सरस सलिल विशेष

कसूर फिर से एक मासूम के साथ दरिंदगी को लेकर विवाद में है. सात साल की जैनब के साथ दुष्कर्म और फिर उसके कत्ल ने बदसूरत तस्वीर फिर से पेश की है. बीते मंगलवार को जैनब लापता हुई थी. ट्यूशन के लिए जाते वक्त रास्ते से उसे अगवा किया गया था, और बुधवार को उसकी लाश बेहद दर्दनाक हालत में कचरे के ढेर से बरामद हुई.

साल 2015 में ही इस इलाके में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े एक नेटवर्क का पता चला था, जिसके ब्योरे भयानक थे. वह नेटवर्क कई वर्षो से कसूर जिले में सक्रिय था, और उसने इलाके के कई मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाया था. उस मामले के खुलासे के बाद भी बड़े पैमाने पर जन-आक्रोश दिखा था, बावजूद इसके पाकिस्तान का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम सुस्त बना रहा.

जैनब के अपहरण और बलात्कार से पहले कसूर सिटी के दो किलोमीटर के दायरे में कम से कम 12 ऐसी ही घटनाएं पिछले दो साल के भीतर घटीं, मगर उनमें से एक भी मामले को अब तक सुलझाया नहीं जा सका है. मगर इस बार अवाम का गुस्सा पंजाब सूबे की सड़कों पर दिख रहा है. पिछले दो दिनों से यहां-वहां की सड़कों पर दंगे-से हालात हैं. आक्रोशित भीड़ पर पुलिस की फायरिंग में दो लोगों की जान भी गई है. इससे कोई मतलब नहीं कि दरिंदगी का शिकार बन रहे बच्चों का वास्ता समाज के किस तबके से है, उनके साथ हो रहे अपराध काफी बर्बर सूरत अख्तियार करने लगे हैं.

पाकिस्तान में हुकूमत के खिलाफ लोगों, खासकर नौजवानों में जो गुस्सा है, वह दरअसल अपने नागरिकों की हिफाजत के प्रति सरकारी बेरुखी से ही उपजा है. मुल्क में आपराधिक वारदात की तफ्तीश का स्तर इतना ऊंचा नहीं कि वह उसे किसी अंजाम तक पहुंचा सके, यहां तक कि ज्यादती के शिकार खौफजदा बच्चों से किस संजीदगी से पूछताछ होनी चाहिए, इसकी सलाहीयत भी पुलिस में नहीं दिखती.

इसलिए समाज के दरिंदों से निपटने के लिए पाक के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की खामियों को फौरन दूर किया जाना चाहिए. जनता के बीच के ही इन भेड़ियों को सड़क पर छुट्टा घूमने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.