प्रदेश में भगवा ब्रिगेड के हिंदू संगठनों का बलवा दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है. बूंदी में हर साल होने वाले टाइगर हिल मानधाता पूजन के दौरान हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं के अडि़यल रुख के चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

झगड़ा पूजा वाली जगह को जाने वाले रास्ते को ले कर शुरू हुआ. मानधाता हनुमान मंदिर को जाने का रास्ता मीरा साहब की दरगाह से है. प्रशासन ने इस बार इस रास्ते से मंदिर जाने पर रोक लगा दी थी. हिंदू महासभा इसी रास्ते से मंदिर जाने पर अड़ी रही.

हिंदू महासभा के कहने पर सोमवार, 1 जनवरी, 2018 की सुबह से ही बड़ी तादाद में भगवाई मानधाता बालाजी की ओर जाने के लिए इकट्ठा होने लगे थे.

पुलिस ने लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो उन पर लाठियां बरसानी पड़ीं. एक दर्जन से भी ज्यादा लोगों को चोटें आईं.

बूंदी की घटना वाले दिन 1 जनवरी को सांप्रदायिक दंगा भड़काने के मकसद से अजमेर में एक भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल हुआ. भाषण देने वाले शख्स को हिरासत में ले लिया गया.

पुलिस सुपरिंटैंडैंट राजेंद्र सिंह के मुताबिक, शिव सेना हिंदुस्तान नाम के हिंदूवादी संगठन की ओर से जारी वीडियो में और बहुत सी मुसलिम जगहों की तरह अजमेर दरगाह को भी हिंदू मंदिर बताया गया और बाबरी मसजिद की तर्ज पर उसे भी ढहाने का माहौल  बनाया गया.

चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन सलमान चिश्ती ने भी कहा कि पिछले 800 सालों से हिंदूमुसलिम एकता के प्रतीक इस दरगाह को पहली बार विवाद में घसीटने की कोशिश की जा रही है. देवबंद के उलेमा ने भी सरकार से ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्यवाही करने और इन संगठनों को बैन करने की मांग की.

वैसे, शिव सेना हिंदुस्तान ने वायरल हो रहे वीडियो से खुद को दूर कर लिया. पर मामले की असलियत तो यही है कि किसी तरह उत्पात मचाया जाए.

इस वीडियो में शिव सेना हिंदुस्तान का एक सदस्य लखन सिंह धार्मिक आधार पर भड़काऊ बातें कहता हुआ पाया गया.

इस से पहले भी राजस्थान के बिसाऊ (झुंझुनूं), सूरसागर (जोधपुर) व जैसलमेर में धार्मिक जुलूस निकालने के दौरान तनाव व पत्थरबाजी की खबरें आईं तो देशभर में सियासत द्वारा प्रायोजित दंगों की यादें फिर से ताजा हो गईं.

जयपुर के चौमूं इलाके में भी एक लड़की से छेड़खानी की अफवाह फैली और हिंदू बनाम मुसलिम की आड़ में जाटों को मुसलिमों से लड़ाने की साजिश सामने आई. जब जानकारी जुटाई गई तो यह महज अफवाह निकली.

जयपुर के ग्रामीण व बाहरी इलाकों से कोचिंग के लिए चौमूं व आसपास के इलाकों से आए नौजवानों को दंगों की आग में धकेला जा रहा है. पंचायतें, संभाएं कर के सोशल मीडिया के जरीए इलाके में मुसलिमों से मुक्त करने की कसमें दिलवाई जा रही हैं.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर दंगे की शुरुआत भी छेड़खानी की घटना की आड़ में शुरू की गई थी जिस में जाटों के हजारों नौजवान जेल की यातनाएं व मुकदमों की मार झेल रहे हैं और साजिश करने वाले सत्ता के मजे ले रहे हैं.

राजस्थान में इसी साल चुनाव हैं. भगवा ब्रिगेड भगवाई मुद्दे के सहारे सत्ता पर काबिज होने के मनसूबे पाल रही है.

जिस गुजरात मौडल की बात दुनियाभर में कर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली तक सफर तय किया है, वह गुजरात मौडल और कुछ नहीं था, बल्कि दंगों से सजे श्मशान व कब्रों पर की गई राजनीतिक खेती ही थी, जो अब दोबारा पैदा तो हुई, लेकिन उपज कम मिली.

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से तुरंत पहले भी मुजफ्फरनगर में भाजपा ने आजम खां के बहाने दंगों की बुनियाद रखी थी. भाजपा के नेता संगीत सोम पर दंगा भड़काने का मुकदमा दर्ज हुआ व गिरफ्तारी भी हुई. साध्वी प्राची के भड़काऊ भाषण सब ने सुने हैं.

हरियाणा में हिंदूहिंदू कर के व तमाम जुमले फेंक कर सत्ता पर कब्जा कर लिया गया. हरियाणा में ही किसान रैली कर के नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए लाभकारी स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था और अब सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दे कर मोदी सरकार कह रही है कि स्वामीनाथ रिपोर्ट लागू करना मुमकिन नहीं है.

चुनावों के दौरान हरियाणा में ही सेना वालों की तादाद देखते हुए नरेंद्र मोदी ने रिटायर्ड फौजियों की रैली कर के वन रैंक व वन पैंशन का वादा किया था और आज भी रिटायर्ड फौजी जंतरमंतर पर धरने पर बैठे हैं. उन की कोई सुध लेने वाला नहीं है.

हरियाणा में मुसलिम बहुत कम हैं, तो हिंदूमुसलिम विवाद तो खड़ा नहीं हो सकता, इसलिए किसानों व सेना के लोगों से झूठे वादे कर के सत्ता हड़प ली गई. आज हरियाणा के किसान बरबाद हो रहे हैं, लेकिन हरियाणा की सरकार सरकारी खजाने से गीता जयंती महोत्सव मना रही है.

अब राजस्थान की तरफ इन्होंने कदम बढ़ाए हैं. हिंदूमुसलिम व जातीय नफरत के रूप में दोनों रास्ते सामने पेश कर रहे हैं. आप को जिस में उलझना है उलझ लीजिए और अपने मुद्दों को भूल कर अपनी मौत की कब्र खोद लीजिए.

पिछले साल भीलवाड़ा में दंगा रोकने वाले अफसर पंकज चौधरी को परेशान किया जा रहा है. इसी साल डीडवाना में भाजपा के मंत्री के समर्थकों द्वारा देश विरोधी नारे लगवाए गए. उस से पहले नागौर में गौहत्या के नाम पर दंगा भड़काने की कोशिश की गई.

जाट बहुल नागौर इलाके में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन किया गया था और अब एकसाथ झुंझुनूं, जोधपुर व जैसलमेर से ऐसी खबरें आना इसी तरफ संकेत कर रही हैं.

बाड़मेर में करणी सेना के झंडाबरदार सुखदेव गोगामेड़ी ने ‘35 बनाम एक’ कर के दूसरा रास्ता भी खोल दिया है.

राजस्थान में भगवा ब्रिगेड कोई बड़ा हिंदूमुसलिम दंगा कराने में कामयाब नहीं हुई है, इसलिए ये लोग दूसरा रास्ता भी आजमाना चाहते हैं.

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