सरस सलिल विशेष

आप ने आज तक नींद में चलने, नींद में बोलने और नींद में गाड़ी चलाने की आदत के बारे में सुना होगा. लेकिन, आपको बता दें कि कई लोगों को नींद में सैक्स करने से संबंधित विकार भी होता है. इस विकार को स्लीप सैक्स (Sleep sex) कहते हैं. इसको सेक्सोमिया (Sexsomnia) भी कहा जाता है. सेक्सोमिया, पेरासोमिया (Parasomnia) का ही एक प्रकार है.

व्यक्ति के द्वारा नींद में असामान्य व्यवहार करने की स्थिति को पेरासोमिया कहा जाता है. यह नींद का विकार होता है. सेक्सोमिया में व्यक्ति सोते हुए यौन गतिविधियां करता है. जिसमें व्यक्ति के द्वारा हस्तमैथुन, संभोग आदि सभी यौन गतिधियां की जा सकती है.

आइये इस गंभीर विकार के बारे में आगे जानें कि स्लीप सैक्स क्या है, स्लीप सैक्स के लक्षण, कारण और जोखिम कारक, स्लीप सैक्स के लिए क्या परीक्षण किए जाते हैं और इसका इलाज कैसे होता है.

स्लीप सैक्स क्या है

जैसा कि आपको ऊपर बताया जा चुका है कि नींद में सोते हुए व्यक्ति के द्वारा यौन गतिविधियां करना ही स्लीप सैक्स होता है. इसमें व्यक्ति गहरी नींद में हस्तमैथुन व सैक्स तक कर सकता है. यह नींद में सैक्स के सपने आने की स्थिति से बेहद ही अलग होती है. इसमें व्यक्ति नींद में चलने की तरह ही सोते समय यौन गतिविधियों को करता है. सेक्सोमिया नाम से पहचाने जाने वाले इस विकार के कई कारण होते हैं. जिसके आधार पर ही इसके लक्षण सामने आते हैं.

सेक्सोमिया चिकित्सीय क्षेत्र में कुछ वर्षों पहले सामने आया एक नया विकार है. इसका पहला मामला 1986 में दर्ज किया गया था. सेक्सोमिया विकार पर अध्ययन करना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि यह विकार सोते समय कभी भी हो सकता है. इसके होने का कोई निश्चित तरीका नहीं होता है.

स्लीप सैक्स के लक्षण

व्यक्ति के द्वारा सोते हुए सैक्स का सपना देखने के मुकाबले यह विकार काफी अलग व गंभीर होता है. सैक्स के सपने आना एक सामान्य स्थिति हो सकती है. लेकिन, नींद में शारीरिक संबंध बनाना किसी के लिए खरतनाक भी हो सकता है. सेक्सोमिया से ग्रसित व्यक्ति को पता ही नहीं चल पाता कि उसके साथ वास्तव में क्या हो रहा है. विकार से ग्रसित व्यक्ति में सेक्सोमिया के लक्षण सबसे पहले उसके परिजन, साथी, कमरे में साथ रहने वाले साथी या उसके पास सोने वाले मित्र महसूस करते हैं. किसी दूसरे के बताने पर ही व्यक्ति को यह पता चल पाता है कि उसके द्वारा नींद में किस तरह की गतिविधित की जा रही है.

सेक्सोमिया में किया जाने वाला व्यवहार और इसके लक्षण निम्न होते हैं –

सोते हुए फोरप्ले की तरह महसूस करना.

यौन क्रिया की तरह आवाजें निकालना.

बिना उत्तेजना के चरमसुख अनुभव करना.

दिल की धड़कने और सांसों का तेज होना.

श्रोणी में संभोग की तरह गतिविधि करना.

अधिक पसीना आना.

हस्तमैथुन करना.

साथ में सोने वाले के साथ फोरप्ले करना.

साथ में सोए हुए के साथ संभोग करना.

सोते समय किए गए यौन व्यवहार को याद न रख पाना.

संभोग के समय न उठ पाना.

जगाने पर रात की गतिविधियों को पूरी तरह से नकार देना.

रात में चलना और बोलना.

नींद में संभोग के समय आंखे खुली और भावहीन होना.

नींद के दौरान किए जाने वाला सैक्स भावनात्मक तौर पर रोगी को परेशान कर सकता है. इस दौरान व्यक्ति की आंखे खुली भी हो सकती है और लोगों को ऐसा भी लग सकता है कि व्यक्ति जगा हुआ है, जबकि वह नींद की अवस्था में ही ऐसा करता है.

डौक्टर से कब मिलें?

इस तरह के मामले आगे चलकर काफी गंभीर रूप धारण कर सकते हैं. सेक्सोमिया में सोते समय हस्तमैथुन करना आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है. सेक्सोमिया में पीड़ित व्यक्ति की शादीशुदा जिंदगी पर भी खराब असर पड़ता है. इससे दोनों ही साथियों के रिश्ते में दरार आने लगती है. इन सभी कारणों के चलते आपको सेक्सोमिया में तुरंत डौक्टरी सलाह लेनी चाहिए. अगर कुछ सप्ताह से आपको सेक्सोमिया के लक्षण लगातार दिखाई दे रहें हैं तो आपको किसी विशेषज्ञ से मिलकर इस समस्या का इलाज शुरू करवाना चाहिए. अगर आपको इस बारे में कुछ समझ न आए तो आप अपने पारिवारिक डौक्टर की भी सलाह से सकते हैं.

स्लीप सैक्स के कारण

अन्य तरह के पेरासोमिया के अनुसार ही सेक्सोमिया में भी व्यक्ति का दिमाग गहरी नींद की अवस्था में सही तरह से कार्य नहीं कर पाता है. इस समस्या के कारण व्यक्ति को सुबह उठने पर पता ही नहीं चल पाता है कि वह कहां है. नींद में यौन गतिविधियों के सही कारणों का पता लगाना बेहद ही मुश्किल होता है. इस विकार की जाँच करने के बाद ही पता चल पाता है कि आपकी जीवनशैली में बदलाव, किसी प्रकार की दवाओं के सेवन या चिकित्सीय कारण आदि,  किन वजहों के चलते नींद के नियमित तरीके में बदलाव आया है.

अभी तक स्लीप सैक्स के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है, परंतु इसको उत्तेजित (यौन व्यवहार के होने की तीव्रता) करने वाले कुछ कारण निम्नतः बताए जाते हैं –

नींद में कमीं होना.

अधिक थकान होना.

अत्यधिक शराब पीना.

नशीली दवाओं का उपयोग.

चिंता.

तनाव.

सही तरह से नींद न आना.

तनाव वाला काम करना या काम के घंटे ज्यादा होना.

यात्रा करना.

किसी व्यक्ति के साथ एक ही बिस्तर पर सोना.

कुछ निम्न तरह की चिकित्सीय स्थितियां, सेक्सोमिया होने की जोखिम कारक मानी जाती हैं –

औब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea/ नींद में सांस लेने में बाधा होना)

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless leg syndrome/ पैरों में नियंत्रण न रहना)

गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (Gastroesophageal reflux disease/ Gerd/ बार-बार एसिडिटी होना)

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (rritable Bowel Syndrome/ बड़ी आंत संबंधी विकार)

पहले कभी पेरासोमिया हुआ हो, जैसे – सोते समय चलने या बोलने की आदत का होना.

क्रोहन रोग (Crohn’s disease: पाचन तंत्र में सूजन आना)

कोलाइटिस (Colitis/ बड़ी आंत में सूजन होना) (और पढ़ें – आंतों में सूजन का इलाज)

अल्सर/ छाले (Ulcers) (और पढ़ें – छाले का घरेलू उपाय)

माइग्रेन (Migrane/ सिर दर्द) (और पढ़ें – माइग्रेन के घरेलू उपाय)

मिर्गी होना या शारीरिक अंगों का काम न कर पाना.

सिर में गंभीर चोट आना.

चिंता और अवसाद की दवाएं लेना. (और पढ़ें – अवसाद के घरेलू उपाय)

बचपन में यौन अपराध का शिकार होना.

पार्किंसन रोग होना.

स्लीप सैक्स का परीक्षण

इस विकार परीक्षण के लिए किसी डौक्टर से मिलने से पहले आपको अपने आसपास के उन लोगों से बात करनी होगी, जिन्होंने सोते समय आपकी यौन गतिविधियों की सही स्थिति को देखा हो. इसके बाद आप उनकी सभी बातों को किसी डायरी में लिख लें. इसके अलावा आपको दो-तीन दिनों में यौन गतिविधियों के नियमित तरीके को भी समझना होगा. दो चार दिनों की यौन गतिविधियों के आकंडों से डौक्टर को आपके विकार के बारे में सही तरह से जानने का मौका मिलेगा. अगर आपकी बात से डौक्टर सही स्थिति का पता नहीं लगा पाते हैं तो वह आपके सोने की स्थिति पर अध्ययन करेंगे.

चिकित्सीय जांच के विशेषज्ञों के द्वारा ही नींद की स्थिति का अध्ययन किया जाता है. इस टेस्ट को ‘पोलीसोम्नोग्राफी’ कहा जाता है. इसमें नींद के दौरान आपकी निम्न आधार पर जांच होती है –

मस्तिष्क तरंगे.

हृदय दर.

सांस लेने का तरीका.

आंखों और पैरों के संचालन का तरीका.

जांच के दौरान आपको परीक्षण केंद्र पर एक रात सोने के लिए भी कहा जा सकता है. एक रात में विकार के कारणों को समझने में मुश्किल होने पर डौक्टर आपको कुछ और रातें केंद्र पर सोने के लिए कह सकते हैं. इसके बाद भी विकार के कारणों का सही पता न लगने पर डौक्टर आपको कई अन्य परीक्षण की भी सलाह दे सकते हैं.

स्लीप सैक्स का इलाज

सही समय पर सोने और जगाने की नियमित आदत से आप स्लीप सैक्स विकार को आसानी से दूर कर सकते हैं. सेक्सोमिया के लक्षणों को दूर करने के बाद व्यक्ति को सही तरह से नींद आने लगती है. सामान्यतः स्लीप सैक्स के कारणों को समझने में लंबा समय लगता है.

सेक्सोमिया के लिए दवाएं –

सेक्सोमिया से संबंधित लक्षणों के इलाज के लिए दवाओं के प्रयोग करने से इस विकार में राहत मिलती है. इसमें आपकी नींद में बाधा आने वाले कारण, जैसे – स्लीप एप्निया का इलाज करने से सेक्सोमिया की समस्या कम होती है.

सेक्सोमिया के चिकित्सीय इलाज में शामिल हैं –

चिंता और अवसाद को दूर करने वाली दवाओं का सेवन करें.

नाक से सांस लेने की प्रक्रिया को सही करने के लिए सीपीएपी थेरेपी लेना.

दर्द से राहत देने वाली दवाएं लेना.

एसिडिटी को कम करने वाली दवाएं लेना.

जीवन शैली में क्या बदलाव करें-

सेक्सोमिया के इलाज के लिए जीवनशैली में भी बदलाव करना जरूरी होता है. सेक्सोमिया के लक्षण से आपके आसपास के लोगों को भी नकारात्मक प्रभाव झेलना पड़ता है. इसके लिए आपको रात में अलग या अकेले ही सोना चाहिए. सेक्सोमिया के कई मरीजों ने रात में अकेले सो कर और बेडरूम के दरवाजे पर अलार्म लगाकर भी अपने लक्षणों को कम किया है.

मनोचिकित्सक से मिलें

सेक्सोमिया के कारण होने वाली शर्मिंदगी को दूर करने के लिए आप मनोचिकित्सक से मिल सकते हैं. इस विकार के लक्षणों के चलते व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से हताश हो जाता है, ऐसे में उसको मनोचिकित्सक से मिलने की आवश्यकता होती है. क्योंकि कई मामलों में सेक्सोमिया के लक्षण पीड़ित व्यक्ति के साथी के लिए भी समस्या का कारण बन सकते हैं.

स्लीप सैक्स से बचाव

अगर स्लीप सैक्स शराब और नशीली दवाओं के कारण हो रहा हो, तो आपको तुरंत इस तरह की दवाओं को लेना बंद करना होगा. इसके अलावा कई बार किसी रोग के लिए डौक्टर के द्वारा बताई जाने वाली दवाओं के सेवन और इसके विपरीत प्रभाव के कारण भी यह समस्या हो जाती है. अगर आप ऐसा महसूस करें तो इन दवाओं का सेवन रोक दें और इसकी जगह पर डौक्टरी सलाह के बाद कोई अन्य दवा लेना शुरू करें. स्लीप सैक्स के सही कारणों को समझकर आपको या डॉक्टर को इसका इलाज करना होता है.

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