रात के 9 बजे थे. कमला बिस्तर पर लेटी हुई थी, तभी उस का पति आया. उस ने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर में घुस कर सोने की तैयारी करने लगा. कमला कुछ नहीं बोली, जबकि आज उस का मन यह काम करने को नहीं था. सीमा की हालत दूसरी है. वह पति की जल्दबाजी को उस की लालसा समझती रही, मगर जब उस ने बिस्तर पर आते ही सीमा पर झपटना नहीं छोड़ा, तो उस ने पति से कहा, ‘‘तुम मुझे समझते क्या हो?’’

‘‘क्यों, क्या हुआ तुम्हें?’’ पति ने जानना चाहा.

‘‘यही कि तुम बिस्तर पर आते ही बाज की तरह झपट पड़ते हो.’’

‘‘तो क्या हुआ?’’

पति के इतना कहते ही सीमा भड़क गई, ‘‘क्या मुझ में जान नहीं है? क्या तुम ने मुझे जानवर समझ रखा है?’’

सीमा के आंसू निकल पड़े, ‘‘मैं भी हाड़मांस की जीतीजागती इनसान हूं. मेरी भी कुछ इच्छाएं, पसंदनापसंद और भावनाएं हैं. कभी आप ने यह जानने की कोशिश की है? आप को तो अपने काम से मतलब है. बिस्तर पर आए और झपट पड़े, जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूं.’’

सीमा बोलती रही और उस का पति चुपचाप सुनता रहा. मगर ऐसा सभी के साथ नहीं होता है. कुछ औरतें सीमा की तरह कह नहीं पाती हैं. बस, वे हालात को जैसेतैसे कबूल कर लेती हैं.

नीला का पति रोज ही उस के साथ सोने की जिद करता था, इसलिए उस ने पति की इच्छा से समझौता कर लिया. जब भी उस का पति आता, वह उस के सामने बिछ जाती. उस का पति अपनी मनमानी करता रहता.

आखिर एक दिन पति खीज उठा, ‘‘यह क्या है? तुम तो जिंदा लाश जैसी पड़ी रहती हो. मैं ही सबकुछ करता रहता हूं.’’

‘‘हुं…,’’ नीला ने टालने की गरज से कहा, तो उस के पति ने पूछा, ‘‘आखिर तुम साथ क्यों नहीं देती हो?’’

तब नीला ने बताया, ‘‘आप ने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि मैं ऐसा क्यों करती हूं? शुरूशुरू में मेरी भी कुछ इच्छाएं और उमंगें थीं, जिन्हें मैं पूरा करना चाहती थी. मगर मैं कह नहीं पाती थी. सोचती थी कि आप प्यार से पूछेंगे.

‘‘मगर आप ने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि मैं क्या चाहती हूं? मेरी इच्छा क्या है? बस, आप तो आते ही शुरू हो जाते थे.

‘‘कई दिनों तक मैं यह देखती रही. आखिर मैं ने ही अपनी इच्छा का दम घोंट लिया. जैसा आप चाहते थे, वैसा ही होने लगा. मैं ने कभी इस बात का विरोध नहीं किया.’’

आखिर औरतें बिस्तर पर अपनी इच्छा अनिच्छा क्यों नहीं कह पाती हैं, जबकि पति की इच्छा का सम्मान करते हुए वे बिस्तर पर पड़ी रहती हैं?

शुरूशुरू में तो पति को पत्नी की इस आदत पर हैरानी नहीं होती है, मगर जब उस की यौन जिंदगी सामान्य और सही ढर्रे पर आती है, तो पत्नी का साथ उसे अखरने लगता है.

इस के मूल में पत्नी को मिले संस्कार होते हैं. इसी वजह से वह इच्छा न होते हुए भी पति के लिए बिस्तर पर तैयार रहती है. यह इस की एक वजह है, मगर सचाई कुछ और ही है.

औरत के दिमाग में आदमी की सोच का डर बैठा रहता है, जो बिस्तर पर उसे चुप रखता है. इसी सोच के चलते वह बिस्तर पर चुप ही रहती है.

वह आदमी की दोहरी दिमागी सोच से वाकिफ होती है. वह जानती है कि अगर उस ने बिस्तर पर अपनी इच्छा या भावना जाहिर की, तो उसे दूसरे मतलब में लिया जाएगा. उसे कुलटा और बदचलन समझ कर शक की निगाह से देखा जाएगा. अगर वह चुप रही, तो उसे शर्मीली समझ लिया जाएगा. ज्यादा हुआ, तो गंवार कह दिया जाएगा.

यही वजह है कि कई पत्नियां पति की इच्छा को ही देख कर अपना वैसा बरताव बना लेती हैं. अगर यौन जिंदगी में पति अपनी पत्नी का दखल नहीं चाहता है, तो पत्नी अपनी इच्छा को दबा कर के पति की मरजी के मुताबिक चलने लगती है. पति जैसा चाहता है, वैसा ही करने देती है. वह खुद कुछ नहीं करती और कहती है.

ऐसे में एक समय ऐसा आता है, जब पति अपनी पत्नी से ऊब जाता है. ऐसी दशा में पत्नी से उस का झगड़ा हो जाता है. अकसर वह पत्नी को ठंडी मान कर दूसरी जगह संबंध बना लेता है.

अगर पति समझदार होता है, तो पत्नी से बातचीत करता है. उसे अपने भरोसे में ले कर प्यार व मनुहार से उस के दिल की बात जान लेता है. तब पत्नी के मुताबिक काम कर के अपनी यौन जिंदगी सुख से भरी बना लेता है.

औरतमर्द की जरूरत समझने वाले मर्द कभी औरत के ठंडेपन की शिकायत नहीं करते हैं. वे जानते हैं कि औरत व मर्द की जिस्मानी बनावट में बहुत फर्क होता है.

औरत एक नदी की तरह होती है, जो धीरेधीरे उफान पर आती है और धीरेधीरे ही शांत होती है, जबकि मर्द तूफान की तरह होता है, जो जल्दी आ कर जल्दी ही चला जाता है.