सरस सलिल विशेष

एक अंतरंग संबंध या एक यौन संबंध याने जोड़ों का शारीरिक और भावनात्मक रूप से अच्छी तरह से शामिल होना हो सकता हैं. इसको मुख्यतः प्यार और प्रतिबद्धता के अलावा जुनून और आकर्षण द्वारा निर्धारित किया जाता है. एक रिश्ते में अंतरंगता जोड़े को भावनात्मक रुप से एक दूसरे सें कितने संलग्न है, यह तय करने में और सुरक्षा की अपनी भावना का निर्धारण करने में मदद करती हैं. इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध एकसाथ रहने की इच्छा को केवल शारीरिक स्तर से परे एक भावनात्मक स्तर पर बरकरार रखते हैं. उसमें अपनेपन और स्नेह की भावना होती है.

निम्नलिखित मुद्दों से आपको यह संकल्पना समझने में मदद मिलेगी:

– जोड़े उनके रिश्ते में अंतरंगता का आनंद लेते है, वह एक दूसरे पर निर्भर हो जाते हैं.

– एक अंतरंग संबंध में हमेशा आवश्यकता की पूर्ति की भावना होती है. यह पूर्ताता भावनात्मक, सामाजिक और यौन हो सकती हैं.

– एक अंतरंग संबंध कभी कभी आकर्षण, मोह, और जुनून के अन्य संकल्पना के साथ उलझ सकता है. अंतरंगता का आनंद ले रहे लोगों को इससे सतर्क होना चाहिये, जिससे वह बादमें दर्द और अविश्वास से बच सकते हैं.

– इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध हमेशा एक यौन संबंध नहीं हो सकता हैं. एक संतोषप्रद शारीरिक संबंध बनने के लिए एक भावनात्मक रूप से संलग्न होना बहूत जरुरी होता हैं, और इसलिए अंतरंगता को बहुत ज्यादा व्यक्तिगत स्तर पर परिभाषित किया जाता हैं. एक अंतरंग जोड़े अपने साथी की पसंद और नापसंद के बारे में स्वाभाविक रुप से जानते है, और इसलिए साथ रहने का हर अनुभव पूर्ण बनाते हैं.

– शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अंतरंग संबंधों में शामिल व्यक्ति खुद को बेहतर समझने में भी सक्षम होते है, जिससे कारण उनको अपने साथियों से जुड़ा होने के अलावा उनको क्या चाहिए यह पता होता हैं.