सरस सलिल विशेष

सवाल
मैं 21 साल का हूं. पड़ोस वाली भाभी 32 साल की हैं और उन के 3 बच्चे भी हैं. एक बार उन के पति गांव गए थे, तो मेरे और उन के बीच जिस्मानी संबंध बन गए, जो लगातार चल रहे हैं. एक दिन उन के पति ने हम दोनों को रंगेहाथ पकड़ भी लिया. इस के बावजूद वे अपनी बीवी को साथ ले जाने को तैयार हैं, पर वह मुझे छोड़ना नहीं चाहती. क्या करूं?

जवाब
3 बच्चों की मां को तलाक दिला कर उस से शादी करना आसान काम नहीं है. लिहाजा, आप उसे समझा कर पति के साथ जाने को कहें. उस का पति बेहद भला है, वरना कोई भी ऐसी हरकत बरदाश्त नहीं कर सकता. आप ने मुफ्त की मलाई खूब चाट ली, अब उस से किनारा करने में ही भलाई है.

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जेंटस पार्लरों में चलता गरम जिस्म का खेल

बिहार की राजधनी पटना के हर इलाके में जेन्टस पार्लर की भरमार है. चमचमाते और रंग बिरंगे पार्लर मनचले युवकों और मर्दों को खुलेआम न्यौता देते रहते हैं. पार्लर के आस-पास गहरे मेकअप किए इठलाती, बलखाती और मचलती लड़कियां मोबाइल फोन पर बातें करती दिख जाती हैं. अपने परमानेंट कस्टमरों को सेक्सी बातों से रिझाती-पटाती नजर आ ही जाती है. इन पार्लर में हर तरह की ‘सेवा’ दी जाती है.

कुर्सी के हेडरेस्ट के बजाए लड़कियों के सीने पर सिर रख कर शेव बनाने और फेस मसाज का आनंद लीजिए या फिर लड़कियों के गालों पर चिकोटियां काटते हुए मसाज का मजा लीजिए. फेस मसाज, हाफ मसाज से लेकर फुल मसाज की सर्विस हाजिर है. जैसा काम, वैसी फीस. याने पैसा फेंकिए और केवल तमाशा मत देखिए, बल्कि खुद भी तमाशों में शामिल होकर दैहिक सुख का भरपूर आनंद उठाइए.

जेंटस पार्लरों में कस्टमर से मनमाने रेट वसूले जाते हैं. शेव बनाने की फीस 500 से 1000 रूपए हैं. फेस मसाज कराना है तो 1000 से 2000 तक ढीले करने होंगे. हाफ बौडी मसाज के लिए 3000 से 5000 रूपए डाउन करने पड़ेगें और फुल बौडी मसाज की तो रेट नहीं है. जैसा कस्टमर वैसी फीस और सुंदर ‘मसाजर’ को तो मनमाना फीस देने को कस्टमर लाइन लगाए रहते हैं.

पटना के बोरिंग रोड, फ्रेजर रोड, एक्जीविशन रोड, डाकबंगला रोड, कदमकुंआ, पीरबहोर, मौर्यलोक कम्प्लेक्स, स्टेशन रोड, राजा बाजार, कंकड़बाग, एसके नगर आदि इलाकों में जेन्टस या मेंस मसाज पार्लर की भरमार है. पिछले कुछ महीनों से पुलिस की छापामारी से जेंटस पार्लरों का धंधा कुछ मंदा तो हुआ है, पर पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है. थानों के मिलीभगत से जेंटस पार्लरों का खेल चल रहा है.

कुछ साल पहले तक मसाज पार्लरों  में नेपाली और बांग्लादेशी लड़कियों की भरमार थी, पर अब उनकी संख्या कम हुई है और बिहार और उत्तर प्रदेश की ज्यादातर लड़किया उनमें काम कर रही है. इनमें ज्यादातर गरीब घरों की लड़किया ही होती हैं, जो पेट की आग बुझाने के लिए लोगों के सेक्स की आग को बुझाने का धंधा करने को मजबूर हैं.

फ्रेजर रोड के एक पार्लर में काम करने वाली सलमा बताती हैं कि उसका शोहर उसे छोड़ कर मुंबई भाग गया. अपनी और 7 साल की बेटी को पालने के लिए उसे मसाज पार्लर में काम करना पड़ा. उसी तरह पति की मौत के बाद ससुराल वालों की मार-पीट की वजह से रोहतास से भाग कर पटना पहुंची सोनी काम की खोज में बहुत भटकी पर उसे कोई काम नहीं मिला. उसकी सहेली ने उसे जेन्टस पार्लर में काम दिलाया. वह बताती है कि पहले तो उसे मर्दों की सेक्सी आंखों और हरकतों से काफी शर्म आती थी. कई बार यह काम छोड़ने का मन किया, पर मरता क्या न करता. अब इन सबकी आदत हो गई है. सर, सारी, थैंक्यू, मोस्ट बेलकम, नौटी ब्वाय आदि सीख गई हूं. समाज सेवक प्रवीण सिन्हा कहते हैं कि पार्लर में काम करने वाली ज्यादातर लड़कियों और औरतों के पीछे बेबसी और मजबूरी की कहानी होती हैं. कुछेक लड़कियां ही ऐसी होती हैं जो ऐश-मौज करने और मंहगे शौकों को पूरा करने के लिए मसाज करने और जिस्म बेचने का काम करती हैं.

आसपास के लोगों की कई शिकायतों के बाद कभी-कभार पुलिस जागती है और एक साथ कई मसाज पार्लर पर छापामारी कर कई लड़कियों, पार्लर संचालिकाओं और दर्जनों कस्टमरों को पकड़ कर ले जाती है. पुलिस देह का धंधा करने के आरोप में लड़कियों और ग्राहकों की धरपकड़ करती है. 2-3 दिन तो पार्लर पर ताला दिखता है और फिर  पुलिस, कानून और समाज के ठेकेदारों को ठेंगा दिखाते हुए धंधा चालू हो जाता है और बेधड़क चलता रहता है. पता नहीं पुलिस की इस ड्रामेबाजी का मतलब क्या है?

पुलिस के एक आला अफसर कहते हैं कि जिस्मानी धंधे की शिकायत मिलने के बाद पुलिस छापामारी करती है. प्रिवेंशन आफ इममारल ट्रैफिक एक्ट के तहत शिकायतों के बाद छापामारी की जाती है. पार्लर से पकड़ी गई लड़कियां या औरतें यह नहीं बताती हैं कि उन्हें जर्बदस्ती या लालच देकर या टार्चर कर काम कराया जा रहा है. वह तो पुलिस को यही बयान देती है कि वह अपनी मर्जी से काम कर रही है. अगर वह देह बेचने को मजबूर नहीं की गई है तो प्रिवेंशन आफ इममारल ट्रैफिक एक्ट बेमानी हो जाता है. इससे कानून कुछ कर नहीं पाता है.

पुलिस के एक रिटायर्ड औफिसर की मानें तो पार्लर पर छापामारी पुलिस के पैसा उगाही का जरिया भर है. पुलिस को पता है कि ऐसे मसाज पार्लर पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है, वह महज रौब-धौंस दिखा कर ‘वसूली’ कर लड़कियों और संचालकों को छोड़ देती है. जो पार्लर सही समय पर थानों में चढ़ावा नहीं चढ़ाते हैं, वहीं छापामारी भी की जाती है. पटना हाई कोर्ट के वकील उपेंद्र प्रसाद कहते हैं कि जिस्म के धंधे और यौन शोषण की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई तभी हो सकती है, जब वह दबाब में हो. जब किसी महिला को जबरन या खरीद-बिक्री के लिए यौन शोषण नहीं किया जा रहा है, तो वह कानूनन वेश्यावृत्ति नहीं माना जाएगा. पार्लर से पकड़ी गई लड़कियां कभी यह नहीं कहती है कि उससे जबरन कोई काम कराया जा रहा है. फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि पार्लर में जिस्मफरोशी का धंधा चलता है?