सरस सलिल विशेष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता के सिंहासन पर बैठने के बाद अक्टूबर, 2017 को प्रदेश की गरीब बेटियों के सामूहिक विवाह की योजना का ऐलान किया था. इस योजना के मुताबिक गांवदेहात के अर्जी देने वालों की 46,880 रुपए और शहरी इलाके से अर्जी देने वालों की 56,460 रुपए सालाना आमदनी होने का प्रावधान रखा गया था.

उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के लिए 250 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी गई थी और 10 हजार कुंआरे जोड़ों की शादी कराने का टारगेट रखा गया था.

फरवरी, 2018 तक उत्तर प्रदेश के 55 जिलों में 5,937 जोड़ों की शादी करा कर जिलों के कलक्टरों ने अपनी पीठ तो थपथपा ली लेकिन मुख्यमंत्री की नजर में अच्छा बनने की खुशी ज्यादा लंबी नहीं थी. जल्दी ही यह बात सामने आ गई कि इस सामूहिक विवाह योजना में घोटाला किया गया है.

जैसा कि हमेशा ही होता है, चाहे सरकार की कोई भी कल्याणकारी योजना क्यों न हो, नौकरशाही को अपनी जेब भरने का मौका मिल ही जाता है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में गरीब बेटियों की सामूहिक विवाह योजना में सरकारी अफसरों के लालच और लापरवाही ने पलीता लगा दिया.

फरवरी, 2018 से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसी शादियां शुरू होनी थीं. जिलों में अर्जियां मांगी जाने लगीं. जो योजना बीडीओ व नगरपालिका अफसरों की देखरेख में पूरी की जानी चाहिए थी, वह ग्राम प्रधानों और दलालों के हत्थे चढ़ गई.

18 फरवरी, 2018 को शामली के एक बैंक्वेट हाल में 92 जोड़ों के विवाह का आयोजन था. इन में 42 जोड़े हिंदू और 50 जोड़े मुसलिम थे.

मुख्यमंत्री की इस योजना के मुताबिक प्रति विवाह पर 35 हजार रुपए सरकारी खर्चे का प्रावधान है. इस में दुलहन के खाते में 20 हजार रुपए जाने थे और विवाह में कपड़े, गहने और बरतन दिए जाने थे.

इस सामूहिक विवाह आयोजन में जिले के सभी बड़े अफसर शामिल हुए थे और मुख्य अतिथि के रूप में राज्यमंत्री सुरेश राणा भी आए थे.

सबकुछ ठीकठीक ही हो जाता, अगर टैलीविजन चैनल वाले और अखबार रिपोर्टर शादी कराने आए जोड़ों से बात न करते.

जब मीडिया वालों को पता चला कि इन में से तकरीबन 1 दर्जन जोड़े ऐसे हैं जो पहले से ही शादीशुदा हैं, तो वहां हड़कंप मच गया. एक जोड़े की शादी 6 फरवरी को हो गई थी तो दूसरे जोड़े की 8 दिसंबर को. एक जोड़े ने तो 2 दिन पहले ही गृहस्थ जीवन में कदम रखा था.

जब ऐसे जोड़ों से बात की गई तो पता चला कि वे सरकार द्वारा दी जाने वाली माली इमदाद पाने के लिए दोबारा शादी करने को तैयार हो गए थे.

जब बात कलक्टर तक पहुंची तो उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं मालूम. वे मामले की जांच कराएंगे.

24 फरवरी, 2018 को ग्रेटर नोएडा के वाईएमसीए क्लब में 66 जोड़ों के विवाह का आयोजन किया गया था. वहां मीडिया कुछ ज्यादा ही सतर्क था. विवाह के पंडाल में अजीब सी सुगबुगाहट थी.

पता चला कि गांव नंगला चीती, थाना दनकौर के नरेंद्र सिंह ने पहले से ही अफसरों को शिकायतपत्र दिया था कि इस मामले में प्रधानपति धर्मेंद्र सिंह ने फर्जीवाड़ा कर के कई अयोग्य जोड़ों का रजिस्ट्रेशन कर दिया था.

नरेंद्र सिंह की शिकायत रंग लाई. पता चला कि इन में से कई जोड़ों के तो 3-3, 4-4 बच्चे भी हैं. यही नहीं, खुद ग्राम प्रधान बबीता ने अपने पति धर्मेंद्र से दोबारा शादी रचा ली थी. जांच के आदेश के बाद पता चला कि 11 जोड़ों की शादी पहले हो चुकी थी.

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गांव प्रधान रविंद्र सिंह और 2 लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. समाज कल्याण अधिकारी आनंद कुमार ने दनकौर थाने में नंगला चीती की ग्राम प्रधान बबीता और उस के पति धर्मेंद्र सिंह समेत 9 जोड़ों के खिलाफ धारा 420, 409 और 34 के तहत मामला दर्ज करा दिया.

जब सीडीओ अनिल कुमार सिंह और समाज कल्याण अधिकारी आनंद कुमार ने गांव नंगला चीती जा कर पूछताछ की तो पता चला कि 3 जोड़ों ने तो अपने भाईबहनों के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया था और शादीशुदा होने के बावजूद भाईबहनों के नाम पर दोबारा शादी रचाई और सरकारी खजाने की लूट में हिस्सेदार बने.

नंगला चीती गांव की 2 सगी बहनों निशि और बबीता की शादी 12 मार्च को तय थी लेकिन उन्होंने अपने भाई रविंद्र और विनीत के साथ अपना नाम रजिस्टर करा दिया था.

गांव नंगला चीती के सोनी पत्नी रंजीत, सोनिया पत्नी बंटी, पूनम पत्नी हरिओम, फूला पत्नी पवन, पिंकी पत्नी मोहित, लक्ष्मी पत्नी सोविंद्र और सविता पत्नी नवीन, बबीता पत्नी रविंद्र और नीशू पत्नी विनीत ने पैसे के लिए दोबारा फर्जी विवाह कर न केवल सरकारी योजना हड़पने की योजना बनाई बल्कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार का भी मजाक उड़ाया.

औरैया और इटावा में तो अफसरों के पास लूट का यह अच्छा मौका था. उन्होंने सामान की खरीद टैंडर से नहीं, बल्कि जन सेवा शादी ग्रामोद्योग के जरीए की. दुलहन को दी गई चांदी की पायल और बिछुओं पर से चांदी के पानी का रंग क्या उतरा अफसरों की सारी पोल खुल गई.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते हो पंडिताई ऐलान किया था कि अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए उन के राज्य में कोई जगह नहीं है. पिछले दिनों ऐनकाउंटर योजना में बड़ेबड़े गुंडों को बिना अपराध साबित हुए मरवा दिया गया. पर अभी तक 50 साल से ऊपर के मुलाजिमों के कर्मों की स्क्रीनिंग रफ्तार नहीं पकड़ पाई है और किसी भ्रष्ट अफसर और मुलाजिम को जिले में सेवामुक्त करने का मामला भी सामने नहीं आया है इसलिए वे बेखौफ हो कर वही चाल चल रहे हैं जो पिछली सरकारों में चलते थे.

अभी प्रदेश के 22 जिले बाकी हैं, जहां सामूहिक विवाह का आयोजन होना है. इस फर्जीवाड़े से कमाने के मौकों का वहां के अफसर व सरपंच बेचैनी से इंतजार कर रहे हैं. उन्हें मालूम है कि सरकार जो चाहे नियम बना ले, लागू तो उन्हें ही करने हैं और वे कमाई कर ही लेंगे.

मजेदार बात है कि एक भी ब्राह्मण श्रेष्ठ ने 2-2 बार हो रही शादी की पोल नहीं खोली और शादी कराने से इनकार नहीं किया.

VIDEO : रेड वेलवेट नेल आर्ट

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