सरस सलिल विशेष

नीरा का लाइसैंस उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो ताड़ के पेड़ पर चढ़ने की कूवत रखते हैं. सरकारी दावा है कि अर्जी के एक हफ्ते के अंदर ही नीरा का लाइसैंस जारी कर दिया जाएगा. नीरा की बिक्री पर कोई रोक नहीं है. गौरतलब है कि बिहार में 92 लाख, 19 हजार ताड़ के पेड़ हैं. ताड़ी पर रोक लगाने के बाद नीतीश सरकार नीरा को बढ़चढ़ कर बढ़ावा देने में लगी हुई है. ताड़ी पर रोक लगाने के सरकार के फैसले का विरोध करने वालों की दलील है कि इस से पासी समाज के 20 लाख लोगों के सामने रोजीरोटी की समस्या पैदा हो गई है.

गौरतलब है कि सूरज के उगने से पहले ताड़ के पेड़ से निकले रस को नीरा कहा जाता है. हर पेड़ से रोजाना 25 से 35 लिटर नीरा निकलता है. नीरा को धूप में रख देने से वह नशीली ताड़ी में बदल जाता है और उस में शराब की तरह नशा हो जाता है. ताड़ी में नशा को बढ़ाने के लिए उस में यूरिया वगैरह मिला दिया जाता है. इसे रोकने के लिए ही ताड़ी पर पाबंदी लगाई गई है.

ताड़ के फल से जो रस निकलता है, वह हांड़ी (लबनी) में जमा करने के साथ ही फर्मंटेशन शुरू कर देता है, जिस से अलकोहल की मात्रा बढ़ने लगती है. अगर हांड़ी में चूना डाल दिया जाए, तो फर्मंटेशन नहीं हो पाता है. फर्मलीन को भी हांड़ी में डाल देने से तकरीबन 40-45 घंटे तक फर्मंटेशन नहीं होता है.

राज्य के मुख्यमंत्री रहे जीतनराम मांझी ताड़ी को शराब नहीं, बल्कि जूस करार देते हैं. उन का दावा है कि आंखों की रोशनी कम होने पर डाक्टर ताड़ी पीने की सलाह देते हैं.

ताड़ी की खपत के मामले में समूचे देश में बिहार चौथे नंबर पर है. राज्य में प्रति व्यक्ति प्रति सप्ताह ताड़ी की खपत 266 मिलीलिटर है. पहले नंबर पर आंध्र प्रदेश, दूसरे नंबर पर असम और तीसरे नंबर पर झारखंड आता है.

ताड़ का पेड़ 25 साल पुराना होने पर ही नीरा और ताड़ी दे सकता है. इस के बारे में कहा जाता है कि कोई ताड़ के पेड़ को लगाता है, तो उस का बेटा ही ताड़ी पी पाता है. इस के पेड़ आमतौर पर 45 से 50 फुट ऊंचे होते हैं.

ताड़ी के कारोबार में लगा पासी समाज महादलित जाति में शामिल है. इस वजह से साल 1991 में उन्होंने ही तब के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव से बात कर ताड़ी से टैक्स हटवा दिया था और लाइसैंस फीस भी हटा दी गई थी.

उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डाक्टर एस. सिद्धार्थ कहते हैं कि जो भी ताड़ के पेड़ पर चढ़ने का गुर जानता है, उसे ही लाइसैंस मिलेगा. केवल जाति और रोजगार देख कर ही लाइसैंस नहीं दिया जाएगा.

उत्पादन आयुक्त आदित्य कुमार दास बताते हैं कि नीरा की बिक्री करने वालों को यह ध्यान रखना होगा कि उस का फर्मंटेशन न हो. इस से नीरा में अलकोहल आ जाएगा और उस के बाद उस पर मद्य निषेध कानून लागू हो जाएगा.

ताड़ के साथसाथ खजूर और नारियल के नीरा पर भी यही कानून लागू होगा. लाइसैंस लेने वाले आवेदक को किसान से यह लिखवा कर देना होगा कि उस ने कितने पेड़ लिए हैं.