सरस सलिल विशेष

सवाल
मैं 32 वर्षीय विवाहित महिला हूं. विवाह को 5 वर्ष हो चुके हैं. मेरे पति के साथ एक समस्या है कि वे बहुत शक्की स्वभाव के हैं. मैं किसी भी पुरुष से बात करूं, फिर चाहे वह सेल्सबौय ही क्यों न हो तो वे मुझ से लड़नेझगड़ने लगते हैं. किसी से फोन पर भी बात करूं तो पूछते हैं किस का फोन था, क्या बात हुई. मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं लेकिन उन का मेरे प्रति यह रवैया मुझे दुखी कर देता है. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की है कि मैं उन के अलावा और किसी को नहीं चाहती लेकिन उन की शक कर ने की आदत मुझे परेशान करती है.

जवाब
देखिए, शक का कोई इलाज नहीं होता. आप के पति के साथ भी ऐसा ही है. सामान्यतया शक वही लोग करते हैं जिन्हें अपने ऊपर विश्वास नहीं होता और वे दूसरों से खुद को कमतर समझते हैं. आप अपने पति के गुणों की तारीफ करें और जताएं कि वे संपूर्ण हैं और उन के अलावा आप किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकतीं. आप का यह व्यवहार धीरेधीरे उन के शक्की स्वभाव को बदल देगा.

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सनकी पति

कल्लू को अकेला घर आया देख कर घर वालों में से किसी ने पूछा कि अंजू कहां है तो उस ने बेहद इत्मीनान से जवाब दिया कि उस की तो उस ने हत्या कर दी है. पहले तो चौंक कर सभी ने कल्लू की ओर देखा. लेकिन उस के हावभाव देख कर सभी को यकीन हो गया कि इस सिरफिरे का कोई भरोसा नहीं कि यह जो कह रहा है, उसे कर चुका हो. भोपाल के कोटरा इलाके के बापूनगर में मामूली खातेपीते लोग रहते हैं. उन्हीं में एक कल्लू विश्वकर्मा भी था. पेशे से वेल्डर कल्लू की एक पहचान निहायत ही सनकी आदमी की भी थी, जो अड़ोसपड़ोस में हर किसी से झगड़ बैठता था, इसलिए लोग उस से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझते थे.

30 साल की अंजू कल्लू की पत्नी थी, जो उस के 5 बच्चों की मां थी. पतिपत्नी में आए दिन झगड़ा होता रहता था, जिस के न केवल उन के बच्चे, बल्कि पड़ोसी भी आदी हो चुके थे. 5 बच्चों की मां होने के बावजूद अंजू जवान और आकर्षक दिखती थी. लेकिन इस बात पर खुश होने के बजाय कल्लू को उस पर शक हो चला था कि उस के किसी से अवैधसंबंध हैं. पतियों के इस तरह के शक की न कोई वजह होती है और न ही इस का कोई इलाज है, जिस की मार बेकसूर पत्नियों को झेलनी पड़ती है. अंजू भी उस में से एक थी, जो पति की बातों और तानों को सुनसुन कर परेशान रहती थी. जब कभी वह उस का शक दूर करने की कोशिश करती, कल्लू समझने के बजाय और भड़क उठता था.

26 अक्तूबर, 2016 को जब सभी लोग दिवाली की तैयारियां कर रहे थे, दोपहर कोई एक बजे कल्लू ने अंजू से कहीं घूमने चलने को कहा. पति की इस पेशकश पर पहले तो वह चौंकी, लेकिन जल्द ही खुश भी हो गई. पति शक्की था, झक्की था, लेकिन कभीकभी उस का प्यार उमड़ता था तो अंजू पुराना सब कुछ भूल जाती थी. उस दिन भी जब कल्लू ने अपनी मारुति कार से कलियासोत डैम घूमने चलने को कहा तो वह झटपट यह सोच कर तैयार हो गई कि कहीं ऐसा न हो कि पति का इरादा बदल जाए. दोनों कार में सवार हो कर कलियासोत डैम पहुचे, जहां पतिपत्नी में किसी बात को ले कर विवाद शुरू हो गया. जब दोनों लड़तेझगड़ते डैम के गेट नंबर 13 पर पहुंचे तो कल्लू ने अंजू को काबू कर के उस का गला दबाना शुरू कर दिया. उस समय वहां सुनसान था. क्योंकि आमतौर पर कम लोग ही उतनी दूर तक घूमने जाते हैं. गुस्साए कल्लू ने तब तक पत्नी की गरदन नहीं छोड़ी, जब तक वह लाश बन कर उस की बांहों में नहीं झूल गई. जब पत्नी के मरने की तसल्ली हो गई तो कल्लू ने इत्मीनान से उस की लाश को डैम के बहते पानी में फेंक दिया. लेकिन फरार होने के बजाय वह सीधे घर जा पहुंचा और पत्नी की हत्या की बात दो टूक कह दी. घर वालों ने सकपका कर आसपड़ोस वालों से यह बात कही तो मोहल्ले वालों ने पहले तो जम कर उस की धुनाई की, उस के बाद उसे रस्सी से बांध दिया और पुलिस को खबर कर दी. खबर मिलते ही पुलिस कल्लू के घर पहुंच गई.

एएसपी आर.डी. भारद्वाज ने जब कल्लू से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद गोताखोरों की मदद से अंजू की लाश और टूटी हुई चूडि़यां भी घटनास्थल से बरामद कर ली गईं. इस के बाद औपचारिक काररवाई पूरी कर के अंजू के शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भिजवा दिया गया. पुलिस के बारबार पूछने पर कल्लू एक ही बात दोहराता रहा कि अंजू बहुत बकबक करती थी, इसलिए उस ने उसे मार डाला. लेकिन इस मामले से यह उजागर हुआ है कि पतिपत्नी के बीच रोजमर्रा की कलह कभीकभी जानलेवा साबित हो जाती है. सनकी और शक्की पति की अक्ल पर इस कदर परदा पड़ जाता है कि वह अपना अंजाम तो दूर की बात, बच्चों के भविष्य की भी परवाह नहीं करता.

लगता तो यही है कि मामूली शक्ल सूरत वाला कल्लू वेल्डिंग के धंधे से कमा तो अच्छा लेता था, पर अपनी जवान और खूबसूरत पत्नी को ले कर हीनभावना से ग्रस्त था, जिस के चलते उस ने उसे हमेशा के लिए ठिकाने लगा कर खुद अपने हाथों अपनी जमीजमाई गृहस्थी उजाड़ दी.