यह सही बात है. उद्योगपति ही देश की रगों में वह खून देते हैं जिस से अर्थव्यवस्था चलती है और अगर उन की समस्याएं सुनी व समझी न जाएं तो कोई देश ढंग से नहीं चल सकता.