सरस सलिल विशेष

मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर हमला बोला है. मुंडका में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी पर मैक्स अस्पताल का समर्थन करने का आरोप लगाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार निजी अस्पतालों के खिलाफ नहीं है, लेकिन अगर कोई अस्पताल गलत हरकत करेगा तो सरकार चुप नहीं बैठेगी.

जीवित बच्चे को मृत बताकर मां-बाप को सौंपने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर सरकार ने एक दिन पहले ही मैक्स अस्पताल शालीमार बाग का लाइसेंस रद्द किया था. मुंडका में इस मामले पर अस्पताल का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने मनोज तिवारी पर हमला बोला.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निजी अस्पतालों के खिलाफ नहीं है. मैक्स अस्पताल ने एक जीते-जागते बच्चे को मरा हुआ घोषित करके उसे मां-बाप को पकड़ा दिया. मां-बाप ने जब पैकेट में हलचल महसूस की तो उसे खोलकर देखा. उस समय बच्चे की सांसे चल रही थीं. इसके चलते अस्पताल पर कार्रवाई की गई है.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से पहले भी इस तरह की हरकतें की जाती रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मैक्स अस्पताल का समर्थन कर रहे हैं. हमें दुख है कि इस मुद्दे पर भाजपा मैक्स अस्पताल के साथ खड़ी है. मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भाजपा पर जनता का हित बेचने और अस्पताल के साथ खड़ा होने का आरोप लगाया.

परिजनों को हालात की जानकारी थी : डॉ. मेहता

मैक्स अस्पताल मामले में बर्खास्त डॉ. एपी मेहता ने एक बयान जारी कर अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि नवजात बच्चे की स्थिति के बारे में परिजनों को पूरी जानकारी दी गई थी. साथ ही, कहा कि परिजनों ने ही बच्चे को रेसिसिटेशन (पुन: होश में लाने की प्रक्रिया) देने से मना किया था.

डॉ. मेहता का कहना है कि बच्चे की मां को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनके परिजनों को प्रसव के बाद की परिस्थिति की पूरी जानकारी दी गई थी. उन्हें बताया गया था कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चे के बच पाने की संभावना कम है. अगर बच्च बच भी गया उसका शारीरिक विकास प्रभावित हुए बिना उसके ठीक रहने की उम्मीद बहुत कम है.

डॉ. मेहता के मुताबिक, परिजनों को यह भी बताया गया था कि बच्चे को लंबे समय तक नर्सरी में रखना पड़ सकता है. इलाज के खर्च की जानकारी भी दी गई थी. उन्हें बच्चों के सामान्य होने की गारंटी भी नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा कि अगले दिन सुबह 7:30 बजे जुड़वां बच्चों को जन्म हुआ. इसमें से एक लड़की मृत जन्म ली थी. दूसरे नवजात (लड़का) को रेसिसिटेशन देने के लिए प्रसव कराने वाले डॉक्टर ने परिजनों से पूछा, जिस पर उन्होंने इनकार कर दिया था.

घरवालों ने इनकार किया

बच्चे के परिजनों ने डॉ. एपी मेहता की सफाई को पूरी तरह से नकार दिया है. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी तरफ से रेसिसिटेशन देने से मना किया गया. उनका कहना है कि डॉक्टर ने इलाज के खर्च के बारे में जानकारी जरूर दी थी, पर यह नहीं बताया था कि रेसिसिटेशन देने से बच्चे पर क्या असर पड़ सकता है. बच्च चाहे जिस अवस्था में हो क्या कोई अपने बच्चे का इलाज करने से डॉक्टरों को मना कर सकता है.