की कहानी भी सुनीता से काफी मिलती जुलती है.

22 साला बिमला की शादी रमेश के साथ हुई थी. शादी के 5 साल बीत जाने के बाद भी जब उसे बच्चा नहीं हुआ, तो उस की सास उसे बाबा के पास ले गई.

बाबा ने बिमला की सास से कहा, ‘‘इसे किसी ने कुछ कर दिया है. इस का अमावस की काली रात में इलाज करना पड़ेगा.’’

औलाद की चाह में बिमला की सास जब अमावस की रात में उसे बाबा के पास ले आई, तो उस ने बिमला की सास को प्रसाद खिला कर बेहोश कर दिया और बिमला के साथ बलात्कार किया.

बेसुध बिमला को जब होश आया, तो अपनेआप को अस्पताल के बिस्तर पर पाया. ऐसी तमाम औरतें अपनी कोख न भर पाने के चलते ऐसे पाखंडी बाबाओं के चक्कर में पड़ जाती हैं.

भूत भगाने के नाम पर फैले पाखंड का शिकार हर धर्म व मजहब का इन्सान होता है. समीना बताती है कि उस की अम्मी उसे एक ऐसे बाबा के पास ले गईं, जिस ने उस के साथ पूरे 6 महीने तक बलात्कार किया. वह चाह कर भी उस का विरोध नहीं कर सकी, क्योंकि बाबा ने उस के पूरे परिवार को अपने वश में कर रखा था.

एक दिन उसे ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के कुछ सदस्य मिले. उस ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई. ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के लोगों ने बाबा का भांड़ा ही नहीं फोड़ा, बल्कि बाबा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा कर उसे जेल की हवा भी खिलाई.

ड्रग्स ऐंड मैजिक ऐक्ट के तहत ऐसे पाखंडी बाबाओं के खिलाफ पुलिस कार्यवाही भी करती है. चाकसू में एक थानाधिकारी रोहिताश देवंदा कहते हैं, ‘‘कानून में ऐसे ठगों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है, पर शिकायतकर्ता को अपने बयान पर टिके रहना चाहिए.’’

महिला उत्थान से जुड़ी एक संस्था की संचालिका कविता कहती हैं, ‘‘औरतों को बाबा और ओझा के चक्कर में पड़ने के बजाय डाक्टरों का सहारा लेना चाहिए.’’

कविता ने एक ऐसी ही घटना के बारे में बताया, ‘‘कोटा जैसे शहर में मीरा नाम की एक औरत भी किसी भूत भगाने वाले बाबा के चक्कर में फंस गई थी. उसे मिर्गी के दौरे पड़ते थे, लेकिन परिवार के लोग उसे प्रेत का साया बता कर उस का इलाज बाबाओं से कराते चले आ रहे थे.’’

पिछले कई सालों से कोटा में जगन्नाथ साइंस सैंटर भूतप्रेत के नाम पर होने वाले पाखंडों का पर्दाफाश करता चला आ रहा है.

इस साइंस सैंटर के सदस्य दूरदराज के गांवों में जा कर इस तरह के अंधविश्वास को वैज्ञानिक आधार पर चुनौती दे कर बाबा और ओझा जैसे लोगों की पोल खोल कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं.

डाक्टरों और काउंसलरों का मानना है कि आज हर कोई दुखी है. किसी को बच्चे की कमी, तो किसी को कारोबार में घाटा. कोई इश्क में फंसा है, तो कोई घर में ही अनदेखी का शिकार है, पर दिमागी बीमारी में खासतौर पर 2 वजहें सामने आती हैं. पहली, सैक्स से जुड़ी और दूसरी, अपनों द्वारा अनदेखी.

पहली वजह में कई बातें हो सकती हैं, जैसे पति से खुल कर बात न कर पाना. इस में गैरकुदरती सैक्स करना भी शामिल है.

जाने माने डाक्टर शिव गौतम के मुताबिक, पाली जिले के एक गांव से एक केस उन के पास आया. मैडिकल जांच से पता चला कि पति के करीब आते ही सुधा पर भूत आ जाता था. 70 फीसदी पागलपन की शुरुआत कुछ उन्हीं वजहों से होती है. गंवई माहौल और परिवार की इज्जत के चलते औरतें आखिर अपना बचाव कैसे करें?

वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर गंवई औरतें सैक्स के दौरान पति से पूरा सुख न मिलने की वजह से धीरे धीरे बीमार हो जाती हैं, क्योंकि आज भी भारत के कई इलाकों में पति पत्नी सैक्स को ले कर खुल कर शायद ही बात करते हों. इसी तरह की कमजोरी का फायदा तथाकथित तांत्रिक उठाते हैं.

राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष मयंक सुमन शर्मा के मुताबिक, भूत भगाने के नाम पर बाबाओं के गोरखधंधे को बंद किया जा सकता है. अगर राजस्थान सरकार दूरदराज के गांवों में ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ जैसे संगठनों के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को उन तक पहुंचाए. पर इन अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति वालों के दूतों के भगवाई दुश्मन हैं, जो सत्ता में अपनी पहुंच के चलते धर्म के इस धंधे को बंद नहीं होने देना चाहते हैं.

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